गलवान घाटी में South China Sea वाली चालबाजी में कैसे खुद ही फंस गया चीन
नई दिल्ली- किसी भी जगह पर कृत्रिम तरीके से लैंडस्केप बदलकर उसपर अपना अधिकार जताना चीन का पुराना खेल रहा है। दक्षिण चीन सागर में उसने इसी तरीके से एक विशाल द्वीप बनाकर उसपर अपना बहुत बड़ा सैन्य ठिकाना बना लिया है। लेकिन, लगता है कि गलवान घाटी में उसकी चाल उलटी पड़ गई है। कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि वह महीनो से गलवानी नदी के किनारे-किनारे खुदाई करके अपना दखल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ये भी सूचना है कि उसने नदी किनारे ही कई अस्थाई पोस्ट भी बना लिए थे। लेकिन, अब जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, उससे पता चला है कि इस मौसम में नदी में अचानक तेज बहाव आने से उसके सारे किए-कराए पर पानी फिर गया है। जबकि, माउंटेन वॉरफेयर में दुनिया में सबसे माहिर भारतीय सेना ने इस दौरान सामरिक तौर पर सभी ऊंचाई वाली जगहों पर अपना पोजिशन ले लिया है। यानि चाइनीज घाटी में लगे रहे और भारतीय सेना उनपर ऊंचाइयों से नजर रख रही है।

गलवान घाटी में अपनी चालबाजी में खुद ही फंस गया चीन
भारतीय सेना ने गलवान घाटी की सभी ऊंचाई वाले स्थानों पर स्ट्रैटजिक पोजिशन ले लिया है, लेकिन सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें बयां करती हैं कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी गलवान नदी के किनारे लगाए गए पोस्ट की वजह से वहीं फंस गई है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में गलवान नदी में पानी का बहाव अचानक तेज हुआ है, जिससे चीन द्वारा खड़े किए गए उसके कई पोस्ट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जबकि, सूत्र बताते हैं कि भारत ने पतली घाटी के सामरिक रूप से अहम चोटियों पर अपनी स्पेशलाइज्ड माउंटेन ट्रूप्स की तैनाती कर दी है; और उन्हे अपने नियंत्रण में ले लिया है। यही नहीं भारत ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपने इलाके में काफी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी है। यानि पीएलए की जमीन नदी किनारे से भी खिसकने लगी है और भारतीय सेना उनपर नीचे और ऊपर दोनों जगहों नजर रख रही।
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दक्षिण चीन सागर वाली चाल नाकाम हो गई
गौरतलब है कि पहाड़ों पर लड़ी जाने वाली जंग में जो सेना ऊंचाइयों पर तैनात होती हैं, उन्हें नीचे तैनात दुश्मनों की टुकड़ियों के मुकाबले मौके का ज्यादा फायदा मिलता है। इससे वह दुश्मनों पर ज्यादा आसानी से हावी हो सकती है। जबकि, हकीकत ये है कि चीन की सेना बीते दो महीनों से गलवान नदी के किनारे ही खुदाई करके घाटी और पीएलए की आवाजाही के लिए नदी के किनारों को कृत्रिम तौर पर चौड़ा करने में लगी रही है। बता दें कि चीन ने गलवान घाटी में जो रणनीति अपनाने की कोशिश की थी, वह दक्षिण चीन सागर में भी वैसे ही करता आया है। वहां उसने कृत्रिम द्वीप बना-बनाकर अपने क्षेत्र का फर्जी तरीके से विस्तार करता है और फिर उसे अपना प्रशासनिक जिला घोषित करता है। उसने वहां बहुत बड़ा सैन्य ठिकाना भी बना लिया है। लेकिन, लगता है कि गलवान की घाटी में वह अपनी चालबाजी में खुद ही फंस गया है और बरसात के मौसम में खुद नदी किनारे डेरा डालकर उसने पहाड़ों की चोटियों की कमान खुद से पहाड़ों की लड़ाई में दुनियाभर में सबसे ताकतवर मानी जाने वाली भारतीय सेना को सौंप दी है।

पहाड़ों की लड़ाई की विजेता है भारतीय सेना
गौरतलब है कि पहाड़ों पर लड़ाई के मामले में भारतीय सेना दुनिया में सबसे ताकतवर मानी जाती है। क्योंकि, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की सीमा से लगे लाइन ऑफ कंट्रोल पर पाकिस्तानी हरकतों का जवाब देने का दशकों का अनुभव उसके पास है। यही नहीं दुनिया की सबसे ऊंची युद्ध भूमि सियाचिन ग्लेशियर में वह समुद्र तल से 20,000 फीट की ऊंचाई पर 34 साल से जंग लड़ रही है। हाल ही में चीन के रक्षा मामलों के एक जानकार ने भी स्वीकार किया है कि माउंटेन वॉरफेयर में भारत का मुकाबला कोई नहीं कर सकता और गलवान घाटी में जिस तरह से उसने स्थिति को संभाला है, यह उसके उसी अनुभव का नतीजा है।

गलवान नदी किनारे चीन के पोस्ट हुए खाली
असल में सैटेलाइट की तस्वीरें बताती हैं कि गलवान नदी के किनारे मौजूद चीन की कई छावनियां अचानक खाली हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस मौसम में नदी में अचानक पानी का उछाल आने से वह उसके कुछ हिस्सों को अपने साथ बहा ले गई है। चीन को लग रहा था कि वह अपने सैन्य मंसूबों को पूरा करने के लिए गलवान के लैंडस्केप को भी बदलने में कामयाब रहेगा, लेकिन लगता है कि एक ही बार पानी के बहाव में उसकी सारी उम्मीदें भी बह गई हैं। जबकि, ग्लेशियर से लेकर कारगिल-द्रास सेक्टर की चोटियों पर लड़ाई जीतने का अनुभव भारतीय सेना के पास है। अभी तो गर्मी का मौसम है, भारतीय सेना तो उन इलाकों में कड़ाके की ठंड में भी डटी रहती है।

चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट ने क्या कहा ?
चीन के एक मिलिट्री एक्सपर्ट ने हाल ही में कहा था कि ऊंचाई पर लड़ी जाने वाली जंग के लिए भारतीय सेना दुनिया की सबसे प्रशिक्षित और सबसे अनुभवी सेना है। ये बात चीन के पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के लिए हथियार बनाने वाले एक बड़े निर्माता से जुड़े एक्सपर्ट ने कही है। उन्होंने कहा है कि जिस किसी भारतीय जवान की पहाड़ों पर तैनाती होती है, उसके लिए पर्वातारोहण एक 'आवश्यक कौशल' है। आधुनिक हथियारों से जुड़ी एक मैगजीन के सीनियर एडिटर हुआंग गुओझी ने लिखा है, 'मौजूदा समय में पठार और पर्वतीय सैनिकों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा और अनुभवी देश न तो अमेरिका और रूस है और न ही यूरोपीय पावरहाउस हैं, बल्कि भारत है। '












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