बिहार में खुली 779 मुन्नाभाइयों की पोल , 20 हजार शिक्षकों की जा सकती है नौकरी

दरअसल मामले का पेंच यह है कि शिक्षकों ने फर्जी ढंग से अपने प्रमाण-पत्र लगाए थे। एक अखबार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में शिक्षक नियोजन योजना के अंतर्गत 12 हजार याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप लगाए थे, जो अब साबित होते नजर आ रहे हैं।
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2005 में नीतीश कुमार के शासन में जहां सरकार शिक्षा व रोजगार को प्राथमिकता दे रही थी वहीं शिक्षक भर्ती में लंबा-चौड़ा झोल चल रहा था। जैसे-जैसे जांच हो रही तो फर्जी नौकरी की पर्तें खुलती जा रही हैं जिसकी सीधी जिम्मेदारी नीतीश कुमार के कंधों पर आ रही है।
इस अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने शिकायतों पर संज्ञान लिया व जांच 7000 आवेदनों में से 779 फर्जी पाईं गईं। इसी के साथ जांच के अगले दौर में 2734 शिक्षकों की नौकरी छिन गई।
हालांकि इस पूरे मसले पर तत्कालीन अधिकारियों पर भी नकेल कसे जाने की तैयारी है, जिनकी मदद से घपला सम्भव हो पाया। हालांकि यह बेहद लापरवाही से जुड़ा मामला है कि इतने सालों तक सरकार सोती रही और शिक्षक के नाम पर फर्जी डिग्रीधारी शिक्षा व्यवस्था की नींव कमज़ोर करते रहे।












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