कभी उड़ाया था भारत और इसरो का मजाक, आज उसी इसरो को सैल्‍यूट कर रही दुनियाभर की मीडिया

15 फरवरी को इसरो की सफलता के बारे में दुनिया भर चर्चा। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक की मीडिया ने एक बार में 104 सैटेलाइट भेजने वाले इसरो के लिए तालियों के साथ भारत को बताया बड़ा खिलाड़ी।

नई दिल्‍ली। 15 फरवरी को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक नया कीर्तिमान हासिल किया है। इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा और इसके साथ भारत ने रूस का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इसरो की इस सफलता ने दुनियाभर की मीडिया को भारत का मुरीद बना दिया है और इसरो की जमकर तारीफ हो रही है। खास बात है कि तारीफ करने वालों में न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स भी शामिल है जिसने मंगलयान के समय भारत का मजाक उड़ाया था।

पीएम ने भी बजाई तालियां

इसरो ने जो 104 सैटेलाइट्स भेजे हैं उनमें सबसे ज्‍यादा सैटेलाइट्स अमेरिका के हैं। इसके साथ ही एक और खास बात है कि भारत इन सैटेलाइट्स में मौजूद एक सैटेलाइट की मदद से चीन और पाकिस्‍तान पर करीब से नजर रख पाएगा। इसरो ने सभी सैटेलाइट्स को एक सिंगल रॉकेट के जरिए अतंरिक्ष में भेजा है। श्रीहरिकोटा में यह पहला मौका था जब एक सिंगल मिशन में इतने सारे सैटेलाइट्स लॉन्‍च किए गए हों। पढ़ें-104 सैटेलाइट लॉन्‍च: अब पाकिस्‍तान के खिलाफ सर्जिकल स्‍ट्राइक होगी आसान


न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स

अमेरिका के लीडिंग डेली न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने लिखा है, 'एक ही दिन में सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के पिछले रिकॉर्ड से तीन गुना ज्‍याादा, भारत ने 104 सैटेलाइट्स को पहले लॉन्‍च किया और फिर उन्‍हें कक्षा में भेजा। भारत अब अंतरिक्ष आधारित सर्विलांस और कम्‍यूनिकेशन के इंटरनेशनल मार्केट में बड़ा खिलाड़ी बनता जा रहा है।' न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की मानें तो इसमें रिस्‍क भी काफी था क्‍योंकि 17,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से जा रहे एक रॉकेट को कुछ ही सेकेंड्स में गोली की स्‍पीड में सैटेलाइट्स को कक्षाओं में स्‍थापित करता था। अगर एक भी सैटेलाइट गलत कक्षा में चला जाता तो वे आपस में टकरा सकते थे। न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की मानें तो इसरो ने इसमें अपनी श्रेष्‍ठता साबित की है।

बीबीसी

बीबीसी

वहीं बीबीसी ने इस तथ्‍य पर ध्‍यान केंद्रित किया है कि अब भारत ने खुद को कम कीमत वाले स्‍पेस प्रोग्राम में एक विश्‍वसनीय खिलाड़ी के तौर पर कायम कर लिया है। बीबीसी ने लिखा है कि एक सफल लॉन्‍च भारत के महत्‍वकांक्षी अंतरिक्ष प्रोग्राम में एक और मील के पत्‍थर की तरह है। अंतराष्‍ट्रीय खिलाड़‍ियों की मौजूदगी के बीच में ही भारत ने खुद को एक अहम खिलाड़ी साबित कर दिया है।

सीएनएन और वॉशिंगटन पोस्‍ट

सीएनएन और वॉशिंगटन पोस्‍ट

अमेरिका के सीएनएन न्‍यूज चैनल ने कहा है कि कोल्‍ड वॉर के समय अंतरिक्ष प्रोग्राम को लेकर जो रेस अमेरिका और रूस के बीच जारी थी अब वह एशिया के देशों जैसे चीन और भारत की ओर से शिफ्ट हो गई है। भारत और चीन जैसे देश इस खेल में अहम खिलाड़ी साबित हो रहे हैं। अमेरिका ही न्‍यूजपेपर द वॉशिंगटन पोस्ट अखबार ने लिखा वॉशिंगटन पोस्‍ट के मुताबिक लॉन्चिंग इसरो के लिए बड़ी कामयाबी है। कम खर्च में कामयाब मिशन को लेकर इसरो की साख इंटरनेशनल लेवल पर तेजी से बढ़ रही है।

अलजजीरा

अलजजीरा

कतर के न्‍यूज चैनल अल जजीरा ने भी इसरो की शान में कसीदे पढ़े हैं। अल-जजीरा ने कहा है कि भारत अब दूसरे अंतराष्‍ट्रीय खिलाड़‍ियों के साथ प्रतिद्वंदिता कर रहा है और भारत का लॉन्‍च मार्केट अब कम कीमत के लिए मशहूर हो रहा है।

द गार्डियन

द गार्डियन

ब्रिटिश न्‍यूजपेपर द गार्डियन ने लिखा कि नया रिकॉर्ड ब्रेक करने वाली यह लॉन्चिंग तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस मार्केट बाजार में एक गंभीर खिलाड़ी के रूप में भारत को मजबूती देगी। द गार्डियन के मुताबिक भारत वर्ष 1980 में खुद का रॉकेट लॉन्च करके ऐसा करने वाला छठा देश बना था। उसके बाद से ही भारत ने स्पेस रिसर्च को काफी पहले ही अपनी प्राथमिकता बना लिया था। भारत सरकार ने इस साल अपने स्पेस प्रोग्राम के लिए बजट बढ़ा दिया है।

द टाइम्‍स

द टाइम्‍स

लंदन के द टाइम्स ने लिखा है कि भारत इस कामयाबी से अंतरिक्ष के क्षेत्र में नाम करने वाले एलीट देशों में शामिल हो गया है। भारत के कई अहम मिशन का खर्च रशियन, यूरोपियन और अमेरिकी मिशन से काफी कम है। इसरो के मंगल मिशन का खर्च सिर्फ 7.3 करोड़ डॉलर था, जबकि नासा के मावेन मार्स लॉन्च में 67.1 करोड़ डॉलर का खर्च आया था।

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