Dheenah Dastageer: 17 साल विदेश में रहीं, भारत लौटकर बनीं IAS, लेकिन IFS से क्यों किया इनकार?
IAS Dheenah Dastageer: किसी ने ठीक ही कहा है। देशप्रेम सरहदों में नहीं, दिलों में होता है। इसकी मिसाल पेश की है IAS धीनाह दस्तगीर ने, जिन्होंने 17 साल तक विदेश (सऊदी अरब) में रहने के बावजूद Indian Foreign Service (IFS) को ठुकरा दिया, सिर्फ इसलिए क्योंकि वह देश के भीतर रहकर अपनी मिट्टी की सेवा करना चाहती थीं।
31 जुलाई 2025 को धीनाह दस्तगीर ने ओडिशा में राउरकेला नगर निगम (Rourkela Municipal Corporation) की नई कमिश्नर के तौर पर पदभार संभाला है। उनका यह पदभार सिर्फ एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है जो उन्होंने सालों पहले लिया था। भारत लौटकर देशवासियों के लिए काम करने का।

विदेश में बीता बचपन, भारत में पनपा सपना
धीनाह दस्तगीर का जन्म केरल के त्रिवेंद्रम में हुआ, लेकिन उनका अधिकांश बचपन सऊदी अरब में बीता, जहां उनके माता-पिता काम करते थे। वहीं की भारतीय प्रवासी स्कूलों में पढ़ाई करते हुए धीनाह ने "मिनी इंडिया" जैसा अनुभव किया। विभिन्न भाषाएं, संस्कृति और परंपराएं। पूर्व में IndianMasterMinds.Com को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि "विदेश में रहकर NRIs को अपने देश की अहमियत और ज्यादा समझ आती है। वहीं से देशभक्ति की भावना गहराई तक बैठ गई थी।"
IFS नहीं, IAS बनीं, देश के लिए काम करने का जुनून
UPSC 2020 में ऑल इंडिया रैंक 63 लाने वाली धीनाह ने एक साहसिक फैसला लिया। IFS नहीं चुनेंगी, क्योंकि वह देश के बाहर नहीं, देश के भीतर रहकर अपनी सेवाएं देना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि "मैंने IFS को नहीं चुना क्योंकि मुझे देश के लोगों के लिए ज़मीन पर काम करना था। विदेश जाकर प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है, लेकिन मेरा मन भारत में रहकर सेवा करने का था।"

तीसरे प्रयास में मिली सफलता
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में यह उनकी तीसरी कोशिश थी। पहली दो बार वह मेंस और इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आ पाया। धीनाह ने UPSC की तैयारी के दौरान सोशल मीडिया को त्यागने की बजाय उसका सकारात्मक इस्तेमाल किया।
उनका कहना है कि "मैंने कभी ट्विटर छोड़ा नहीं। मैंने उसे न्यूज और एनालिसिस के लिए यूज किया, यहां तक कि एग्जाम के दिन भी हॉल में जाने से पहले ट्विटर देखा था।"
तैयारी का मंत्र: सीमित स्रोत, अधिकतम रिविजन
धीनाह बताती हैं कि UPSC की तैयारी में नियमितता, शॉर्ट नोट्स और रिविजन सबसे अहम हैं। "मैंने हर दिन और हफ्ते के लिए लक्ष्य तय किए और उस पर ईमानदारी से काम किया। पिछले प्रयास में मैं कम रिवाइज कर पाई थी, जिससे दिक्कत आई। इस बार मैंने वही कमी पूरी की।"

जमीन से जुड़ाव ने दिलाया IAS बनने का जुनून
धीनाह के अनुसार, उनका सिविल सेवा का सपना बचपन से ही था। उनके पिता एक अकादमिक हैं और घर का माहौल हमेशा न्यूज और समसामयिक घटनाओं से भरा रहता था। इसके साथ ही, वह बचपन से प्रकृति प्रेमी रही हैं और इसी वजह से UPSC में Geography को अपना वैकल्पिक विषय चुना।
राउरकेला में नई शुरुआत, लोगों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध
अब जब वह राउरकेला की कमिश्नर बनी हैं, तो उनके कंधों पर एक पूरे शहर की जिम्मेदारी है। लेकिन धीनाह अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट हैं। "लोगों की सेवा, पारदर्शी प्रशासन और जमीनी बदलाव।"












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