गृह मंत्रालय ने गठित किया UAPA ट्रिब्यूनल, त्रिपुरा टाइगर फोर्स और NLAFT के वैधता की होगी जांच
नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) को गैर कानूनी एसोशियएन घोषित करने की जांच के एक केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृहमंत्रालय ने एनएलएफटी और एटीटीएफ की वैधता की जांच के लिए एक यूएपीए एक्ट के तहत एक ट्रिब्यूनल गठित किया है, जिसमें गौहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनीष को शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार ने इस महीने के पहले सप्ताह में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) को सभी गुटों और विंगों को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। इसके साथ ही इस एसोशियएन पर 5 साल के लिए बैन लगाया गया। वहीं अब गृहमंत्रालय ने इन संगठनो की वैधता की जांच के लिए के ट्रिब्यूनल का गठन किया है।

गृहमंत्रालय ने इस निर्णय के बाद एक एक बयान में कहा, "यूएपीए के तहत दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार "गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण" का गठन किया है, जिसमें गौहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनीष शामिल हैं। ट्रिब्यूनल इस तथ्य की जांच करेगा कि नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) को गैरकानूनी एसोसिएशन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं।"
इससे पहले गृहमंत्रालय ने इन संगठनों पर बैन लगाते हुए कहा कि ये ग्रुप नागरिकों, पुलिस और सुरक्षा बलों के कर्मियों की हत्या में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा ग्रुप के सदस्यों ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, व्यवसायों से जबरन वसूली की है। एनएलएफटी और एटीटीएफ के लोग ट्रेनिंग, हथियारों और गोला-बारूद की खरीद के उद्देश्य से पड़ोसी देशों में अपने कैंप स्थापित कर रहे हैं। इसलिए ऐसे सभी गुटों को गैरकानूनी माना गया है। गृहमंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी)और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) पर 4 अक्टूबर से पांच साल तक बैन प्रभावी रहेगा।












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