कैग रिपोर्ट में कांग्रेस सरकार का 40564 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया
नई दिल्ली। यूपीए-2 एक बार फिर से बड़े घोटाले की चपेट में घिरती नजर आज रही है। ताजा घोटाला कैग की रिपोर्ट में सामने आया है जिसमें मनमोहन सरकार पर 40 हजार करोड़ रुपए के धान घाटाले का मामला सामने आया है।

नहीं दिया किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य
कैग रिपोर्ट में यह बात निकलकर सामने आयी है कि सरकार ने धान खरीद की प्रणाली में हेराफेरी की गयी है। कैग रिपोर्ट में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान सीधे उन्हें किये जाने का सरकार पर आरोप है। धान की खरीद सहित उसकी ढुलाई सहित कई अन्य प्रक्रियाओं में 40564 करोड़ रुपए की अनियमितता की बात कैग रिपोर्ट में सामने आयी है। यही नहीं इन अनियमितताओं के चलते सरकार को सब्सिडी का लाभ हुआ।
विलंब होने पर भी नहीं लिया गया विलंब शुल्क
अनियमितताओं का दौर यही नहीं थमा वर्ष 2009-10, 2012-13 और 2013-14 की अवधि में मिल मालिकों से धान की डिलिवरी में हुई देरी का ब्याज भी नहीं वसूला गया जिसकी वजह से 159 करोड़ रुपये लाभ मिल मालिकों को हुआ। बिहार, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में 7,570 करोड़ रुपये का चावल भी सरकारी संस्थाओं को नहीं दिया गया जिस वजह से सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
खेत से खरीदे गये धान पर भी दिया गया मंडी लेबर चार्ज
नियमों के अनुसान सीधे खेत से खरीदे गये धान पर मंडी लेबर चार्च नहीं दिया जाता है लेकिन केंद्र सरकार ने मिल मालिकों को यह लेबर चार्ज भी दे दिया। इस हेराफेरी के चलते मिल मालिकों को 194 करोड़ रुपये तक का मुनाफा हुआ।
घटिया चावल की खरीद ने पहुंचाया करोड़ों का नुकसान
पंजाब में 2010-11, 2013-14 में 82 टन धान की की घटिया गुणवत्ता खरीद के चलते सरकार को 9788 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। सरकार ने घटिया धान का भी पूरा भुगतान किया।
मिल मालिकों को हुआ करोड़ों का फायदा
धान की मिलिंग के खर्च में काफी बदलाव हुआ लेकिन इस सरकार ने नही अपनाया जिसके चलते मिल मालिकों को काफी लाभ हुआ। जिसके चलते 5 हजार करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आयी।
जिन किसानों को मिला एमएसपी प्राइज, नहीं है जानकारी
यही नहीं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी 17,985 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आयी है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य इन राज्यों में नहीं दिया गया। साथ ही जिन किसानों को को यह भुगतान किया गया उनके बैंक खातों की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।












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