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IAS Amit Khare: कभी PM मोदी के सलाहकार, लालू को भेजा जेल, अब बने उपराष्ट्रपति के सचिव, कौन हैं IAS पत्नी?

Who Is IAS Amit Khare: देश के सबसे ईमानदार और तेज-तर्रार IAS अधिकारियों में शुमार अमित खरे ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उन्हें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति अनुबंध आधारित है और तीन साल तक चलेगी।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आदेश के मुताबिक, खरे को सचिव स्तर का वेतन और सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन सवाल ये है - कौन हैं अमित खरे? चारा घोटाले से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तक, उनका करियर क्यों है इतना खास? और कितनी होगी उनकी सैलरी? आइए, डिजिटल इस डिकोड करते हैं...

Who Is IAS Amit Khare

IAS Amit Khare: बिहार के चारा घोटाले को उजागर करने वाला 'हीरो'

अमित खरे (जन्म: 14 सितंबर 1961) 1985 बैच के झारखंड कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। चितरगुप्तवंशी कायस्थ परिवार में जन्मे खरे ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी और IIM अहमदाबाद से MBA किया। उनकी ईमानदारी और तेज दिमाग ने 1995-97 में चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) के डिप्टी कमिश्नर के तौर पर उन्हें लाइमलाइट में लाया। तब उन्होंने बिहार के कुख्यात चारा घोटाले (940 करोड़ रुपये) का पर्दाफाश किया, जिसमें लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और जगन्नाथ मिश्रा जैसे बड़े नेता जेल गए। खरे ने छापों में फर्जी बिल्स और दस्तावेज उजागर किए, जो घोटाले की पहली कड़ी बने। इस साहस ने उन्हें 'सिस्टम का सिपाही' बना दिया, हालांकि, इसके बाद उन्हें एक साल तक बिहार चमड़ा निगम (Bihar Leather Corporation) जैसी निष्क्रिय पोस्टिंग झेलनी पड़ी।

PM मोदी के सलाहकार: शिक्षा और IT नियमों का मास्टरमाइंड

खरे 12 अक्टूबर 2021 से PM नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)के सलाहकार रहे, जहां उन्होंने सामाजिक क्षेत्र (एजुकेशन, हेल्थ) की जिम्मेदारी संभाली। उनका सबसे बड़ा योगदान? राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को तैयार करना और लागू करना, जिसने भारत की शिक्षा व्यवस्था को नया शेप दिया। इसके अलावा, सूचना एवं प्रसारण सचिव (2018-19) के तौर पर उन्होंने IT नियम 2021 (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) को आकार देने में अहम रोल निभाया।

खरे की खासियत? वो अपने सीनियर्स का मूड पढ़ लेते थे और 'वांछित रिजल्ट' डिलीवर करते थे। स्मृति ईरानी से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक, हर मंत्री ने उनकी तारीफ की। 2021 में रिटायरमेंट के बाद PMO में उनकी एंट्री और 2023 में एक्सटेंशन इस बात का सबूत है कि मोदी उनकी काबिलियत पर भरोसा करते हैं।

Jharkhand Champion Reforms: झारखंड में सुधारों का चैंपियन

झारखंड में खरे ने विकास आयुक्त, अपर मुख्य सचिव (वित्त-सह-योजना), और रांची यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर जैसे पदों पर काम किया। उन्होंने बजट सुधार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), फाइनेंशियल इन्क्लूजन, और योजनाओं के रियल-टाइम इम्प्लीमेंटेशन में इनोवेशन किए। उज्ज्वला योजना के लिए फंडिंग में उनकी तत्परता को तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खूब सराहा।

नई भूमिका: उपराष्ट्रपति के सचिव

14 सितंबर 2025 को खरे को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) का सचिव बनाया गया। ये पोस्ट सचिव रैंक की है, और तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट है। खरे का अनुभव - शिक्षा, फाइनेंस, और पब्लिक पॉलिसी - उपराष्ट्रपति कार्यालय को मजबूत करेगा। साथ ही, केरल कैडर के IAS चंद्रशेखर एस. को उपराष्ट्रपति का निजी सचिव बनाया गया।

IAS Amit Khare Salary: कितनी मिलेगी सैलरी और सुविधाएं?

सचिव स्तर के अधिकारियों को भारत सरकार में लगभग 2.5 लाख रुपये मासिक वेतन (लेवल 17, 7वां वेतन आयोग) मिलता है। इसके अलावा, सरकारी आवास, आधिकारिक गाड़ी, मेडिकल सुविधाएं, टेलीफोन भत्ता, और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। रिटायर्ड IAS के तौर पर खरे का कॉन्ट्रैक्ट भी इसी रैंक और पे-स्केल पर होगा, जैसा कि DoPT के आदेश में बताया गया। यानी, उनकी सैलरी और पर्क्स टॉप लेवल के होंगे - ठीक एक सीनियर ब्यूरोक्रेट की तरह!

Who Is IAS Amit Khare

IAS Amit Khare Wife: पत्नी भी IAS

खरे की पत्नी निधि खरे (IAS Nidhi Khare) उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं, और 1992 बैच की IAS हैं। दंपति के दो बच्चे हैं। खरे के बड़े भाई अतुल खरे आईएफएस (IFS Atul Khare) अधिकारी हैं। खरे का कायस्थ बैकग्राउंड और उनकी सादगी उन्हें अलग बनाती है। सहयोगी कहते हैं, 'वो कम बोलते हैं, लेकिन PM की जरूरत समझते हैं।'

IAS Amit Khare Wife IAS Nidhi Khare

क्यों खास हैं खरे?

खरे की कहानी साहस, ईमानदारी, और इनोवेशन की है। चारा घोटाले में लालू जैसे ताकतवर नेता के खिलाफ खड़े होने से लेकर NEP 2020 और IT नियमों को शेप देने तक, उन्होंने हर रोल में छाप छोड़ी। आलोचक कहते हैं कि वो 'बॉस के आदमी' हैं, लेकिन खरे जवाब देते हैं, 'अगर मैं सिर्फ बॉस की सुनता, तो चारा घोटाला नहीं उजागर करता।' अब उपराष्ट्रपति के सचिव के तौर पर उनकी नई पारी शुरू हुई है। क्या वो इस रोल में भी नया बेंचमार्क सेट करेंगे? नजरें टिकी हैं!

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