मानव तस्करी: सिर्फ कठोर कानून से नहीं चलेगा काम
नयी दिल्ली। भारत में मानव तस्करी के संदर्भ में काफी कड़े कानून बनाए गये हैं। इस कानून के तहत ही एक आरोपी को 10 साल की सजा दी गई है। उसपर आरोप था कि उसने कई नाबालिगों को इंजेक्शन देकर देह व्यापार में दलदल में धकेल दिया था।

मगर अब इस कानून में और बदलाव लाने की जरुरत है क्योंकि कई ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें इस कानून के अंर्तगत लाना है। आंकड़ों की मानें तो मानव तस्करी की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। 2009 में मानव तस्करी की घटनाएं 2,848 थी जो 2014 तक बढ़कर 5,500 हो गईं।
हैरान करने वाले आंकड़ें
बात अगर आंकड़ों की करें तो 2014 में दर्ज किए गए मानव तस्करी के कुल मामलों में से 20.10 प्रतिशत पश्चिम बंगाल से हैं। 2014 में पश्चिम बंगाल में 11 हजार 96 मामले दर्ज किए गये थे। 2014 में पश्चिम बंगाल से 852 नाबालिग लड़कियों की तस्करी की गई।
दूसरे स्थान पर तमिलनाडु और तीसरे पर कर्नाटक है। तमिलनाडु में 509 मामले तो कर्नाटक में 472 मामले सामने आए। इसके बाद 407 मामलों के साथ असम चौथे स्थान पर और 398 केस के साथ तेलंगान पांचवे स्थान पर। नाबानिग लड़कियों के तस्करी के मामले में सबसे आगे असम, बिहार, हरियाणा और ओडि़शा (303,280,277 और 74 क्रमश:) हैं।












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