40 हजार करोड़ के कर्ज में डूबे अखिलेश यादव नहीं दे पायेंगे 24 घंटे बिजली

लोक सभा चुनाव 2014 में मोदी 'लहर' से अपने ही घर में मिली करारी हार के बाद बौखलाई समाजवादी पार्टी अब जनता को उन्हें वोट न देने का सबक सिखा रही है। ये सबक बिजली और पानी की कटौती कर संभव किया जा रहा है। चुनाव में सपा को सिर्फ 5 ही सीट मिली है जिसमें से दो सीटों पर तो स्वयं मुलायम सिंह यादव, एक सीट पर उनकी बहू डिंपल यादव और अन्य दो सीटों पर मुलायम के भतीजे जीते हैं।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के पूर्व चीफ इंजीनियर शैलेंद्र दूबे का कहना है कि उत्तर प्रदेश में भारी बिजली संकट व्याप्त है। उन्होंने बताया कि यह बिजली संकट सिर्फ बिजली उत्पादन कम होने की वजह से नहीं है बल्कि सरकार की गलत नीतियों से उत्पन्न है। शैलेंद्र ने बताया कि मई और जून महीने में यूपी में बिजली की मांग बढ़ जाती है जिसे पूरा करने के लिए पावर कारपोरेशन प्रतिदिन करोड़ों रुपए की बिजली अन्य राज्यों समेत केंद्र से खरीदती है। खरीदी गई बिजली आम जनों के घरों में आपूर्ति किए जाने बजाए वीवीआईपी जिलों में भेजी जाती है। वीवीआईपी जिलों के अंतर्गत कनौज, मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़ और हरदोई आते हैं। ये वो जिले हैं जहां से या तो मुलायम स्वयं संबंद्ध रखते हैं या फिर उनका कोई खास नेता। ताजूब तो ये है कि खरीदी जाने वाली बिजली का भुगतान पिछले दो वष्र से नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन पर बढ़ते कर्ज की एक तस्वीर:
प्रतिदिन खरीदी जा रही बिजली: 1300-1400 मेगावाट
बिजली खरीद: 700-800 करोड़ रुपए
सरकारी विभागों पर बकाया बिजली किराया: 27,000 करोड़ रुपए
उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली रकम: 8000-9000 करोड़ रुपए
ट्रांसफार्मर घोटाला: 2000-2500 करोड़ रुपए
बिजली संकट पर नेताओं के बयान:
यूपी के अंदर बिजली आपूर्ति किए जाने में सपा सरकार कोताही कर रही है। वीवीआईपी जिलों को बिना किसी लिखित आदेश के 24 घंटे बिजली देना संवैधानिक नहीं है।
मायावती, बसपा अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश में बिजली का संकट पिछले कई सालों से व्याप्त है। यूपी की सरकार की गलत नीतियां संकट का प्रमुख कारण हैं।
शैलेंद्र दूबे, पूर्व चीफ इंजीनियर, यूपीपीसीएल












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