रेलवे बजट का इतिहास- अंग्रेजों ने शुरू की थी यह प्रथा
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। रेल बजट का लंबा इतिहास है। अंग्रेजी राज के समय से ही रेल बजट को पेश करने की परम्परा शुरू हो गई थी। इसका आगाज हुआ था सन 1924 से। उससे पहले तक रेल विभाग के लिए कोई अलग से बजट का प्रावधान नहीं था।
आम बजट का 70 प्रतिशत
1924 में रेल का बजट भारत के आम बजट का लगभग 70 प्रतिशत था जो अब लगभग 14-15 प्रतिशत तक रह गया है। रेल के इतिहास के पन्नों को पलटने पर आप पाएंगे कि रेल के लिए धन की व्यवस्था आम बजट में से किसी अन्य मंत्रालय की तरह से ही की जाती थी। सन 1921 में ईस्ट इंडियन रेलवे समिति ने इसे अलग करने की सिफारिश की, फलस्वरूप 1924 से रेलवे को वित्त मंत्रालय से अलग कर दिया गया, तभी से इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान कर दिया गया।
ख्वाब का सच होना
इसमें कोई शक नहीं है कि जब हम भारत में हाईस्पीड वाली बुलेट ट्रेनों के चलने का ख्वाब सच होता देख रहे हैं, वहीं एक समय ऐसा भी था जब बैल ट्रेन को खींचा करते थे। यह बात सबको आश्चर्य में डालने वाली है।
नैरोगेज ट्रेन की शुरुआत
बता दें कि गुजरात में नैरोगेज ट्रेन की शुरुआत हुई थी। बड़ोदा के शासक खांडेराव गायकवाड़ ने एक अंग्रेज इंजीनियर मिस्टर ए.डब्ल्यू फोर्ड से पहली डभोई-मियागांव में रेल लाइन की डिजाइन तैयार करवाई और फिर इन्हीं की देखरेख में रेल लाइन का निर्माण किया गया।
नैरोगेज ट्रेन के डिब्बे
इसके बाद यह तय किया कि इस नैरोगेज रेल लाइन पर भाप से चलने वाले इंजन चलाए जाएं। इस लाइन पर चलने वाली नैरोगेज ट्रेन के लिए कुछ डिब्बे भी भारत में तैयार किए गए थे। गुजरात में डभोई-मियागांव नैरोगेज रेल लाइन अंतत: इंजन से चलने वाली ट्रेन के लिए 1862 में खोल दिया गया। इस तरह से भारत की पहली नैरोगेज लाइन बनाई गई। हालांकि यह भी बताना जरूर है कि स्वतंत्र भारत में रेलवे का इस्तेमाल विभिन्न दलों और नेताओं ने अपने लाभ के लिए खूब किया।
सोलह क्षेत्रों में बंटी
बता दें कि भारतीय रेल सोलह क्षेत्रों में बंटी हुई है। प्रत्येक क्षेत्र में कई मंडल हैं। जो इस तरह स हैं- उत्तर पश्चिम रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण रेलवे, दक्षिणपूर्व मध्य रेलवे, दक्षिणपूर्व रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे, पूर्व तटीय रेलवे, पूर्व रेलवे, पूर्वमध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, मध्य रेलवे,कोंकण रेलवे।













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