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CAA लागू होने पर क्या होगा, इसमें किस वजह से हुई देरी, क्यों होता है विरोध? ऐसे 10 सवालों का जवाब जानिए

CAA act implementation date: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को जल्द लागू किए जाने का संकेत दिया था। अब एक और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने एक तरह से इसे लागू करने की तारीख घोषित कर दी है।

बंगाल के बनगांव लोकसभा सीट से भाजपा सांसद ठाकुर ने रविवार को दक्षिण 24 परगना में एक जनसभा कहा कि, 'अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन हो चुका है और अगले सात दिनों के अंदर पूरे देश में सीएए लागू कर दिया जाएगा।'

caa implementation in india

आगे बढ़ने से पहले यह बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून पर 2019 के दिसंबर में ही संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गई थी। इसे 10 जनवरी, 2020 को राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल गई थी। लेकिन, इसके नियम अधिसूचित करने बाकी रह गए थे।

सीएए क्या है?
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) देश के तीन पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आने वाले लोगों (उन देशों के गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों) को भारतीय नागरिकता देने का कानून है।

सीएए से किन्हें मिलेगी भारतीय नागरिकता?
यह प्रावधान इन तीनों मुल्कों के 6 धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के लिए है, जो धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आने पर मजबूर हुए हैं। इन समुदायों में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी शामिल हैं।

इसके लिए अभी कटऑफ तारीख 31 दिसंबर, 2014 रखी गई है, जिसे बढ़ाए जाने की भी चर्चा है। यानी इस तारीख से पहले भारत आने वालों को ही नागरिकता दी जानी है।

सीएए लागू करने में देरी क्यों हुई?
नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने के बाद देशव्यापी हिंसक विरोध देखने को मिले थे। कई राजनीतिक दलों ने भी आक्रामक विरोध दरज कराया था।

इसकी वजह से राजधानी दिल्ली में 2020 की शुरुआत में सांप्रदायिक दंगे तक भड़क गए थे। सीएए विरोधी आंदोलन में देशभर में 100 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं।

बाद में केंद्र सरकार ने कोविड महामारी की वजह से इसे लागू करने में देरी को कारण बताया था; और यह अभी तक लंबित ही पड़ा हुआ है।

4 साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद सीएए लागू हो पाएगा?
संसदीय प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद कानून से संबंधित नियम 6 महीने के भीतर तैयार करने होते हैं। किसी वजह से यह मुमकिन नहीं होने पर संसद के दोनों सदनों की विधायी समितियों से विस्तार लेना होता है। यह प्रक्रिया लगातार पूरी की जाती रही है और एक्सटेंशन लिया जा रहा है।

कौन से राज्य हैं, जिनके जिलाधिकारियों को मिले अधिकार?
देश के 9 राज्यों के 30 से अधिक जिलाधिकारियों को पिछले वर्षों में उन तीनों पड़ोसी देशों से जान बचाकर भागे वहां के 6 अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के अधिकार दिए गए हैं।

गृह मंत्रालय की साल 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल, 2021 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच इन तीनों राज्यों के 1,414 गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता अधिनियम,1955 के तहत भारतीय नागरिकता मिल चुकी थी।

महाराष्ट्र, दिल्ली,राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश उन 9 राज्यों में शामिल हैं।

किन राज्यों के अधिकारियों को अबतक नहीं मिले अधिकार?
असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के जिलाधिकारियों को अभी तक इस तरह के लोगों को भारतीय नागरिकता जारी करने के अधिकार नहीं दिए गए हैं। इसकी वजह ये है कि इन राज्यों में यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर बहुत ही ज्यादा संवेदनशील रहा है।

भारतीय नागरिकता के आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी?
भारतीय नागरिकता मांगने वालों को ऑनलाइन आवेदन देना होगा, जिसके लिए पोर्टल भी तैयार किया गया गया। उनसे कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा, लेकिन उन्हें भारत में दाखिल होने का साल बताना पड़ेगा। गृह मंत्रालय आवेदन की जांच करेगा और फिर योग्य आवेदकों को भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी।

सीएए का विरोध क्यों होता है?
विपक्षी दलों और देश के एक वर्ग का आरोप है कि यह कानून मूलरूप से मुसलमानों को टारगेट करने के लिए बनाया गया है। उनका यह भी दावा है कि यह संविधान के मौलिक अधिकारों के तहत अनुच्छेद-14 के 'समानता के अधिकार' का उल्लंघन है।

डेमोग्राफी में बदलाव की आशंकाओं के चलते असम, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में इसका विरोध होता है। इस कानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जा चुकी है। आलोचक इसमें म्यांमार से भागे रोहिंग्या मुसलमानों को नहीं शामिल होने को भी मुद्दा बना चुके हैं।

पूर्वोत्तर के राज्यों में इस आशंका की वजह से भी इसका विरोध हो रहा है कि अगर बांग्लादेश से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी गई तो उनके संसाधनों का बंटवारा हो जाएगा।

पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों के लोगों की यह भी शिकायत है कि इस तरह के प्रावधान लागू होने से उनकी संस्कृति, खान-पान और पहनावे भी प्रभावित हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकता पाने के सामान्य नियम क्या हैं?
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए कम से कम 11 वर्षों तक भारत में रहना अनिवार्य है। लेकिन, इसके लिए देश, धर्म या जाति का कोई मानदंड निर्धारित नहीं है।

इस तरह से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का प्रावधान काफी व्यापक है। लेकिन, इसके लिए आवश्यक है कि वह पूरे वैधानिक दस्तावेजों के साथ भारत की जमीन पर कदम रखे हों।

लेकिन, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से तीन पड़ोसी देशों के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को इतने लंबे वक्त तक इंतजार नहीं करना पड़ता है और न ही उनके पास किसी तरह के दस्तावेज की आवश्यकता है।

अभी सीएए लागू करने की वजह क्या हो सकती है?
सीएए लागू करना केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी सरकार का बड़ा एजेंडा रहा है। पश्चिम बंगाल में मतुआ समाज की यह बहुत बड़ी मांग रही है। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर भी इसी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जबकि, बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी इस कानून की मुखर विरोधी रही है। लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू किए जाने से बीजेपी को एक बड़े वोट बैंक से किए गए अपने वादे को निभाने का दावा करने का मौका मिल सकता है।

पिछले साल 27 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि सीएए देश का कानून है और इसे लागू करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इसको लेकर लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया था।

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