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ऑनलाइन इनकम टैक्स भरने से पहले जमा कर लें ये 10 अहम डॉक्यूमेंट

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने करदाताओं के इनकम टैक्स की e-filing के लिए अपनी वेबसाइट खोल दी है। समय आ गया है जब असेसमेंट ईयर 2018-19 और वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सभी इनकम टैक्स पेयर्स अपने कर का भुगतान कर पाएंगे। इस प्रक्रिया की शुरुआत से पहले हो सकता है आपके मन में कई सवाल/संदेह हों तो आप चिंतित बिल्कुल न हों, इस खबर में आपके उन हर सवाल का जवाब मिल जाएगा। आयकर एक प्रत्यक्ष कर है जिसे करदाता द्वारा सीधे भारत सरकार को भुगतान किया जाता है। इनकम टैक्स सिर्फ उन लोगों के अनिवार्य है जिनकी आय (Taxable) कर देने योग्य हो। आपके टैक्स देने की योग्यता टैक्स स्लैब और आय के स्रोतों के मुताबिक अलग-अलग हो सकते हैं। आयकर भुगतान इसलिए सबसे अधिक अनिवार्य है क्योंकि यह आपकी आय का इकलौता कागजी प्रमाण होता है। इनकम टैक्स ऑनलाइन भरने से पहले जानिए वो कौन से 10 कागजात हैं जिनके बिना आप ऑनलाइन टैक्स नहीं भर पाएंगे तो देर किस बात की सबसे पहले जान लीजिए उन हर एक डॉक्यूमेंट के बारे में जिनके बिना आपका काम मुश्किल हो सकता है।

1. PAN Card :

1. PAN Card :

आयकर विभाग के द्वारा जारी परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन कार्ड) एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसके बिना आप इनकम टैक्स नहीं भर सकते हैं। इस कागजात में आपका नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि और PAN Number मौजूद होता है। इनकम टैक्स के ऑनलाइन भरने की प्रक्रिया में सबसे पहले एक यूजर के तौर पर आपको इस कागजात को पुख्ता करना होगा। इनकम टैक्स वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 31, 2018 तक कुल 37.9 करोड़ लोगों/संस्थाओं को PAN कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 36.9 करोड़ PAN व्यक्ति विशेष को जारी किए गए हैं। यह कतई जरूरी नहीं है कि अगर आपके पास पैन कार्ड है तो आप टैक्स भरें ही। वित्त वर्ष 2017-18 में, लगभग 67 मिलियन आयकर रिटर्न दायर किए गए थे, जो आवंटित कुल पैन का लगभग 18% है।

2. आधार कार्ड :

2. आधार कार्ड :

देश में शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जो इस कार्ड के बारे में न जानता हो। भारत में जन्मे हर शख्स के लिए "आधार ही पहचान" है। 12 अंकों वाले इस यूनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड को भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। Aadhaar Card में दी गई जानकरी इनकम टैक्स भरने के लिए नितांत ही आवश्यक है। आंकड़े के लिहाज से देखें तो 18 जून 2018 तक 121.46 करोड़ लोगों को उनका आधार जारी कर दिया गया है।

3. सैलरी स्लिप :

3. सैलरी स्लिप :

कमाने वाले शख्स के लिए जब आयकर भरने की बारी आती है तो इस दस्तावेज की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। रोजमर्रा की भाग-दौड़ में आप ने भले ही सैलरी स्लिप को बहुत ध्यान से नहीं देखा हो लेकिन इसमें दी गई कई जानकारी Income Tax Return फाइल करने के वक्त खासा मायने रखती है। सैलरी स्लिप में आपकी बेसिक सैलरी, टीडीएस में कटी राशि, Deductions, महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस, यात्रा भत्ता से जुड़ी कई अहम जानकारियां मौजूद होती हैं।

4. फॉर्म 16

4. फॉर्म 16

फॉर्म 16, जिसे टीडीएस सर्टिफिकेट भी कहा जाता है,यह एक दस्तावेज है जो किसी भी कर्मचारी को उनके नियोक्ता (employer) द्वारा प्रदान किया जाता है। इसमें कर्मचारी के सैलरी ब्रेअकप और टीडीएस से संबंधित सभी विवरण शामिल होते हैं। वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। फॉर्म 16 में नियोक्ता के TAN और पैन नंबर भी शामिल होते हैं।

5. Form 26AS

5. Form 26AS

फॉर्म 26AS एक ऑटो जनरेटेड वार्षिक आयकर विवरण है। इसमें किसी भी वित्तीय वर्ष में हुई आपकी आमदनी के खिलाफ काटे गए टैक्स का विवरण शामिल होता है। यह जानकारी आपके PAN कार्ड (वित्तीय वर्ष की कुल कमाई) के मुताबिक जारी किया जाता है। TRACES की वेबसाइट से कोई भी आयकर दाता अपना Form 26AS देख सकते हैं या फिर डाउनलोड भी कर सकते हैं।

