ओडिशा में गोद जाने वाले बच्चों की संख्या में हुआ इजाफा, किशोर न्याय अधिनियम में बदलाव के बाद ये हुआ संभव
Adoption of orphan children in Odisha: ओडिशा में बीते एक साल में गोद लेने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। अनाथ और परित्यक्त बच्चों को गोद लेना आसान बनाने के लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम में संशोधन किए जाने के बाद अनाथ बच्चों अधिक गोद लिए जा रहे हैं।

बता दें अनाथ बच्चों को गोद लिए जाने की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद गोद लेने वाले माता-पिता को अंतिम मंजूरी प्राप्त करने के लिए परिवार या सिविल अदालतों के चक्कर काटने पड़ते थे जिस कारण अनाथालय से बच्चे को गोद लेना यह एक लंबी प्रक्रिया बन जाता था।
साल 2022 सितंबर में केंद्र सरकार ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम में संशोधन किया, जिससे गोद लेने को अधिकृत करने की शक्ति न्यायपालिका से जिला कलेक्टरों को ट्रांसफर कर दी गई, जिससे प्रक्रिया कम समय लेने वाली और परेशानी मुक्त हो गई।
अनाथ और परित्यक्त बच्चों को गोद लेना आसान बनाने के लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम में संशोधन किए गए। जिसके बाद गोद लेने में आसानी होने पर ये बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।
महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि 2022-23 में 188 अनाथ/परित्यक्त/आत्मसमर्पित बच्चों को दत्तक गृह मिले हैं यानी वो गोद लिए जा चुके हैं। वहीं 2023 में जनवरी से अक्टूबर तक विभाग की विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों (एसएए) के जरिए अतिरिक्त 130 बच्चों को गोद लिया गया है।
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल, 2021 से मार्च, 2022 तक ओडिशा के 150 बच्चे जिनमें 65 लड़के और 85 लड़कियां शामिल हैं, इन बच्चों को देश में गोद लिया गया। वहीं राज्य से अंतर-देशीय गोद लेने की संख्या मामले में यह संख्या 28 है जिनमें 10 लड़के और 18 लड़कियों को गोद दिया गया है।
विभाग के अंतर्गत 28 जिलों में 33 एसएए हैं जिनके माध्यम से बच्चों को गोद लिया जाता है। अधिनियम के अनुसार गोद लेने की अप्लीकेशन आने के दो महीने के अंदर निपटाया जाना चाहिए लेकिन गोद लेने की प्रक्रिया में कम से कम तीन साल लगते हैं।












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