Manmohan Singh: खान सर ने शेयर किया वो किस्सा, जब मनमोहन सिंह ने 300 करोड़ रुपए लाकर बचाई भारत की बर्बादी
Manmohan Singh Economic Reforms: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 (गुरुवार) की रात को निधन हो गया। मनमोहन सिंह ने 92 साल की उम्र में नई दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। मनमोहन सिंह की मौत के बाद बिहार पटना के खान सर के कई Explainer वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं, जिनमें खान सर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के भारत को आर्थिक संकट से उभारने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र है।
खान सर के वायरल वीडियो पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव सरकार के कार्यकाल 1991-1996 पर हैं। उस वक्त मनमोहन सिंह वित्त मंत्री रहते हुए पहला उदारीकरण वाला बजट पेश करके भारत की डूबती अर्थव्यवस्था को इस कदर पटरी पर लाए कि पूरी दुनिया देखती रह गई। भारत की अर्थव्यवस्था में उदारीकरण लाने का श्रेय भी मनमोहन सिंह को दिया जाता है।
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Manmohan Singh Death: 15 दिन बाद भारत पर आने वाला था बड़ा आर्थिक संकट
अपनी कक्षा में पढ़ाने के दौरान मनमोहन सिंह आर्थिक सुधारों द्वारा किए गए जिक्र करते हुए वीडियो में खान कहते हैं कि साल 1991 में भारत की क्रय शक्ति समता (पीपीपी) धरातल पर जा चुकी थी। भारत के खजाने में विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ महज 15 दिन की खरीद का ही पैसा बचा था। 15 दिन बाद भारत में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला था। देश बर्बाद होने की कगार पर पहुंचने वाला था। देश को गिरवी रखने की नौबत आने वाली थी।
Manmohan Singh Death Reason: मनमोहन सिंह ने भारत का सोना इंग्लैंड में गिरवी रखा
खान सर कहते हैं कि 1991 के आर्थिक संकट से उभरने का कोई रास्ता पीवी नरसिम्हा राव को नहीं सूझा तो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी अपनी सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दी। मनमोहन सिंह ने भारत का सोना इंग्लैंड में गिरवी रखा और 300 करोड़ रुपए लेकर आए। उन 300 करोड़ रुपए से न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को संभाला बल्कि देश में खूब विकास भी किया। फिर मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री भी रहे।
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Manmohan Singh First Budget: मनमोहन सिंह ने 1991 में पेश किया था ऐतिहासिक बजट
भारत साल 1991 का बजट कभी नहीं भूल सकता। उसी से भारत की गिरती अर्थव्यवस्था का सहारा मिला था। तब पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने बजट में उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization) से जुड़ी अहम घोषणाएं कीं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था में नई जान आई। भारत में व्यापार नीति, औद्योगिक लाइसेंसिंग, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति से जुड़े नियम-कायदों में बदलाव किए गए।
Manmohan Singh News: मोदी को देश की कमान सौंपते क्या बोले मनमोहन सिंह?
मनमोहन सिंह द्वारा इंग्लैंड से लाए गए उन 300 करोड़ रुपए से भारत में लगातार इतना विकास हुआ कि साल 2014 में जब मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी को पीएम की गद्दी सौंपी तो इस बात का जिक्र भी किया कि 'हम उस वक्त से राजनीति में हैं, जब देश पीपीपी में आखिरी पायदान पर था और देश के पास सिर्फ 15 दिन का पैसा बचा था। अब देश की कमान की कमान मोदी जी आपके हाथ में है। देश पीपीपी के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है।'
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Manmohan Singh Biography: मनमोहन सिंह का जीवन परिचय, जन्म पाकिस्तान में हुआ
भारत के 13वें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के गाह में हुआ। गाह वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। मनमोहन सिंह ने बचपन में ही मां को खो दिया था। उनका पालन-पोषण नानी जमना देवी ने की। 10 साल की उम्र तक उर्दू माध्यम से पढ़ाई की। फिर पेशावर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में दाखिल लिया।
विभाजन के समय मनमोहन सिंह अपने परिवार के साथ भारत आकर यहां के हल्द्वानी में बस गए। फिर 1948 में पंजाब के अमृतसर चले गए। वहां हिंदू कॉलेज, अमृतसर व पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई की। 1952 और 1954 में अर्थशास्त्र में स्नातक और मास्टर डिग्री प्राप्त की।
मनमोहन सिंह ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद 1966-1969 के दौरान संयुक्त राष्ट्र के लिए काम किया। 1982-1985 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे। लोकसभा चुनाव 2009 में मिली जीत के बाद मनमोहन सिंह देश में जवाहर लाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री बने, जो पांच साल पीएम कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद फिर से दूसरी बार प्रधानमंत्री बने हो।
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Manmohan Singh Political Career: मनमोहन सिंह सक्रिय राजनीति से संन्यास कब लिया?
2008 के मुंबई हमलों को न रोक पाने और कोयला ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद, मनमोहन सिंह के प्रशासन ने उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखी। उनकी सरकार ने प्रमुख विश्व शक्तियों के साथ संबंधों में सुधार किया और गरीबी को कम करने और शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को बढ़ाने के उद्देश्य से नीतियां लागू कीं।
सिंह ने 2014 में फिर से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और 2024 तक सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। उनकी विरासत में भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाना शामिल है, जिसने वैश्विक स्तर पर इसकी स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ, और वे अपने पीछे एक ऐसे नेता की विरासत छोड़ गए, जिन्होंने जटिल चुनौतियों का ईमानदारी से सामना किया।
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