'विपक्ष के घर ED और अर्थव्यवस्था 6वें पायदान पर' केजरीवाल का केंद्र पर हमला, IMF के आंकड़ों ने बढ़ाई हलचल
Arvind Kejriwal on Indian Economy: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की आर्थिक स्थिति और केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
केजरीवाल ने इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि एक तरफ भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक रैंकिंग में नीचे खिसक रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार का पूरा ध्यान केवल विपक्ष के नेताओं को परेशान करने पर है।

अर्थव्यवस्था में गिरावट: भारत 5वें से 6वें स्थान पर खिसका
हाल ही में जारी IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के आंकड़ों ने देश के आर्थिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं रहा और एक पायदान नीचे खिसककर छठे (6th) स्थान पर आ गया है। 2024 में भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए 5वां स्थान हासिल किया था, तब भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.76 ट्रिलियन डॉलर की थी। लेकिन 2025 में ब्रिटेन (करीब 4 ट्रिलियन डॉलर) ने भारत को फिर से पीछे छोड़ दिया है।
2025 में भारत की अर्थव्यवस्था बढ़कर 3.92 ट्रिलियन डॉलर तो हुई है, लेकिन रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण वैश्विक रैंकिंग में यह गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का 88.48 (औसत) तक गिरना इस रैंकिंग में गिरावट की सबसे बड़ी वजह रही है।
बेरोजगारी और मंदी, लेकिन सरकार को केवल ED की फुरसत
अरविंद केजरीवाल ने इन आंकड़ों को आधार बनाकर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा-देश की अर्थव्यवस्था गिरकर अब छठे स्थान पर आ गई है, रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है, लोगों के काम-धंधे बंद हो रहे हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है। लेकिन मोदी सरकार के पास विपक्ष के नेताओं के घर ED भेजने से फ़ुर्सत नहीं है। क्या ऐसे आगे बढ़ेगा देश?
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी आर्थिक समस्याओं जैसे महंगाई और बेरोजगारी का समाधान करने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध में जुटी है। उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक एजेंसियाँ केवल राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने का हथियार बनी रहेंगी?
2031 तक 'तीसरी बड़ी शक्ति' बनने का लक्ष्य प्रभावित?
भारत सरकार का लक्ष्य 2027-28 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रहा है। हालांकि, ताजा रैंकिंग में इस गिरावट और रुपये की कमजोरी को देखते हुए IMF के विश्लेषकों का मानना है कि भारत को तीसरा स्थान हासिल करने के लिए अब 2031 तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
अरविंद केजरीवाल के इस आर्थिक बम ने संसद के विशेष सत्र के बीच सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। जहां सरकार इसे केवल 'करेंसी फ्लक्चुएशन' (मुद्रा का उतार-चढ़ाव) बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक विफलता और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में पेश कर रहा है।














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