भारत से विवाद मोल लेकर चीन अब तक उठा चुका है कितने हजार करोड़ का नुकसान?
नई दिल्ली- दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने अभी-अभी अपनी एक मोबाइल और आईटी डिस्प्ले प्रोडक्शन यूनिट चीन से भारत के नोएडा में शिफ्ट करके उसे कम से कम 4,825 करोड़ का झटका दिया है। दरअसल, कोरोना महामारी फैलाने और पूर्वी लद्दाख में उसकी नापाक हरकत के चलते चीन को भारत से इस तरह के अब तक हजारों करोड़ रुपये के झटके लग चुके हैं। चीन को यह चूना भारत की वजह से हर तरफ से लगा है। एक तो भारत ने कोरोना महामारी के दौरान खुद को आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली है, चाइनीज माल का बड़े पैमाने पर बहिष्कार किया गया है। ऊपर से देश की सुरक्षा के मद्देनजर भारत ने चीन के 200 से ज्यादा मोबाइल ऐप बंद कर दिए हैं। वहीं, अमेरिका के साथ जारी उसके ट्रेड वार के चलते भी कई बड़ी विदेशी कंपनियां भारत की ओर मूव करने की सोच रही हैं। मोटे अनुमानों के मुताबिक चीन को अब तक 1 लाख करोड़ से ज्यादा का झटका लग चुका है, जिसका असर और भी व्यापक होने वाला है।

पहले झटके में 51,000 करोड़ का चूना
चीन की चालबाजियों के जवाब में भारत ने जो उसकी आर्थिक नकेल कसने की शुरुआत की उससे इस साल के जुलाई में ही यह अनुमान जताया जाने लगा था कि ड्रैगन ने भारत से दुश्मनी मोल लेकर कम से कम 51,000 करोड़ रुपये का चूना लगा लिया है (बिजनेस टुडे)। चीन पर आर्थिक प्रहार का पहला बड़ा संकेत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo से हटकर दिया था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा कर दी कि चाइनीज कंपनी हाइवे प्रोजेक्ट में साझीदार नहीं बन सकेंगी। एमएसएमई सेक्टर के लिए भी चीन को लाल झंडे दिखा दिए गए। यह सब 15-16 जून को गलवान घाटी में हुई घटना के तत्काल जवाब के तौर पर हुआ था। इससे पहले ही भारत ने बिना चीन का नाम लिए उसकी ओर से आने वाली एफडीआई के नियम सख्त करने शुरू कर दिए थे।

ऐप बैन से 50,000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान
भारत ने तीन बार में चीन के 224 ऐप पर पाबंदी लगाए हैं। पहले फेज में ही टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप पर पाबंदी लगाई गई। भारत के इस ऐक्शन पर खुद चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने आशंका जताई थी कि सिर्फ टिकटॉक और हेलो ऐप बैन होने से उसकी पैरेंट कंपनी बाइटडांस को करीब 45,000 करोड़ रुपये की चपत लगेगी। दूसरे चरण में जिन 118 चाइनीज ऐप को प्रतिबंधित किया गया उनमें अकेले पबजी बंद होने से चीन को 5 हजार करोड़ से ज्यादा के नुकसान की आशंका जाहिर की गई थी। तीसरे फेज में 24 नवंबर को 43 और चाइनीज ऐप पर ग्रहण लग गए। इन सबसे चीन को हुआ कुल नुकसान कई हजार करोड़ में होने का अनुमान है।

कई राज्यों से भी लगे ड्रैगन को झटके
विभिन्न राज्यों और अलग-अलग मंत्रालय ने भी चीन से जुड़े प्रोजेक्ट को लाल झंडी दिखाई है मसलन महाराष्ट्र ने 5,000 करोड़ का, हरियाणा ने 780 करोड़ का, रेलवे ने 471 करोड़ का प्रोजेक्ट कुछ महीने पहले ही रोक दिया था। इसी तरह यूपी सरकार ने चाइनीज इलेक्ट्रिसिटी मीटर पर पाबंदी लगाई है तो बिहार सरकार ने पटना में महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बनने वाले विशाल पुल से चाइनीज ठेकेदारों का ठेका रद्द कर दिया है।

24 बड़ी कंपनियों के चीन से भारत शिफ्ट होने की संभावना
अगस्त की ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की कोशिशों की वजह विश्व की 24 बड़ी कंपनियां चीन छोड़कर भारत में अपना मोबाइल फोन फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही हैं। इन कंपनियों में उसने सैमसंग और एप्पल का नाम सबसे प्रमुखता से बताया था। तब के अनुमान के मुताबिक ये कंपनियां 150 करोड़ डॉलर की लागत से मोबाइल फोन फैक्ट्री लगाना चाहती हैं। सैमसंग ने यूपी के नोएडा में जो 4,825 करोड़ रुपये की यूनिट चीन से हटाकर लगाने का फैसला किया है, वह उसी का एक छोटा सा पार्ट है।

चाइनीज माल के बहिष्कार से 40,000 करोड़ का चपत
लेकिन, चीन को बड़ा झटका उस क्षेत्र में लगा है, जिसकी इतनी जल्दी उम्मीद नहीं की जा रही थी। भारत के सबसे बड़ी ट्रेडर्स संस्था कॉन्फेड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इस साल दिवाली के मौके पर चीन के सामानों के बहिष्कार के परिणामों को लेकर जो आंकड़े बताए, वह बेहद चौंकाने वाले हैं। सीएआईटी ने कहा कि चीन के सामानों के बहिष्कार की वजह से ड्रैगन को करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह तो सिर्फ एक झांकी थी, सीएआईटी का अनुमान है कि अगले साल दिसंबर तक वह चीन से आयात को 1 लाख करोड़ रुपये तक कम कर लेंगे। अगर, हम सिर्फ उन्हीं आंकड़ों पर यकीन करें जो हमारे पास पुख्ता तौर पर हैं तो भारत से पंगा लेने की वजह से चीन को अबतक कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान हो चुके है।
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