COVID-19 के खिलाफ जंग से मिली लोकप्रियता को कब तक संभाले रख पाएंगे पीएम मोदी?
नई दिल्ली- कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के केंद्र में रहना लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया है। हाल में कोविड-19 को लेकर जितने भी सर्वे हुए हैं, उनकी नेतृत्व क्षमता को खूब वाहवाही मिली है। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री एक सर्वमान्य वर्ल्ड लीडर भी बनकर उभरे हैं। उनकी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों, दुनिया के देशों को इस संकट से निपटने में मदद करने की वजह से उनकी दुनिया भर में काफी सराहना की जा रही है। इस बात में कोई शक नहीं कि आज की तारीख में भारत जिस फेडरल सिस्टम में काम कर रहा है, उसमें पीएम मोदी टीम लीडर के रूप में नजर आते हैं। लेकिन, सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर यह लोकप्रियता कब तक ?

कोरोना से युद्ध में मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ चढ़ा
2020 की जब शुरुआत हुई थी तब विशेष रूप से आर्थिक मोर्च पर पीएम मोदी और उनकी सरकार को कई तरह की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा था। हालांकि, किसी भी परिस्थिति में उनकी लोकप्रियता को ज्यादा आघात नहीं लगा। लेकिन, जब से भारत ने कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग की शुरुआत की है और पीएम मोदी ने सुप्रीम कमांडर बनकर इस लड़ाई में मोर्चा संभाला है, उनकी लोकप्रियता का ग्राफ लगातार ऊपर ही चढ़ता चला गया है। साउथ एशिया प्रोग्राम एट द क्रेंजी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के डायरेक्टर मिलन वैश्नव कहते हैं, 'भारत में राजनीति ठहराव की स्थिति में चली गई है, इस शून्य में मोदी की लीडरशिप ज्यादा साफ नजर आती है, जबकि केंद्र इस संकट को निर्णय-निर्माण के अधिकार को और अधिक केंद्रीकृत करने में इस्तेमाल किया है।'

हर सर्वे में पीएम मोदी की लोकप्रियता बढ़ती गई
इसे कुछ तथ्यों से समझ लिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। एक अमेरिकी सर्वे एवं रिसर्च फर्म मॉर्निंग कंसल्ट के मुताबिक 7 जनवरी, 2020 को पीएम मोदी के कार्यों को देश के 76 फीसदी लोगों की सराहना मिल रही थी तो बीते 21 अप्रैल को यह आंकड़ा उछलकर 83 फीसदी तक पहुंच गया। वहीं एक और सर्वे आईएएलएस-सीवोटर कोविड-19 ट्रैकर ने जो नतीजे बताए हैं, वह तो मोदी के आलोचकों की भी आंखें खोल देने वाले हैं। इस सर्वे के मुताबिक इस साल 25 मार्च को कराए गए सर्वे में मोदी के नेतृत्व की सराहना के पक्षधर 76.8 फीसदी लोग थे, जो बीते 21 अप्रैल को बढ़कर 93.5 फीसदी तक पहुंच चुके थे। यानि कोरोना वायरस से आज देश जो संघर्ष कर रहा है, निर्वविवाद रूप से भारत अपने प्रधानमंत्री के नेतृत्व के साथ नजर आ रहा है।

कोरोना से लड़ाई में लोकप्रिय विश्व लीडर नजर आए
मोदी सरकार कोरोना संकट पर जनवरी से ही ऐक्टिव होने का दावा करती है, लेकिन मार्च की शुरुआत तक देश और देश की राजनीति पर कोरोना संकट का ज्यादा असर नहीं था। अलबत्ता, अर्थव्यवस्था की खराब स्थिति, बैंकों की नाकामी, दिल्ली के भयानक दंगे और सीएए के खिलाफ महीनों से जारी धरना-प्रदर्शन को लेकर सरकार आलोचनाओं का शिकार जरूर हो रही थी। लेकिन, होली के ठीक पहले से जैसे ही पीएम मोदी ने कोरोना के खिलाफ जंग की घोषणा की और उन्होंने कमान खुद अपने हाथ में ली, उनकी लोकप्रियता देश में ही नहीं, दुनिया भर में बढ़ती चली गई। मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर तो वो एक वक्त मानवता के सबसे बड़े सेवक के रूप में नजर आए और तमाम वर्ल्ड लीडर उनके सामने याचक की भूमिका में खड़े दिखे। जहां तक देश में कोरोना से लड़ाई का सवाल तो उन्हें विश्व भर से सराहना मिल रही है।

कोरोना से जंग के बाद पीएम मोदी की चुनौती
आज की तारीख में पीएम मोदी की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं उठ सकता। लेकिन, सवाल है कि जब कोरोना वायरस का कहर थमेगा और देश लॉकडाउन से बाहर निकलेगा तब क्या मामला इतना आसान रहने वाला है? प्रधानमंत्री खुद संकेत दे चुके हैं कि इस लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ी मार पड़ी है। जाहिर है कि जब जनता के तरफ से सवाल उठने शुरू होंगे तो अभी शांत पड़े विपक्ष की भी जान में जान आएगी। साथ ही साथ मोदी विरोधी तमाम लोग उस मौके का फायदा उठाने से भी बाज नहीं आएंगे। ऐसे में पीएम मोदी उस संकट के लिए खुद को कैसे तैयार कर रहे हैं कहना मुश्किल है। इसलिए, आज जो स्थिति दिख रही है, वह आने वाले दिनों में किस करवट बैठेगी कहना बहुत मुश्किल है।












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