निधन के बाद अपने परिवार के लिए कितनी संपत्ति छोड़ गए हैं पूर्व सीएम अजीत जोगी, जानिए
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री और एक आईएएस अधिकारी से सीएम तक का सफर तय करने वाले अजीत जोगी अपने परिवार के लिए छोड़ गए हैं इतनी संपत्ति...
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अजीत जोगी का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को 74 साल की उम्र में निधन हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मध्य प्रदेश से अलग करके जब छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दिया तो अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे। अजीत जोगी के निधन पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने अपने पिता के निधन पर ट्वीट करते हुए लिखा कि वेदना की इस घड़ी में मैं निशब्द हूं। आइए जानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कितनी संपत्ति के मालिक थे।

इतने करोड़ की संपत्ति के मालिक थे अजीत जोगी
चुनाव आयोग को 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान दी गई जानकारी के मुताबिक, अजीत जोगी करीब 8 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक थे। अजीत जोगी के पास केवल एक स्कॉर्पियो गाड़ी और उनके नाम पर एक टेंपो ट्रैवलर था, जिनकी कुल कीमत करीब 25 लाख रुपए है। इसके अलावा उनके पास 19 लाख रुपए की ज्वैलरी थी। अजीत जोगी के पास एक करोड़ 78 लाख रुपए की कृषि भूमि और करीब 2 करोड़ रुपए की गैर-कृषि भूमि थी। पैतृक गांव गौरेला और रायपुर में उनके घर हैं, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपए है।
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17 दिनों से कोमा में थे अजीत जोगी
आपको बता दें कि करीब 20 दिन पहले कार्डियक अरेस्ट के बाद अजीत जोगी को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वो पिछले 17 दिनों से कोमा में थे। अजीत जोगी के करियर की शुरुआत सीधे राजनीति से नहीं हुई थे और उन्होंने इंजीनियरिंग में टॉप किया था। इसके बाद उन्होंने इंजीनियर, आईपीएस, आईएएस से होते हुए छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया। साल 1984 में जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने तो कुछ दिन बाद अजीत जोगी से उनकी मुलाकात हुई और इस पहली मुलाकात में ही राजीव गांधी ने उन्हें राजनीति में लाने का फैसला कर लिया।

एक डीएम बन गया देश की सबसे बडी़ पार्टी का सांसद
अजीत जोगी ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि साल 1985 में वो इंदौर के डीएम थे। एक दिन जब वो दफ्तर से घर लौटे तो पता चला कि उनके लिए सीधे दिल्ली में पीएमओ से फोन आया था। अजीत जोगी ने वापस फोन किया, तो उन्हें बताया कि कांग्रेस उन्हें पार्टी के टिकट पर राज्यसभा में भेजना चाहती है। अजीत ने फोन रख दिया और काफी सोच-विचार के बाद फैसला लिया कि वो अब सियासत की दुनिया में कदम रखेंगे। फोन पर दोबारा बात हुई तो खुद कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह उन्हें लेने के लिए इंदौर पहुंच गए। और इस तरह एक डीएम देश की सबसे बडी़ पार्टी का सांसद बन गया।

'इस घड़ी में मैं निशब्द हूं'
अजीत जोगी के निधन के बाद छत्तीसगढ़ में उनके समर्थक मायूस हैं। अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी ने ट्वीट करते हुए लिखा, '20 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ राज्य के सिर से आज उसके पिता का साया उठ गया। केवल मैंने ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ ने नेता नहीं, अपना पिता खोया है। माननीय अजीत जोगी जी ढाई करोड़ लोगों के अपने परिवार को छोड़ कर, ईश्वर के पास चले गए। गांव-गरीब का सहारा, छत्तीसगढ़ का दुलारा, हमसे बहुत दूर चला गया। वेदना की इस घड़ी में मैं निशब्द हूं। परमपिता परमेश्वर माननीय अजीत जोगी जी की आत्मा को शांति और हम सबको शक्ति दे।'

पीएम मोदी ने कहा, जनसेवा के लिए समर्पित थे जोगी
अजीत जोगी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जाहिर किया। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'श्री अजीत जोगी जनसेवा के लिए समर्पित थे। जनसेवा के इसी समर्पण के लिए उन्होंने एक नौकरशाह और राजनेता के तौर पर कड़ी मेहनत की। वह गरीबों, विशेषकर आदिवासी समुदायों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। मैं उनके निधन से काफी दुखी हूं और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं।'












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