IMD monsoon forecast: मौसम विभाग ने दी खुशखबरी, 'झमाझम होगी बारिश, सामान्य रहेगा मानसून'
मौसम के मोर्चे पर अच्छी खबर है। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया है कि IMD के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल देश के अधिकांश हिस्सों में भरपूर बारिश होने के आसार है। दूसरे शब्दों में मॉनसून समान्य रहेगा।

IMD monsoon forecast: प्रचंड गर्मी के बीच इस साल का मॉनसून कैसा रहेगा? य़े सवाल सबके जेहन में कौंध रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूर्वानुमान में कहा है कि इस साल मॉनसून में पर्याप्त बारिश होने की संभावना है।

मॉनसून सामान्य रहने के आसार
IMD महानिदेश मृत्युंजय मोहापात्रा ने कहा कि इस साल का मॉनसून सामान्य रहने के आसार हैं, इसका मतलब है कि देश के अधिकांश हिस्से में झमाझम बारिश होगी और लोगों को गर्मियों से निजात भी मिलेगी।
मानसून पर अल नीनो का प्रभाव
मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है और इसका प्रभाव मौसम के दूसरे भाग के दौरान देखा जा सकता है।
औसत के आधार पर कितनी बारिश
दक्षिण पश्चिम मानसून 2023 के पूर्वानुमान पर मौसम विज्ञान महानिदेशक, डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा, देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून में मौसमी (जून से सितंबर) वर्षा 96% होने की संभावना है।
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IMD के अनुसार 96 फीसद बारिश का अनुमान लंबी अवधि के औसत (एलपीए) के आधार पर है। इसमें 5% कमी भी हो सकती है। संभावना है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश कम भी हो सकती है।
प्राइवेट एजेंसी का चौंकाने वाला अनुमान
यह भी रोचक है कि IMD से पहले निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने सोमवार को पूर्वानुमान जाहिर किया। स्काईमेट के अनुसार, आगामी मानसून में जून से सितंबर के दौरान 868.6 मिमी बारिश होने का अनुमान है। दीर्घावधि औसत (LPA) में इतनी बारिश 'सामान्य से नीचे' मानी जाती है।

बारिश का LPA क्या होता है
इसी साल 4 जनवरी को स्काईमेट ने मानसून को sub-par रहने का पूर्वानुमान लगाया था। चार महीने बाद भी ये बरकरार है। वर्षा का LPA विशेष क्षेत्र में निश्चित अंतराल (जैसे महीने या मौसम) में 30 वर्ष, 50 वर्ष, जैसी लंबी अवधि में होने वाली बारिश का औसत है।
किस कारण से कम बारिश की आशंका
स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान पिछले चार लगातार मौसमों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इसका कारण ट्रिपल-डिप-ला नीना है, लेकिन अब, ला नीना समाप्त हो गया है।
कमजोर मानसून का संकेत
उन्होंने कहा, अल नीनो की संभावना बढ़ रही है और मानसून के दौरान इसकी प्रमुख भूमिका रहने की संभावना है। अल नीनो की वापसी कमजोर मानसून का संकेत दे सकती है। अल नीनो के अलावा, अन्य कारक भी हैं, जो मानसून को प्रभावित करते हैं।
पश्चिमी हिंद महासागर का भी असर
स्काईमेट के अनुसार, हिंद महासागर डिपोल (IOD) में मानसून को चलाने और अल नीनो के दुष्प्रभावों को रोकने की क्षमता है। IOD को भारतीय नीनो के रूप में भी जाना जाता है। ये समुद्र की सतह के तापमान से जुड़ा है। इसमें पश्चिमी हिंद महासागर का तापमान प्रभावित होता है।
वर्षा की कमी की आशंका
स्काईमेट के अनुसार, समुद्र के पूर्वी भाग की तुलना में पश्चिमी हिंद महासागर वैकल्पिक रूप से गर्म (सकारात्मक चरण) और फिर ठंडा (नकारात्मक चरण) हो जाता है। उत्तरी और मध्य भागों में वर्षा की कमी होने का जोखिम है।
इन राज्यों में कम बारिश की आशंका
स्काईमेट का अनुमान है कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जुलाई और अगस्त के मुख्य मानसून महीनों के दौरान अपर्याप्त बारिश होगी। उत्तर भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सीजन के दूसरे भाग में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।












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