फॉर्म 26 AS में होती है ये जानकारी :
(a). employer के द्वारा काटा गया टैक्स
(b) बैंकों द्वारा कटौती की गई टीडीएस की जानकारी अगर वित्त वर्ष 2017-18 में ब्याज आय 10,000 रुपये से अधिक है
(c) किसी भी संस्थान द्वारा पेमेंट किए जाने पर काटे गए टैक्स की जानकारी
(d) वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान आपके द्वारा जमा किए गए अग्रिम कर की जानकारी
(e) आपके द्वारा भुगतान किए गए असेसमेंट टैक्स की जानकारी

6. बैंक और पोस्ट ऑफिस से इंटरेस्ट सर्टिफिकेट :

6. बैंक और पोस्ट ऑफिस से इंटरेस्ट सर्टिफिकेट :

किसी भी बैंक के बचत खाते, पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपोजिट या रेकरिंग डिपोजिट पर मिला ब्याज टैक्सेबल इनकम के दायरे में आता है. इसलिए सभी करदाताओं को बैंक या पोस्ट ऑफिस से इंटरेस्ट सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इस कागजात में आपको कुल कमाए ब्याज की पूरी जानकारी मिलेगी। अगर आपकी सैलरी से किसी भी तरह का टीडीएस नहीं काटा गया हो।

7. टैक्स सेविंग प्रूफ :

7. टैक्स सेविंग प्रूफ :

टैक्स बचत के लिए सबसे अधिक कागजात टैक्स सेविंग प्रूफ है। I-T Act के 80C, 80CCC, 80CCD (1) के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में आपके द्वारा किए इन्वेस्टमेंट टैक्स बचाने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। जानिए वो कौन से जरूरी इन्वेस्टमेंट इसका हिस्सा होते हैं।
(a) कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ)
(b) पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
(c) ELSS स्कीम और म्यूच्यूअल फंड में किया निवेश
(d) जीवन बीमा निगम में किया निवेश (LIC Premium)
(e) नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस)

सेक्शन 80C के तहत इन्वेस्टमेंट के अलावा कुछ ऐसे भी खर्च हैं जो टैक्स लाभ के दायरे में आते हैं. इन खर्च में होम लोन (मूल धन की अदायगी), बच्चों के लिए अभिभावक के द्वारा दी गई ट्यूशन फी। इनके अलावा घर की खरीदारी या उसके निर्माण में जुड़े कुछ खर्च भी इस दायरे में आते हैं।

8. सेक्शन 80D से 80U के बीच हुई कटौती :

8. सेक्शन 80D से 80U के बीच हुई कटौती :

सभी करदाता सेक्शन 80C के तहत किए गए इन्वेस्टमेंट के अलावा 80D से लेकर 80U सेक्शन में किए निवेश या व्यय के जरिए भी इनकम टैक्स में हुई कटौती को क्लेम कर सकते हैं। यह क्लेम मौजूदा वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए मान्य होगा। इस सेक्शन में हेल्थ इंश्योरेंस के तौर दिए गए प्रीमियम इन्वेस्टमेंट के तौर पर मान्य होंगे। उदाहरण के तौर पर मौजूदा वित्तीय वर्ष 2017-18 में सेक्शन 80D के तहत 25000 रूपये का सालाना हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स कटौती में मान्य होगा।

9. बैंक या NBFC से जारी होम लोन स्टेटमेंट:

9. बैंक या NBFC से जारी होम लोन स्टेटमेंट:

अगर आपने किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से होम लोन लिया है तो सबसे पहले आप लोन स्टेटमेंट रख लें. Income Tax Act, 1961 के सेक्शन 80C और सेक्शन 24 के तहत किसी भी होम लोन के लिए आपके टैक्स क्लेम कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि आप होम लोन का स्टेटमेंट जमा कर रख लें। होम लोन पर जमा किए गए ब्याज की राशि टैक्स डिडक्शन के दायरे में आता है जिसके लिए करदाता क्लेम कर सकते हैं।

10. पूंजीगत लाभ (Capital gains) :

10. पूंजीगत लाभ (Capital gains) :

अगर आपने किसी भी प्रॉपर्टी या म्यूच्यूअल फंड पर पूंजीगत लाभ पाया है तो आपको इसे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाना होगा। 31 मार्च 2018 से पहले बेचे गए इक्विटी शेयर और इक्विटी से संबंधित म्यूच्यूअल फंड टैक्स के दायरे से बाहर होंगे लेकिन इसे कम से कम एक साल तक आपने रखे हों। 01 अप्रैल 2018 के बाद इक्विटी शेयर और इक्विटी से संबंधित म्यूच्यूअल फंड पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा अगर इससे कमाई राशि एक लाख से अधिक हो जाएगी।

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