मोलनुपिराविर दवा के इस्तेमाल के खिलाफ ICMR, कोविड टास्क फोर्स ने कहा- इससे फायदा नहीं हुआ
नई दिल्ली, जनवरी 11। देश में कोरोना का खतरा एकबार फिर बढ़ने के साथ ही एंटीवायरल दवा मोलनुपिराविर की मांग तेजी से बढ़ गई है। हालांकि इसके इस्तेमाल को लेकर अभी भी कन्फ्यूजन की स्थिति बरकरार है, क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट इस दवा के इस्तेमाल को लेकर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। इस बीच ICMR की नेशनल कोविड टास्क फोर्स ने इस दवा के क्लिनिकल मैनेजममेंट प्रोटोकॉल में शामिल करने के खिलाफ जाने का फैसला किया है। ICMR के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी है।

इस दवा से नहीं हुआ ज्यादा फायदा-ICMR
आपको बता दें कि ICMR के एक्सपर्ट अभी मोलनुपिराविर को कोविड 19 के क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में शामिल किए जाने के खिलाफ हैं। जानकारी के मुताबिक, ICMR की कोविड टास्क फोर्स के हेल्थ एक्सपर्ट ने इस दवा के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा के कारणों पर चिंता जाहिर की है। सोमवार को हुई मीटिंग में टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने कहा कि मोलनुपिराविर का कोविड संक्रमित मरीजों पर इस्तेमाल करने से ज्यादा फायदा नहीं हुआ है।
ड्रंग कंट्रोलर से दवा को मिल चुकी है मंजूरी
वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि मोलनुपिराविर एक एंटीवायरल दवा है, जो वायरल म्यूटेनेसिस द्वारा कोविड 19 के रेप्लिकेशन को रोकती है। बता दें कि इस एंटी-कोविड गोली को ड्रग रेगुलेटर जनरल ऑफ इंडिया से भी मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में इस दवा के इस्तेमाल को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट की अलग-अलग राय मोलनुपिराविर के इस्तेमाल को लेकर संशय पैदा करती है।
आपको बता दें कि हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डायरेक्टर डॉ बलराम भार्गव ने भी मोलनुपिरावीर के इस्तेमाल पर चिंता जताई थी। उन्होंने ये माना था कि इस दवा के इस्तेमाल से युवाओं पर अधिक असर पड़ता है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना संक्रमित मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की दर में 30-50 फीसदी की कमी आ रही है।












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