Hyderabad Bullet Train: 350 किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन, जमीन के नीचे तैयार हो रहा एलिवेटेड ट्रैक
Hyderabad Bullet Train: हैदराबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा तकनीकी फैसला सामने आया है। 23 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए पूरी तरह एलिवेटेड (Elevated) ट्रैक बनाया जाएगा। यह फैसला न केवल तकनीकी रूप से बेहतर माना जा रहा है, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
एलिवेटेड ट्रैक का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा और गति से जुड़ा है। जमीन से ऊपर होने के कारण ट्रैक पर किसी भी तरह की बाहरी बाधा-जैसे मवेशी, इंसान या वाहन-आने की संभावना नहीं रहती। इससे बुलेट ट्रेन को 300-350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित तरीके से चलाया जा सकता है। इसके अलावा, पारंपरिक रेलवे नेटवर्क में मौजूद लेवल क्रॉसिंग (फाटक) की समस्या भी पूरी तरह खत्म हो जाती है।

Hyderabad Bullet Train: एलिवेटेड ट्रैक के लिए तैयारी जारी
- इस प्रोजेक्ट का दूसरा अहम पहलू है कम भूमि अधिग्रहण। एलिवेटेड ट्रैक पिलर्स (खंभों) पर टिका होता है, जिससे जमीन के बड़े हिस्से की जरूरत नहीं पड़ती।
- जमीन सिर्प वहीं ली जाती है जहां पिलर्स लगाए जाते हैं। इससे किसानों की जमीन पर असर कम पड़ता है और वे पिलर्स के नीचे खेती जारी रख सकते हैं।
- यही कारण है कि इस मॉडल से भूमि विवाद भी कम होते हैं और प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ता है।
Elevated Track के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल
तकनीकी रूप से इस कॉरिडोर में 'वायडक्ट' (Viaduct) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। 'फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथर्ड' के जरिए बड़े-बड़े कंक्रीट गर्डर्स को पहले से तैयार कर क्रेन की मदद से पिलर्स पर स्थापित किया जाता है। इससे निर्माण की गति पारंपरिक तरीकों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि, लागत के लिहाज से एलिवेटेड ट्रैक काफी महंगा होता है। यह पारंपरिक ट्रैक की तुलना में 10 से 15 गुना ज्यादा खर्चीला हो सकता है, लेकिन सुरक्षा, गति और दीर्घकालिक फायदे को देखते हुए इसे सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। हैदराबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में एलिवेटेड ट्रैक का फैसला भविष्य की आधुनिक और सुरक्षित रेल व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Hyderabad Bullet Train Project: शहरी कनेक्टिविटी के लिए बेहतर
शहरी कनेक्टिविटी के लिहाज से भी एलिवेटेड ट्रैक काफी अहम है। पुणे और हैदराबाद जैसे घनी आबादी वाले शहरों में जमीन पर ट्रैक बनाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में एलिवेटेड ट्रैक मौजूदा सड़कों या मेट्रो लाइनों के ऊपर से गुजर सकता है, जिससे शहर के भीतर स्टेशन बनाना आसान हो जाता है। इसके अलावा, एलिवेटेड ट्रैक बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक समस्याओं से भी सुरक्षित रहता है। जमीन पर बने ट्रैक अक्सर जलभराव से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि ऊंचाई पर बने ट्रैक पर इसका असर बेहद कम होता है।












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