• search

भाजपा राम मंदिर बनाए बिना चुनाव में गई तो...

By Bbc Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हैरान करने वाली शिकस्त के बाद एक दिल्ली के सियासी गलियारे में एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या भाजपा अगले साल होने वाले आम चुनाव में राम मंदिर के मुद्दे को एक बार फिर से चुनावी मुद्दा बनाएगी?

    पार्टी के मुंहफट कहे जाने वाले नेता सुब्रमण्यम स्वामी इसका जवाब यूँ देते हैं, "ये अगर राम मंदिर बनाये बिना (चुनाव में) जाएंगे तो निश्चित मार पड़ेगी."

    राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो फ़ैसला सुनाया था उससे असंतुष्ट पक्षों ने 2010 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की एक खंडपीठ ने दो-एक के बहुमत से फ़ैसला दिया था कि भूमि तीन पार्टियों के बीच समान रूप से विभाजित हो जाएगी- सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला.

    मोदी मेरा दोस्त, आलोचना नहीं करता: सुब्रमण्यम स्वामी

    GROUND REPORT: क्या 'फ़्लॉप’ रहा राम रथयात्रा की रवानगी का कार्यक्रम?

    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद
    Getty Images
    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद

    भावना से जुड़ी है मांग

    राम मंदिर के निर्माण को हक़ीक़त में बदलने के उद्देश्य से स्वामी ने कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में इस सिलसिले में चल रहे मुक़दमे में एक पार्टी बनने के लिए याचिका दायर की थी.

    सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सभी हस्तक्षेप आवेदनों को ख़ारिज कर दिया, जिसमें फ़िल्म निर्माताओं अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल और मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के आवेदन शामिल थे.

    केवल सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के बारे में अदालत ने कहा कि अब इसे एक अलग याचिका के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा. अदालत के अनुसार इसे बाद में अदालत में दायर किया जा सकता है.

    बीबीसी हिंदी से स्वामी ने कहा कि उनकी मांग भावना से जुड़ी है. उनके अनुसार अदालत में चल रहा मुक़दमा प्रॉपर्टी की मिल्कियत से जुड़ा है, लेकिन उनकी याचिका आस्था से जुड़ी है. उन्हें राम जन्म स्थान में प्रार्थना करने के लिए मौलिक अधिकार मिलना चाहिए.

    राम मंदिर केस: सिब्बल की दलील पर अमित शाह का पलटवार

    राम मंदिर निर्माण मैनिफेस्टो का हिस्सा

    उनकी याचिका पर सुनवाई कब से शुरू होगी ये अभी निश्चित नहीं है, लेकिन उन्हें यक़ीन है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जारी मुक़दमे से पहले उनके केस में फ़ैसला आएगा.

    राम मंदिर का निर्माण हमेशा से बीजेपी के चुनावी मैनिफेस्टो का हिस्सा रहा है, लेकिन पार्टी पर हमेशा से इलज़ाम ये रहा है कि उसने इस पर गंभीरता से अमल नहीं किया.

    पार्टी के ख़िलाफ़ ये भी आरोप है कि इसने इस मुद्दे को केवल चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल किया है. इस मुद्दे को ज़िंदा रखना उसके फ़ायदे में है.

    जहाँ सुब्रमण्यम स्वामी राम मंदिर को आस्था का मामला मानते हैं, वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ कहती हैं कि 'हिंदुत्व परिवार' ने इसे एक सियासी मामले में बदल दिया है.

    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद
    BBC
    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद

    सत्तारूढ़ पार्टी के लोग डरे क्यों हैं?

    और अब जबकि यूपी के उपचुनाव में, खास तौर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में, पार्टी की हार हुई है तो क्या अब राम मंदिर के सहारे अगले साल का आम चुनाव लड़ना पार्टी की मजबूरी होगी?

    सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार पार्टी या सरकार ने इस सिलसिले में अब तक कुछ नहीं किया और वो डर रहे हैं कि राम मंदिर पर उनके हक़ में फ़ैसला आया तो इसका श्रेय उन्हें नहीं मिलेगा. वो कहते हैं, "सत्तारूढ़ पार्टी के कई लोग डरे हुए हैं कि सारा क्रेडिट मेरे पास जाएगा."

    बुधवार के अदालत के फ़ैसले के बाद उन्होंने बीबीसी को बताया कि अदालत में उनकी दलील क्या थी.

    वो कहते हैं, "मैंने अदालत में खड़े होकर कहा कि आप या तो मेरी बात सुनें यहाँ या फिर मेरी याचिका को रिट पिटीशन बनाकर किसी अदालत को सौंप दीजिए जहाँ उस पर मैं जिरह कर सकता हूँ तो उन्होंने यही किया."

    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद
    BBC
    राम मंदिर-बाबरी मस्जिद

    सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के ज़फ़रयाब जिलानी स्वीकार तो करते हैं कि इस मुक़दमे में गति उस समय आई जब स्वामी ने हस्तक्षेप किया लेकिन उनके अनुसार इससे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुक़दमे पर कोई असर नहीं होगा.

    जिलानी कहते हैं, "ये सही है कि इसमें (मुक़दमे को गति देने में) सुब्रमण्यम स्वामी की भूमिका है. उस वक़्त मोदी जी को ये लग रहा था कि छह महीने में फ़ैसला आ जाएगा. लेकिन जब अदालत में बहस शुरू हुई तो सब को अंदाज़ा हुआ कि बहस की क्या सूरत है. अब मामला अदालत में चल रहा है."

    जिलानी के विचार में राम जन्म भूमि मुक़दमे का फ़ैसला आम चुनाव के बाद ही आएगा.

    सुप्रीम कोर्ट में ये मामला साढ़े सात साल पहले आया था. अगर मुक़दमे की सुनवाई तेज़ी से भी हुई तो आम चुनाव से पहले फ़ैसला नहीं आएगा. और अगर फ़ैसला आया भी और ये राम जन्म भूमि के हक़ में गया तो इसका श्रेय सुब्रमण्यम स्वामी के अनुसार उन्हें जाना चाहिए.

    विशेषज्ञ कहते हैं कि जब तक केंद्र और यूपी सरकारों की ओर से मंदिर निर्माण की तरफ़ ठोस क़दम उठते नहीं दिखेगा तब तक उनके समर्थक उनका यक़ीन नहीं करेंगे.

    ठोस क़दम उठाने के लिए अब समय बहुत कम है. इसलिए भाजपा को विचार करना होगा कि इस मुद्दे को उठाने से उसे आम चुनाव में फ़ायदा कितना होगा.

    (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    If the BJP went to the polls without creating Ram temple

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X