'ममता दीदी मेरी सीट से लड़ लीजिए उपचुनाव', कौन है ये 2 सीट जीतने वाला विधायक? TMC में बगावत के बीच दिया ऑफर
West Bengal Bye Election: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जहां सत्ता समीकरण बदल चुके हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत और टूट ने माहौल और भी गर्म कर दिया है।
इसी बीच टीएमसी में विद्रोह झेल रही ममता बनर्जी को बंगाल में दो सीटों पर जीत दर्ज करने वाले एक विधायक ने अपनी एक सीट पर उपचुनाव लड़ने का प्रस्ताव देकर आग में घी का काम कर दिया है। आखिर यह विधायक कौन हैं जो टीएमसी सुप्रीमों ममता बनर्जी को ये ऑफर देकर एक बार सुर्खियां बटोर रहे हैं।

कौन है ये विधायक?
ममता बनर्जी को ऑफर देने वाला ये विधायक कोई और नहीं हुमायुं कबीर हैं। जिन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर बार-बार हमला किया और उसे सत्ता से बेदखल करने का आह्वान किया था और चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मज्जिद बनवाने का ऐलान कर सुर्खियां बटोरी थीं।
कबीर ने विधानसभा चुनाव 2026 से पहले ममता बनर्जी की टीएमसी छोड़कर अपनी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाईं थी। अकेले दम पर चुनाव लड़ा था और 2026 के चुनावों में मुर्शिदाबाद जिले की नवदा और रेजिनगर दोनों विधानसभा सीटें जीती थीं।

याद रहे ममता बनर्जी भवानीपुर सीट बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों के बड़े अंतर से हार गई थीं। चुनाव हारने के कारण बंगाल की पूर्व सीएम ममता वर्तमान समय में विधायक भी नहीं हैं, अगर वो उपचुनाव लड़ती हैं और जीतती हैं तो वो विधायक पद हासिल कर पाएंगी।
हुमायूं कबीर ने दिया ऑफर
वर्तमान समय में जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। उसी समय पूर्व में ममता सरकार गिराने का आह्वान करने वाले AJUP संस्थापक हुमायूं कबीर ने गुरुवार को ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में वापसी के लिए अपनी जीती हुई सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर देकर मिर्ची लगा दी है।
गुरुवार को हुमायुं कबीर ने ऐलान किया कि घोषणा की है कि चुनाव नियमों के तहत एक सीट छोड़ने के बाद रेजिनगर में उपचुनाव होगा। इस उपचुनाव के माध्यम से वे बनर्जी की विधानसभा में वापसी को सुगम बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
'अगर ममता बनर्जी मेरे पास आती हैं, तो मैं उन्हें..'
कबीर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "अगर ममता बनर्जी मेरे पास आती हैं, तो मैं उन्हें रेजिनगर से विधानसभा भेज सकता हूं। अगर वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो जीत नहीं पाएंगी। लेकिन अगर वह चाहती हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा और अपने निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत सुनिश्चित करूंगा।"
याद रहे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली कर भवानीपुर से अपनी सीट बरकरार रखी थी, जहाँ उन्होंने पिछली मुख्यमंत्री बनर्जी को हराया था।
कबीर की यह पेशकश तब सामने आई है, जब तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार और पार्टी में हुए विद्रोह ने ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर को गंभीर संकट में डाल दिया है। जिस 28 साल पुरानी पार्टी की उन्होंने स्थापना की थी, वह राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रही है।
हालांकि, अब जब टीएमसी सत्ता से बाहर है और बनर्जी पार्टी के भीतर एक अभूतपूर्व संकट के बीच अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो एजेयूपी संस्थापक ने बनर्जी के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया। यह उनके पूर्व कड़े रुख के विपरीत है।
कबीर ने कहा, "आज वह जिस स्थिति में खुद को पाती हैं, वह मुझे पीड़ा देती है। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह उन्हीं की वजह से हूँ।" पार्टी के मौजूदा संकट को देखते हुए यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समर्थन व्यक्त करते हुए भी, कबीर ने क्षेत्र में अपने स्वयं के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने आत्मविश्वासी लहजे में कहा, "आज कोई शायद उनकी बात न सुने, लेकिन रेजिनगर में हुमायूं कबीर का ही अंतिम निर्णय चलता है।"













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