बंगाल के 3 अफसरों की केंद्र में तैनाती को लेकर भड़कीं ममता, बोलीं- ये असंवैधानिक
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के तीन आईपीएस अधिकारियों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए फिर आदेश जारी किए हैं। ये तीन आईपीएस अधिकारी वही है जो बीजेपी चीफ जेपी नड्डा के काफिले पर हमले के वक्त ड्यूटी पर थे। गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को तीन आईपीएस अधिकारियों को जल्द से जल्द रीलीव देने के लिए एक और पत्र भेजा है। तीन आईपीएस अधिकारियों को गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए रिपोर्ट करने को कहा गया है।

गृह मंत्रालय ने इन अधिकारियों पर IPS कैडर नियम 6 (1) के तहत कार्रवाई की। नवीनतम निर्णय के अनुसार, भोलानाथ पांडे को चार साल के लिए ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट में एसपी के रूप में, प्रवीण त्रिपाठी को सशस्त्र सीमा बल में डीआईजी के पद पर और राजीव मिश्रा को आईटीबीपी के आईजी के रूप में तैनात किया गया है। ये नियुक्ति 5 साल के लिए है।
केंद्र के इस फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। एक के बाद एक ट्वीट कर उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने आईपीएस के आपातकालीन प्रावधान का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा "राज्य की आपत्ति के बावजूद पश्चिम बंगाल के 3 सेवारत IPS अधिकारियों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का GoI का आदेश, IAS कैडर नियम 1954 के आपातकालीन प्रावधान का शक्ति और ज़बरदस्त दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण है।
टीएमसी अध्यक्ष ने कहा, यह अधिनियम और कुछ नहीं है, बल्कि राज्य के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करने और पश्चिम बंगाल में सेवारत अधिकारियों को हतोत्साहित करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। यह कदम, विशेष रूप से चुनावों से पहले संघीय ढांचे के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। यह असंवैधानिक और पूरी तरह से अस्वीकार्य है! मुख्यमंत्री ने आगे कहा, हम केंद्र द्वारा राज्य की मशीनरी को प्रॉक्सी द्वारा नियंत्रित करने के इस प्रयास को अनुमति नहीं देंगे! पश्चिम बंगाल विस्तारवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों के सामने सिर झुकाने वाला नहीं है।












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