तेलंगाना में रेवंत ने कैसे पटली बाजी? जानिए चुनावी अभियान में कैसे ली गई AI की मदद
दक्षिण भारत के राज्य तेलंगाना में इस बार कांग्रेस की जीत की कई वजह बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान इस बार व्यापक रूप से एआई पर आधारित भविष्यवाणी के इस्तेमाल के जरिए पूरी तरह बाजी पलट दी और तीसरी बार सत्ता में काबिज होने सपना देख रही बीआरएस हरा दिया।
हालांकि बीआरएस ने रायथु बंधु स्कीम का चुनाव के दौरान पैसा रोके जाने के ईसीआई के आदेश को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा था। लेकिन अब टीपीसीसी प्रमुख ए रेवंत रेड्डी ने किसानों को भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि किसानों को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। रेवंत ने कहा कि कृषकों का हित कांग्रेस सरकार में सर्वोपरि रहेगा।

राज्य में कुछ राजनीति के धुरंधर अब भी बीआरएस की हार पचा नहीं पा रहे। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना चुनाव में कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया। प्रौद्योगिकी का उपयोग न केवल लोकप्रिय 'मारपु कवली कांग्रेस रावली' गीत बनाने के लिए किया गया, बल्कि मतदाताओं की पसंद की भविष्यवाणी करने के लिए भी किया गया।
पार्टी सूत्रों के हवाले कहा गया कि कांग्रेस ने एआई पर आधारित भविष्यवाणी मॉडल का उपयोग करते हुए उम्मीदवारों, नारों आदि से मतदाताओं के प्रभावित होने की संभावना का विश्लेषण किया। तेलंगाना चुनाव में कांग्रेस ने एआई पर भरोसा किया। कांग्रेस ने प्रौद्योगिकी, डिजिटल मार्केटिंग आदि पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया। पार्टी ने डिजिटल मार्केटिंग के प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए एआई पर भरोसा किया। अभियान प्रबंधन के लिए भी कांग्रेस एआई पर निर्भर रही।
वहीं बीआरएस ने पारंपरिक अभियानों के भरोसे रही। चुनाव प्रचार के दौरान भारत राष्ट्र समिति ने ज्यादातर सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग पर कम ध्यान देने के साथ रैलियां और सार्वजनिक बैठकें आयोजित करने के पारंपरिक दृष्टिकोण पर भरोसा किया।












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