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India at 75: आजादी के बाद भारत की 10 बड़ी उपलब्धियां

नई दिल्ली, 9 अगस्त: भारत की आजादी के 75 वर्ष हो रहे हैं। इन 75 वर्षों में देश ने जीवन के हर क्षेत्र में अनगिनत उपलब्दियां हासिल की हैं। सामाजिक जीवन हो या अर्थव्यवस्था, शिक्षा हो या स्वास्थ्य, धरती, जल हो या आसमान या फिर रक्षा क्षेत्र हर जगह भारत का तिरंगा लहराया है। 75 साल की यह यात्रा जितनी ही शानदार रही है, उससे कहीं ज्यादा अनगिनत लोगों का इसमें योगदान भी शामिल है। लेकिन, भारत की इस विकास यात्रा में कुछ चीजें मील का पत्थर साबित हुई हैं, जिसके दम पर हमें इतनी बड़ी कामयाबी मिली है। हम उन्हीं 10 चुनिंदा पहलुओं की यहां पर चर्चा करने जा रहे हैं।

75 वर्षों में कितना आगे बढ़ा भारत ?

75 वर्षों में कितना आगे बढ़ा भारत ?

15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिलने के साथ ही एक आजाद देश के रूप में भारत ने अपनी प्रगति की यात्रा शुरू की। कृषि क्षेत्र से लेकर, परमाणु और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक,आम आदमी की पहुंच के लायक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर, विश्व-स्तरीय शिक्षण संस्थाओं तक, मेडिकल साइंस से लेकर आयुर्वेद और उपचार की विभिन्न पद्धतियों तक, बायोटेक्नोलॉजी से लेकर, दुनिया में एक समर्थ आईटी पावर बनकर उभरने तक, विश्व में तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यस्थाओं में शामिल होने से लेकर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने तक भारत ने चहुंमुखी बदलाव देखा है।

देश का अपना संविधान

देश का अपना संविधान

आजादी के बाद भारत ने स्वतंत्र भारत में अपनी सबसे पहली उपलब्धि तब हासिल की जब 26 जनवरी, 1950 को हमारा अपना संविधान लागू हुआ। इसके साथ ही अंग्रेजों के जमाने का गवर्मेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट, 1935 समाप्त हो गया और भारत एक गणराज्य बना। भारत में संविधान ही सर्वोच्च है और संविधान ही संप्रभु। चाहे मौलिक अधिकारों की बात हो या मूल कर्तव्यों की, इसकी व्यवस्था संविधान में ही की गई। संविधान पर ही आधारित हमारा लोकतंत्र है; और इसी वजह से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में हमारी विश्व स्तर पर अपनी एक प्रतिष्ठा और पहचान कायम हुई है।

पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत

पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत

भारत के विकास में पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत मील का पत्थर साबित हुआ है। पहली पंचवर्षीय योजना को 1951 में संसद में पेश किया गया था। इसका फोकस प्राइमरी सेक्टर के विकास पर था, जिसका लक्ष्य कृषि क्षेत्र की तरक्की पर केंद्रित था। स्वतंत्रता के बाद देश के पुनिर्विकास में एक के बाद एक कई पंचवर्षीय योजनाएं आईं और देश आज जहां खड़ा है, उसमें इन योजनाओं ने महत्वपूर्ण आधार का काम किया है।

आम चुनावों की शुरुआत

आम चुनावों की शुरुआत

1950 में भारत गणराज्य बना और लोकतंत्र के महापर्व यानी चुनावों की शुरुआत 1951-52 में आम चुनावों के साथ हुई। आम चुनावों के बाद 13 मई, 1952 को पहली लोकसभा का पहला सत्र आरंभ हुआ। पहले लोकसभा चुनावों में देश में सिर्फ 489 सीटें थीं और कुल योग्य मतदाताओं की संख्या 17.3 करोड़ ही थी। उस चुनाव में कांग्रेस को 364 सीटें मिलीं और जवाहर लाल नेहरू पहली बार लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के प्रधानमंत्री बने थे। इतने दिनों में जितनी बार भी लोकसभा के चुनाव हुए हैं, देश का लोकतंत्र सशक्त भी हुआ है और उसने तरह-तरह की चुनौतियों का सामना करना भी सीखा है।

