मिशन 2014: बीजेपी को मिले 272 में से 200 सीट, तभी मोदी बनेंगे पीएम
भारत में इस समय लोकसभा चुनाव की जो रेस चल रही है वो नई तो नहीं है पर इस बार का लोकसभा चुनाव हर बार से अधिक महत्व पाता दिख रहा है। जिस तरह जनता जागरुक दिख रही है यह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। इस लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह चुनाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही पक्षों से विशेष रुप से एक व्यक्ति को केन्द्र में रख कर चल रहा है और वो विशेष व्यक्ति हैं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी।
बनारस का रोड शो मोदी लहर को साबित करने के लिए काफी...
ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक व्यक्ति को जनता का प्यार और उसकी नाराजगी दोनों एक साथ मिल रही है। कारण एक तरफ 2001 से गुजरात में उनका बेहतर प्रदर्शन है जिसने जनता के मन में उनके प्रति गहरी आस्था को जन्म दिया है ऑर नाराजगी का कारण भी गुजरात में ही 2002 में हुआ सांप्रदायिग दंगा है जिसमें मरने वालों की तादात 1000 से भी ज्यादा थी ऑर उसमें भी अधिकतर मुसलमान थे। भले ही मोदी खुद को इस हिंसा के लिए दोषी न मानते हों पर मुस्लिम समुदाय अब भी उन्हें इसके लिए माफ नहीं कर पाया है।
जहां मोदी के समर्थक उन्हें अपना मसीहा मान रहे हैं वहीं उन्हें नापसंद करने वाले लोग उन्हें धार्मिक विविधता वाले देश भारत के लिए किसी खतरे से कम नही समझ रहे जिन्हें डर है कि मोदी देश को धर्म के आधार पर बांट देंगे। मोदी को चाहने वाले मोदी की विस्तृत लहर को स्वीकार रहे हैं परतो वहीं विरोधी मोदी की लहर को मानने के हक में कतई नहीं है।
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मीडिया की देन मोदी!
यह कहना गलत नहीं लगता कि जिस उत्साह से मीडिया ने मोदी के प्रचार को कवर किया है, जनता तक पहुंचाया है उसने मोदी के प्रचार को काफी लाभ पहुंचा है पर फिर भी भले ही मोदी की जनपक्षधरता कितनी भी विस्तृत क्यों न हो पर भारत बहुत बड़ा देश है. मोदी के विरोधियों की संख्या भी कुछ कम नहीं है तो भईया अभी मोदी ऑर भाजपा दोनों पर संकट के बादल बने ही हुए है आप अभी चैन की सांस नहीं ले सकते।

महाराष्ट्र ऑर कर्नाटक बने मुसीबत
बात यदि पश्चिम के तटीय राज्य महाराष्ट्र ऑर कर्नाटक की करे जो कि दोनों ही एक बार भाजपा द्वारा शासित रह चुके हैं वहां भी जनता का मन किस ओर है यह साफ साफ कहा नहीं जा सकता बाकी यहां के क्षेत्रीय दल भी भाजपा को टक्कर दे रहें है।

गुजरात मॉडल के दम पर मोदी
मोदी गुजरात मॉडल के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि विकास तो गुजरात में हुआ ही है जिसकी वजह से ही आज चारों ओर नमो नमो का राग अलापा जा रहा है।

भ्रष्टाचार और जातीय राजनीति
दूसरी तरफ भाजपा के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप और जातीय राजनीति का मुद्दा यहां भाजपा के लिए मुसीबत बन सकता है। केरल ऑर तमिलनाडु इन दोनों राज्यों में मोदी का प्रभाव तो दिख रहा है बांकि यहां कि जनता भाजपा या कहें कि मोदी के लिए कितनी जागरुकता दिखाती है इसका पता 16 मई को चलेगा।

गोवा में भाजपा की राह आसान नहीं
गुजरात के आलावा गोवा में भाजपा की सत्ता कायम है पर यहां भी हाल में कैथोलिक चर्च द्वारा धर्म निरपेक्ष पार्टियों को चुनने की जो खुली अपील हुई है वो राजनीतिक बदलाव ला सकती है तो यहां भी भाजपा संकट में है।

मोदी की लहर प्रभावी नहीं
आंध्रप्रदेश ऑर उड़ीसा यहां मोदी की लहर प्रभावी नहीं दिख रही है। यहां लोग क्षेत्रीय दलों ऑर मुद्दों के बीच सिमटे ही नजर आ रहे हैं। बात यदि हम पश्चिम बंगाल की करते हैं तो ममता जी की तृणमूल कांग्रेस यहां पर मजबूत दिखाई दे रही है।

272 में से 200 सीट तभी मोदी बनेंगे पीएम
कुल मिला कर देखें तो भारत के पश्चिम ऑर दक्षिण हिस्से में तीन केन्द्र शासित प्रदेश दमन ऑर दीव, दादर ऑर नगर हवेली ऑर पांडिचेरी ही जहां चुनाव एक सीट पर ही हो रहा है वही भाजपा की जीत के लिए लाभकारी हो सकते हैं बांकि जिन अन्य 9 राज्यों की चर्चा हमने कि तो अधिकतर में भाजपा को 543 में 269 सीट पाने के लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों की माने तो भाजपा को इस लोकसभा चुनाव में जीत के लिए बिना गठबंधन के 272 में से 200 सीट खुद अपने दम पर हासिल करनी होगी तब संयुक्त एनडीए स्तर पर भी भाजपा का सिक्का जम पाएगा।












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