PM मोदी और पोप की मुलाकात से BJP को किन राज्यों में है फायदे की उम्मीद ? जानिए
नई दिल्ली, 1 नवंबर: भाजपा को उम्मीद है कि वेटिकन सिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोप फ्रांसिस के बीच हुई मुलाकात से उसे आने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ राज्यों में फायदा मिल सकता है। अलबत्ता कांग्रेस को ऐसा होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आती। पीएम मोदी और पोप की मुलाकात को मीडिया में काफी कवरेज मिली है और यही वजह है कि भाजपा इस मुलाकात को चुनावी चश्मे से देख रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी इस मुलाकात का स्वागत किया है, जो (जबरिया) धर्मांतरण के खिलाफ अभियान चलाता रहा है।

गोवा बीजेपी को है चुनावों में फायदे का भरोसा
गोवा सरकार में मंत्री और राज्य में बीजेपी के कैथोलिक चेहरे मोविन गोडिन्हो ने ईटी से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोप फ्रांसिस की मुलाकात को देश और राज्य के लिए ऐतिहासिक पल बताया है। उनके मुताबिक इससे कांग्रेस का 'भ्रामक अभियान' खत्म हो जाएगा कि बीजेपी सांप्रदायिक है। उन्होंने कहा है कि गोवा में पार्टी इसे अपने चुनाव अभियान में प्रमुखता से उठाएगी, जहां 27% कैथोलिक वोट है। उनका कहना है कि 2017 में सेंट फ्रांसिस जेवियर्स के पुरावशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने के अलावा भी भाजपा सरकार ने कैथोलिक समुदाय के लिए सब कुछ किया है।

मणिपुर को लेकर भी भाजपा की बढ़ी उम्मीद
उस प्रदर्शनी को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि 'कांग्रेस लोगों से यह कहने की कोशिश कर रही थी कि केंद्र की बीजेपी प्रदर्शनी का समर्थन नहीं करेगी, लेकिन इसे भव्य तरीके से मनाया गया। इसी तरह, अब उन्होंने लोगों को यह बताने की कोशिश की कि पोप को कभी भी आमंत्रित नहीं किया जाएगा, क्योंकि भाजपा अल्पसंख्यक विरोधी है। इस एक मुलाकात से वह सब खत्म हो गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी के मन में कैथोलिक के हितों का बहुत ज्यादा ख्याल है।' उनका कहना है कि गोवा में बीजेपी के 27 एमएलए में से 15 कैथोलिक हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि मोदी-पोप मुलाकात से पार्टी को मणिपुर में भी मदद मिलेगी, जहां क्रिश्चियन आबादी करीब 41.29% है। इन्होंने उदाहरण देकर बताया कि बीजेपी ने किस तरह से ईसाई-बहुल नगालैंड और मेघालय में सत्ता हासिल की है।

आरएसएस ने किया है पीएम मोदी-पोप की मुलाकात का स्वागत
आरएसएस के सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भी इस मुलाकात का स्वागत किया है, जो धर्मांतरण के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं। खास बात ये है कि पीएम मोदी ने ऐसे समय में पोप से मुलाकात करके बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, जब उनकी पार्टी पंजाब में दलितों के ईसाई बनने का मुद्दा उठा रही है। जबकि, लेखक जॉन दयाल का दावा है कि जब 1999 में पोप जॉन पॉल II भारत आए थे तो संघ ने इसका विरोध किया था। क्योंकि, उन्होंने चर्च के जिस दस्तावेज 'एक्लेशिया इन एशिया' का विमोचन किया था, आरएसएस को लगता था कि इससे बड़े पैमाने पर धर्मांतरण को बढ़ावा मिलेगा।

कांग्रेस को है भरोसा कैथोलिक वोट बैंक उसका है
हालांकि, कांग्रेस को नहीं लगता कि पोप से प्रधानमंत्री के मुलाकात कर लेने भर से गोवा के कैथोलिक समुदाय पर बीजेपी को लेकर कोई असर पड़ेगा। पार्टी एमएलए एलेक्सियो रेगिनाल्डो लॉउरेंको ने दावा है कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि गोवा में कैथोलिक समुदाय बीजेपी सरकार के खिलाफ नाराजगी को लेकर एकजुट है। उनका दावा है कि, 'बीजेपी को किसी भी फोटो से मदद नहीं मिलने वाली। राज्य के कैथोलिक बीजेपी के खिलाफ पूरी तरह से एकजुट हैं। यह समुदाय इस बात का इंतजार कर रहा है कि कांग्रेस एकजुट हो जाए।' एक और कांग्रेस नेता का मानना है कि मनोहर पर्रिकर के समय में बीजेपी ने जिस तरह कैथोलिक वोट बैंक में सेंध लगाई वह अपवाद था, जो कि अब नहीं होने जा रहा। वैसे 1963 से गोवा में 13 मुख्यमंत्री हो चुके हैं, लेकिन 1990 से 2000 के बीच ही सिर्फ 5 कैथोलिक को यह मौका मिल पाया है।












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