हरित क्रांति

हरित क्रांति

भारत में हरित क्रांति की अगुवाई मुख्य तौर पर एमएस स्वामिनाथन ने की थी। 1967-68 से लेकर 1977-78 के बीच हरित क्रांति की वजह से भारत एक खाद्यान की कमी वाले देश की श्रेणी से उठकर दुनिया के अग्रणी कृषि पैदावार वाले राष्ट्र में शामिल हो गया। हरित क्रांति की वजह से देश में अनाज के पैदावार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई (खासकर गेहूं और धान के उत्पादन में)। आज भारत के पास सरप्लस अनाज का भंडार रहता है, जिससे अपनी आवश्यकताएं भी पूरी होती हैं और मित्र एवं जरूरतमंद देशों को भी सहायता की जाती है।

भारत का पहला रॉकेट लॉन्च

भारत का पहला रॉकेट लॉन्च

भारत का पहला रॉकेट 21 नवंबर, 1963 को तिरुवनंतपुरम के पास थुबां से लॉन्च हुआ था और इसके साथ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हो गई। आज की तारीख में भारत पेशेवर तौर पर दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अपने रॉकेट से पृथ्वी की कक्षाओं में स्थापित करने में वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के कदम रखने के पीछे डॉक्टर विक्रम साराभाई जैसे महान वैज्ञानिक की ऊर्जा और सामर्थ्य शक्ति थी।

इसरो का गठन

इसरो का गठन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का गठन पहले रॉकेट की लॉन्चिंग को मिली सफलता के बाद 1969 में किया गया। इसरो के गठन का लक्ष्य अंतरिक्ष विकास के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान में अनुसंधान और ग्रहों की खोज के साथ-साथ राष्ट्र के विकास के लिए किया गया था। इसरो ने इससे पहले के इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च का स्थान लिया, जिसे 1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने स्थापित किया था। अब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम चंद्रमा और मंगल मिशन पर फोकस कर रहा है। चंद्रयान वह पहला मिशन है, जिसने चांद पर किसी भी रूप में पानी की संभावना का पता लगाया है।

ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति)

ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति)

ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत 13 जनवरी, 1970 को की गई थी। यह दुनिया का सबसे विशाल डेयरी डेवलपमेंट प्रोग्राम था, जिसने दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत को जमीन से आसमान पर पहुंचा दिया। इस कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इसी से लगता है कि कार्यक्रम की शुरुआत में दूध उत्पादन के क्षेत्र में भारत जो 50वें पायदान पर था, वह सिर्फ दो दशक में ही दूध उत्पादन के मामले टॉप पर पहुंच गया। डॉ वर्गीज कुरियन ऑपरेशन फ्लड के शिल्पकार थे।

परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना भारत

परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना भारत

भारत ने 18 मई, 1974 को पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण करके ही अपने सामर्थ्य से दुनिया को परिचय करा दिया था। लेकिन, जब इसके 24 साल बाद 11 और 13 मई, 1998 को पोखरण में डीआरडीओ और अटॉमिक एनर्जी कमीशन ने एक के बाद 5 परमाणु परीक्षण किए तो विश्व भारत का लोहा मानने को मजबूर हुआ। इन परीक्षणों के साथ ही देश ने दुनिया में आधिकारिक रूप से परमाणु शक्ति का दर्ज हासिल किया। इस मिशन की अगुवाई डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और डॉक्टर आर चिदंबरम जैसे वैज्ञानिकों ने की थी।

नीति आयोग का गठन

नीति आयोग का गठन

पूर्व के योजना आयोग की विरासत के आधार पर ही नीति आयोग बनाया गया है, जिसने देश के विकास के लिए योजना-निर्माण और उसे लागू करने का तरीका ही पूरी तरह से बदल दिया है। 1 जनवरी, 2015 को इसका गठन किया गया था। इसमें सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और उसका लक्ष्य है कि सहकारी संघवाद के आधार पर देश के विकास के लिए आर्थिक नीतियों का निर्माण करना। नीति आयोग एक पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक के रूप में काम करता है, जिससे देश की आर्थिक तरक्की को अमलीजामा पहनाना ज्यादा आसान हुआ है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)

देश में वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था की शुरुआत 1 जुलाई, 2017 से भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुई है। इस व्यवस्था ने भारत में कर प्रणाली की विसंगतियों को दूर कर दिया है और एक बार फिर से इसके जरिए सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने की पहल की गई है। इस व्यवस्था के चलते देश में कर प्रणाली में समरुपता आने से आम जनता और कारोबारियों की कई तरह की उलझनें भी कम हुई हैं और सरकारों का राजस्व भी बढ़ा है और साथ ही साथ भेदभाव दूर होने का आधार मजबूत हुआ है।

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