60 साल की पूरी कहानी: अमेरिका ने भारत को कब-कब झुकाना चाहा, India ने हर बार कैसे दिया करारा जवाब?

India US relation: इन दिनों अमेरिका और भारत जैसे इतिहास दोहरा रहे हैं। एक बार फिर अमेरिका 'दादागिरी' और दबाव की राजनीति पर उतर आया है, तो भारत ने भी पहले की तरह अब भी यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी वैश्विक ताकत के आगे नहीं झुकेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर दो चरणों में 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसका पहला हिस्सा 25 प्रतिशत शुल्क 7 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है, जबकि शेष 25 प्रतिशत (पैनल्टी) 27 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह कदम भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की प्रतिक्रिया है यानी यह केवल कोई व्यापार नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव का हथकंडा है।

India US relation

बता दें क‍ि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारत को झुकाने की कोशिश की हो। बीते 60 साल में 1965, 1971, 1974 और 1998 इन चार बड़े मोड़ों पर अमेरिका ने ताकत दिखाई, प्रतिबंध लगाए, धमकियां दीं। पर हर बार भारत ने जवाब दिया। दृढ़ता से, आत्मसम्मान से, और पूरी मजबूती के साथ।

वर्ष 1965: अमेरिका ने गेहूं रोकने की धमकी दी, भारत ने चुना आत्मसम्मान

भारत-पाक युद्ध 1965 के बीच जब भारत खाद्य संकट से जूझ रहा था, तब अमेरिका 'PL-480' स्कीम के तहत भारत को गेहूं देता था। लेकिन युद्ध रोकने के लिए अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने गेहूं बंद करने की धमकी दी। तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जवाब दिया कि ''हम भूखे रह सकते हैं, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे।" और यही वो समय था जब 'जय जवान, जय किसान' का नारा गूंजा और देश एकजुट हुआ।

वर्ष 1971: अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने पाकिस्तान को हराया

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान अमेरिका पूरी तरह पाकिस्तान के साथ खड़ा था। राष्ट्रपति निक्सन और हेनरी किसिंजर ने भारत पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाने की कोशिश की। यहां तक कि अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा बंगाल की खाड़ी तक भेज दिया गया। लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी झुकी नहीं। भारत ने निर्णायक जीत दर्ज की और बांग्लादेश का निर्माण कराया।

वर्ष 1974: पोखरण-1 के परमाणु परीक्षण पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए, भारत रुका नहीं

भारत ने पहली बार राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण में परमाणु परीक्षण किया। जवाब में अमेरिका ने तकनीकी सहायता, परमाणु ईंधन और आर्थिक सहयोग पर प्रतिबंध लगा दिए। फिर भी इंदिरा गांधी ने स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के सहारे देश का परमाणु कार्यक्रम जारी रखा।

वर्ष 1998: अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा-"हम घुटने नहीं टेकेंगे"

भारत ने पोखरण-2 परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका बौखला गया और व्यापक प्रतिबंध लगाए। विश्व बैंक से आर्थिक मदद रोक दी गई, सैन्य उपकरणों की बिक्री पर रोक लगाई गई। तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दो टूक कहा कि "भारत की सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम करेंगे। चाहे अमेरिका माने या न माने।" कुछ ही महीनों बाद अमेरिका को समझ में आ गया कि भारत को अलग-थलग नहीं किया जा सकता। 1999 में प्रतिबंध हटने लगे और 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए।

वर्ष 2025: फिर वही स्क्रिप्ट, भारत पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत

अब डोनाल्ड ट्रंप भारत को टैरिफ के जरिए दबाने की कोशिश कर रहे हैं, भारत का रुख पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट और ठोस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का फोकस है। रणनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक सम्मान। भारत अब उस दौर में नहीं है, जब किसी वैश्विक शक्ति द्वारा उसे दबाया जा सके। वह वैश्विक मंच पर नीतिगत स्थिरता और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बन चुका है।

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