IFS Day: पीएम मोदी ने दी राजनयिकों को बधाई, जानिए क्यों मनाया जाता है भारतीय विदेश सेवा दिवस
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के उन तमाम राजनयिकों को बधाई दी है जो विदेशों में तैनात हैं और देश सेवा में लगे हुए हैं। पीएम मोदी ने ट्वीट कर इन सभी राजनयिकों की सराहना की है। उन्होंने वंदे भारत मिशन का जिक्र करते हुए भारतीय राजनयिकों की तारीफ की है। पीएम मोदी ने यह बधाई 9 अक्टूबर को होने वाले इंडियन फॉरेन सर्विस डे (आईएफएस डे) यानी भारतीय विदेश सेवा दिवस के मौके पर दी है। विदेशों में बसे भारतीय राजनियक कहीं न कहीं उन हीरोज की तरह हैं जो भारतीय विदेश सेवा के कई अहम लक्ष्यों को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। साथ ही भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भी हर पल तत्पर रहते हैं।

9 अक्टूबर को हुई विदेश सेवा की शुरुआत
पीएम मोदी ने आईएफएस डे की बधाई देते हुए लिखा है, 'आईएफएस डे के मौके पर मैं सभी भारतीय विदेश सेवा ऑफिसर्स को बधाई देता हूं। देश सेवा में उनका कार्य और दुनियाभर में राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने के लिए उनकी सेवाएं सराहनीय हैं। वंदे भारत मिशन के दौरान उनके प्रयास और कोविड के समय हमारे और दूसरे देशों के नागरिकों की मदद के प्रयास स्मरणीय हैं।' भारतीय विदेश सेवा की शुरुआत 9 अक्टूबर 1946 को हुई थी। लेकिन साल 2011 से यह खास दिन को अस्तित्व में आया और यहां से विदेश सेवा में लगे राजनयिकों के प्रयासों को पहचान मिलनी शुरू हुई। इस तरह का दिन रूस में भी होता है और हर साल 10 फरवरी को इसे मनाया जाता है। आईएफएस डे वह एक खास दिन होता है जब राजनयिकों के रोल को उनके देशवासियों को बताया जाता है।

क्या होती है विदेश सेवा अफसर की जिम्मेदारी
आईएफएस, भारतीय सिविल परीक्षा का हिस्सा है। आईएफएस के तहत चुने जाने वाले लोगों को विदेशी भाषाओं की जानकारी होना जरूरी होता है। भारतीय विदेश सेवा के तहत इस समय 162 भारतीय राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भारतीय राजनयिक जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दिल्ली में विदेश मंत्रालय के ऑफिस और प्रधानमंत्री के कार्यालय पर भी इनकी तैनाती की जाती है। इन राजनयिकों के पास रीजनल पासपोर्ट ऑफिसेस की जिम्मेदारी भी होता है। आईएफएस, राष्ट्रपति के सचिवालय और कई और मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। आईएफएस का जिम्मा प्रशासनिक स्तर पर विदेश सचिव और राजनीतिक स्तर पर विदेश मंत्री के पास होता है।

जब IFS ऑफिसर बने देश के पहले NSA
वर्तमान में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी एक विदेश सेवा ऑफिसर रहे हैं। उनके पास विदेश मंत्रालय में बतौर विदेश सचिव सेवा करने का चार दशकों का अनुभव है। एस जयशंकर को साल 2019 में राष्ट्रपति की तरफ से पद्मश्री से नवाजा गया है। एस जयशंकर चीन और अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं। जनवरी 2015 में वह विदेश सचिव नियुक्त हुए थे। इसके अलावा देश के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ब्रजेश मिश्रा भी विदेश सेवा से जुड़े थे। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में देश के एनएसए नियुक्त हुए थे।

एक IFS की किताब पर थी एक ऑस्कर विनिंग फिल्म
इस समय विदेश मंत्रालय में पश्चिमी देशों के विभाग का जिम्मा बतौर सचिव संभाल रहे विकास स्वरूप एक लेखक भी हैं। उनकी किताब Q&A पर ही आज से करीब 11 साल पहले हॉलीवुड की फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने साल 2009 के ऑस्कर समारोह में कई झंडे गाड़े थे। इनके अलावा शिव शंकर मेनन, सैयद अकबरुद्दीन, रंजन मथाई, निरुपमा राव, सुजाता सिंह, पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे अजय बिसारिया, भारत के पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले, वर्तमान विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रींगला, हाल ही में इंडोनेशिया की राजदूत नियुक्त हुई देवयानी खोबरागड़े देश के कुछ ऐसे नाम हैं जो इस सेवा से जुड़े और किसी न किसी से सुर्खियों में रहे।












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