पुलवामा हमला: CRPF जवानों की ट्रेनिंग में कमियों को लेकर लिखी गई थी चिट्ठी

नई दिल्ली। 14 फरवरी को जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले ने कई सुरक्षा खामियों को सामने लाकर रख दिया था। इस हमले को एक माह से ज्‍यादा का समय हो चुका है और अभी तक इस हमले के बारे में कई जानकारियां सामने आ रही हैं। अब इंग्लिश डेली इंडियन एक्‍सप्रेस की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि पुलवामा में आतंकी हमले से पहले एक ऑफिसर की ओर से चिट्ठी लिखकर अर्धसैनिक बल में एंटी-टेरर ट्रेनिंग से जुड़ी कई कमियों का जिक्र किया गया था। इस चिट्ठी में जवानों को दी जा रही ट्रेनिंग में कई प्रकार की कमियों को लेकर चिंता जताई गई थी। पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

CRPF हेडक्‍वार्ट्स को भेजी गई थी चिट्ठी

CRPF हेडक्‍वार्ट्स को भेजी गई थी चिट्ठी

सीआरपीएफ आईजी रजनीश राय की ओर से सीआरपीएफ हेडक्‍वार्ट्स को जनवरी और फिर नवंबर 2018 में चिट्ठी लिखी गई थी। इसमें कहा गया था कि आतंकवाद और चरमपंथ से जूझ रहे सबसे बड़े अर्धसैनिक बल के पास कोई स्‍थायी ढांचा नहीं है। न तो फायरिंग रेंज है और न ही कोई बाउंड्री वॉल। पिछले चार वर्षों में 150 से ज्‍यादा ट्रेनिंग और एडमिनिस्‍ट्रेटिव स्‍टाफ की पोस्टिंग की गई है। लेकिन अभी तक एक भी सीआईएटी (काउंटर-इनसर्जेंसी एंड एंटी टेररिज्‍म) कोर्स तक नहीं है। जनवरी से नवंबर माह के बीच एक के बाद एक कई चिट्ठियां लिखी गई थीं और इन सभी चिट्ठियों में ट्रेनिंग सिस्‍टम में कई कमियों को बताया गया था।

जून 2017 तक नॉर्थ ईस्‍ट में थे आईजी

जून 2017 तक नॉर्थ ईस्‍ट में थे आईजी

आखिरी चिट्ठी जो आईजी रजनीश राय ने हेडक्‍वार्ट्स को भेजी थी, वह 22 नवंबर 2018 को थी। रजनीश राय आंध्र प्रदेश के चित्‍तूर में सीआईएटी स्‍कूल के इंचार्ज थे जब उन्‍होंने चिट्ठियां लिखी थीं। गृह मंत्रालय की ओर से साल 2007 में इस तरह के 21 सेंटर्स की योजना बनाई गई थी जिसमें से तीन सीआरपीएफ के हिस्‍से थे। राजनीश राय 1992 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस ऑफिसर हैं और वह जून 2017 तक नॉर्थ ईस्‍ट में बतौर आईजी तैनात थे।

कौन हैं आईजी रजनीश राय

कौन हैं आईजी रजनीश राय

इसी समय उनसे चित्‍तूर के सीआईएटी स्‍कूल का जिम्‍मा संभालने को कहा गया। उनका ट्रांसफर उस समय हुआ था जब 30 मार्च 2017 को असम के चिरांग जिले में सेना, सीआरपीएफ, एसएसबी और पुलिस की ओर से एक एनकाउंटर हुआ और उन्‍होंने इसकी जांच की मांग की। आईजी रजनीश के मुताबिक यह एक फेक एनकाउंटर था। पिछले वर्ष दिसंबर में राय को गृह मंत्रालय ने सस्‍पेंड कर दिया था। उन पर अनाधिकृति तौर पर चार्ज हैंड ओवर करने का आरोप लगा था। अगस्‍त 2018 में उन्‍होंने वॉलेंटियरी रिटायरमेंट की मांग की थी। इस वर्ष जनवरी में हालांकि सेंट्रल एडमिनिस्‍ट्रेटिव ट्रिब्‍यूनल (कैट) उनके सस्‍पेंशन पर स्‍टे लगा दिया था। इसके बाद राय ने गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया।

बिना ट्रेनिंग के जवान स्‍कूल में

बिना ट्रेनिंग के जवान स्‍कूल में

अपनी चिट्ठियों में राय ने लिखा है कि कश्‍मीर या फिर नॉर्थ ईस्‍ट जैसे इलाकों में तैनाती जाने वाले जवानों को सिर्फ सीआरपीएफ स्‍कूलों में सिर्फ थियेटर आधारित, कम अवधि वाले प्री-इंडक्‍शन ट्रेनिंग दी जाती है। पांच फरवरी 2018 को लिखी चिट्ठी में राजनीश राय ने कहा था कि सीआरपीएफ के पास तीन सीआईएटी स्‍कूल हैं लेकिन अभी तक एक भी ऐसा कोर्स इन स्‍कूलों में नहीं है जो सीआईएटी से जुड़ा हो। जो आखिरी चिट्ठी राय ने 22 नवंबर 2018 को लिखी थी उसमें उन्‍होंने कहा था कि जब कोई भी ट्रेनिंग जवानों को नहीं दी जा रही है, उसके बाद भी सीआईएटी स्‍कूल में ऑफिसर्स और जवान पूरी संख्‍याबल के साथ सीआईएटी तैनात हैं। उन्‍हें पूरी सैलरी और बाकी भत्‍ते भी बराबर मिल रहे हैं।

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