Independence Day: ना के बराबर साक्षरता दर से डिजिटल इंडिया तक, अशिक्षा के खिलाफ भारत की लंबी लड़ाई
77th Independence Day: जब भारत को ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली, तो देश में ऐसे लोगों की भारी आबादी बची थी जो पढ़ या लिख नहीं सकते थे। 1950 में सिर्फ 10 में 2 भारतीय ही साक्षर थे। 2024 में ये आंकड़े लगभग उलट हो गए हैं। 1951 में मात्र 18.3% की साक्षरता दर से 2018 में 74.4% साक्षरता दर तक, भारत ने एक सुशिक्षित राष्ट्र की स्थापना में एक लंबा सफर तय किया है।
दुनिया को वेदों का ज्ञान देने वाला भारत विदेशी हुकूमतों की वजह से लड़खड़ाया लेकिन अब फिर से विश्व गुरु बनने की राह पर भारत बढ़ रहा है। ना पढ़-लिख पाने के संघर्ष से निकलकर भारत डिजिटल इंडिया के सफर पर रफ्तार से निकल चुका है। आज आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाइए, आपको भारत के वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर और तकनीशियन मिल जाएंगे। लेकिन इस दिशा में अभी भी बहुत काम करना बाकी है।

अशिक्षा के खिलाफ भारत ने लड़ी लंबी लड़ाई
आजादी के बाद भारत में साक्षरता दर में कई गुना बढ़ी है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक भारत में साक्षरता दर फिलहाल 77.7 प्रतिशत है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2060 में सार्वभौमिक साक्षरता हासिल कर लेगा। यानी भारत लगभग पूरी आबादी साक्षर होगी।
2011 की जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक देश में साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता दर 82.14 और महिला साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत है। लेकिन जब भारत को स्वतंत्रता मिली थी तो साक्षरता दर 15 फीसदी से भी कम थी। 1951 के आंकड़ों के मुताबिक हमारी साक्षरता दर 18.33 फीसदी थी, जिसमें से पुरुष साक्षरता दर 27.16% और महिला साक्षरता दर 8.86% ही थी। महिला और पुरुषों की साक्षरता दर में 18.30% का अंतर था।
1961 में भारत की साक्षरता दर 28.30% हुई, 1971 में साक्षरता दर 34.45%, 1981 में साक्षरता दर 43.57%, 1991 में साक्षरता दर 52.21% और 2001 में साक्षरता दर 65.38% हुई और 2011 में ये 74.04 प्रतिशत पर पहुंची।
पिछले कुछ सालों में विभिन्न पहलों और हस्तक्षेपों की बदौलत, पांच में से तीन भारतीय अब पढ़ और लिख सकते हैं। जनसंख्या में भारी वृद्धि के बावजूद हाल के दशकों में साक्षरता में तेज वृद्धि एक उल्लेखनीय सकारात्मक प्रगति को दिखाती है।
स्वतंत्रता के बाद से भारतीय महिलाओं की साक्षरता दर में 68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई
पिछले कुछ सालों में भारतीय महिलाओं की साक्षरता दर में शानदार बढ़ोतरी हुई है। विश्व बैंक इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की स्वतंत्रता के समय 11 में से केवल 1 लड़की ही साक्षर थी, जो लगभग 9 प्रतिशत है। वर्तमान में महिलाओं की साक्षरता दर 77 फीसदी हो गई है, जबकि भारत की पुरुष साक्षरता दर 84.7% है।
सरकार की राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक केरल 92.2% के साथ देश का सबसे साक्षर राज्य है, उसके बाद केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप 91.85% है। देश का तीसरा सबसे साक्षर राज्य मिजोरम 91.33% है। जबकि बिहार में भारत में सबसे कम साक्षरता दर 61.8% है, उसके बाद अरुणाचल प्रदेश 65.3% और राजस्थान 66.1% है।
हालांकि, भारत में लगभग 12.6% छात्र स्कूल छोड़ देते हैं और 19.8% माध्यमिक स्तर पर शिक्षा छोड़ देते हैं। हालांकि लड़कियों के मामले में यह संख्या काफी ज्यादा है क्योंकि उनकी शादी जल्दी हो जाती है और कई समुदायों में लड़कियों को शिक्षित करना प्राथमिकता भी नहीं है। वैश्विक स्तर पर 1.8 मिलियन लड़कियों की शादी कम उम्र में हो जाती है।
भारत में, महिला साक्षरता दर सहित साक्षरता दर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बेहद कम है। ग्रामीण भारत में साक्षरता दर 67.77% है जबकि शहरी भारत में यह 84.11% है। भारत में आज भी लिंग के आधार पर शिक्षा में बड़ा अंतर बना हुआ है।
महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए सरकार ने उठाए कई अहम कदम
शिक्षा मंत्रालय ने 2018 और 19 में ''समग्र शिक्षा योजना'' (Samagra Shiksha Scheme) शुरू की, जिसमें स्कूल को प्रीस्कूल, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक से हाई माध्यमिक स्तर तक एक निरंतरता के रूप में बांटा गया।
इसके अलावा वयस्कों के बीच साक्षरता दर में सुधार के लिए वयस्क शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना ''साक्षर भारत'' (Saakshar Bharat) भी शुरू की गई। यह योजना 26 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 404 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू की गई थी, जहां 2001 की जनगणना के मुताबिक वयस्क महिला साक्षरता दर 50% और उससे कम थी।
योजना को 31 मार्च 2018 तक बढ़ा दिया गया था। साक्षर भारत योजना के तहत 7 करोड़ वयस्क गैर-साक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। अगस्त 2010 मार्च 2018 तक राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) द्वारा आयोजित द्विवार्षिक बुनियादी साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा पास करने वाले लगभग 7.64 करोड़ शिक्षार्थियों को साक्षर के रूप में प्रमाणित किया गया।
100% साक्षरता हासिल करना भारत का अब अगला लक्ष्य
देश के शिक्षा क्षेत्र में क्रांति आने का बावजूद हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि भारत को अभी भी पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य की ओर एक लंबा सफर तय करना है। दुनिया के लगभग 87 करोड़ निरक्षर वयस्कों में से 30 करोड़ भारतीय हैं।
भारत में साक्षरता दर में वृद्धि हो रही है क्योंकि अधिक से अधिक लोग बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन यह अभी भी सभी को शामिल करने से हम दूर है। 2022 में भारत में साक्षरता की डिग्री लगभग 76.32 प्रतिशत थी, जिसमें अधिकांश साक्षर भारतीय पुरुष थे। यह अनुमान लगाया गया है कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए वैश्विक साक्षरता दर लगभग 86 प्रतिशत है।
भारत को साक्षर बनाने की दिशा में ही भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू किया है। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति का लक्ष्य अगले एक दशक में 100% साक्षरता हासिल करना है। इस दिशा में सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिसमें पीएम श्री योजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, नेशनल रिसर्च प्रोफेसरशिप, पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षक और शिक्षण पर राष्ट्रीय मिशन से लेकर समग्र शिक्षा अभियान, उन्नत भारत अभियान तक जैसा कई योजनाएं शामिल हैं।
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