Analysis: राजस्थान की 3 सीटों पर उपचुनाव में 'पद्मावत' की 'सियासी लीला', जानें FACTS
नई दिल्ली। बॉलीवुड से सियासी गलियों में होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' आखिर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। रणवीर सिंह का खिलजी अवतार और पद्मावती बनी दीपिका पादुकोण का अभिनय लोगों को खूब भा रही है। फिल्मी पंडितों की उम्मीद के मुताबिक 'पद्मावत' ने दो दिनों में 50 करोड़ का कारोबार कर इतिहास रच डाला। सिल्वर स्क्रीन पर 'पद्मावत' का प्रदर्शन बेहद शानदार जा रहा है, लेकिन अब तक की सबसे विवादित फिल्म रही 'पद्मावत' को सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता है। इस फिल्म को लेकर कितनी सियासत हुई या हो रही है, यह किसी से छिपा नहीं है, ऐसे में 'पद्मावत' के सियासी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर सबकी नजर है। 'पद्मावत' की इस 'सियासी लीला' का नजारा हमें देखने को मिलेगा राजस्थान की दो लोकसभा सीटों- अजमेर, अलवर और भीलवाड़ा की एक विधानसभा सीट मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर 29 जनवरी को होने वाले उपचुनाव में। पद्मावत को लेकर राजपूत संगठन और करणी सेना पहले ही बीजेपी से अपनी नाराजगी का इजहार कर चुके हैं। ऐसे में देखन रोचक होगा कि चुनावी राजनीति में 'पद्मावत' का सियासी कलेक्शन किसके पक्ष में जाता है। ये उपचुनाव इसलिए भी बेहद हैं, क्योंकि राजस्थान में साल के अंत तक विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

3 सीटों पर उपचुनाव, सबसे ज्यादा चर्चा में अजमेर
बीजेपी नेता सांवरलाल जाट के निधन के बाद पिछले साल अगस्त में खाली हुई अजमेर सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा और बीजेपी के रामस्वरूप लांबा के बीच मुकाबला है। लांबा, सांवरलाल जाट के बेटे हैं और बीजेपी को उम्मीद है कि उन्हें पिता के निधन के बाद जनता की भरपूर सहानुभूति मिलेगी। इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। बीते 8 लोकसभा चुनावों में यहां पर 6 बार बीजेपी ने ही जीत दर्ज की है।

उपचुनाव ने खोली कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान की पोल
अजमेर सीट पर उपचुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस में जब इस बात पर मंथन चल रहा था कि यहां से किसे टिकट दिया जाए, तब सबसे पहले सचिन पायलट के नाम की चर्चा हुई, जो इस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। राजस्थान में होने वाले अगले विधानसभा चुनावों में वह मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी की रेस में अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट का भी नाम है। ऐसे में पायलट खेमा नहीं चाहता था कि वह इस समय कोई चुनाव लड़े, क्योंकि अगर वह हार गए तो विधानसभा चुनाव में सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाने की उनकी संभावना कम हो जाती। ऐसे में उनके लिए सबसे सेफ गेम था कि अपने किसी भरोसेमंद को चुनाव लड़ाया जाए। उन्होंने रघु शर्मा को टिकट दिलाकर ऐसा ही किया। इसी बीच अशोक गहलोत और पायलट के बीच खुलेआम बयानबाजी की भी खूब चर्चा है।

अजमेर में करीब 2 लाख राजपूत वोटर हैं
अजमेर लोकसभा सीट में करीब 18 लाख वोटर हैं। साल 2014 में जब इस सीट पर चुनाव हुआ था तब 11 लाख 56 हजार 314 वोट पड़े थे। सांवर लाल जाट के सामने उस वक्त कांग्रेस के सचिन पायलट ने चुनाव लड़ा था और उन्हें 1 लाख 72 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट राजपूत और रावण राजपूत वोटरों की संख्या एक लाख 80 हजार है। ऐसे में देखना रोचक होगा कि क्या पद्मावत को लेकर मचे बवाल का असर चुनावी राजनीति पर कितना दिखता है।

अलवर में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत
अजमेर लोकसभा सीट जहां बीजेपी के दबदबे वाली रही है तो हीं, अलवर में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत रहा है। अलवर जिले में 16 लाख से अधिक मतदाता हैं। इस लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इस लोकसभा सीट पर यादवों का दबदबा रहा है। यादवों के अलावा अलवर में मेव समाज के 2 लाख 60 हजार, एससी के करीब 3 लाख 30 हजार, जाट एक लाख 20 हजार, मीणा 1 लाख 15 हजार, ब्राह्मण 1 लाख, वैश्य 1 लाख, 85 हजार पुरुषार्थी, गुर्जर 70 हजार, राजपूत 45 हजार और 65 हजार माली वोटर हैं।

मांडलगढ़ विधानसभा में क्या कहते हैं जातिगत समीकरण
इस सीट पर करीब ढाई लाख मतदाता हैं। इनमें ब्राह्म्ण सबसे ज्यादा हैं, जबकि मुस्लिम वोटर भी करीब 20 हजार हैं। इसके अलावा गुर्जर करीब 13 हजार, SC के 27 हजार, राजपूत करीब 10 हजार, मीणा 8 हजार और वैश्य समाज के 8 हजार वोटर हैं।












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