पाकिस्तान-बांग्लादेश नहीं इस एशियाई देश में घट रही हिंदू आबादी, 65 सालों में 43 फीसदी बढ़ी मुस्लिम जनसंख्या

Hindu Population Share: भारत की जनसंख्या संरचना में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि 1950 से 2015 के बीच देश में हिंदू आबादी का प्रतिशत घटा है, जबकि मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यह रिपोर्ट 'शेयर ऑफ रिलिजियस माइनॉरिटीज: अ क्रॉस-कंट्री एनालिसिस (1950-2015)' शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। इसमें भारत के विभिन्न धार्मिक समुदायों की जनसंख्या में आए बदलावों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां हिंदू आबादी में कमी दर्ज की गई, वहीं मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई।

Hindu Population

इसके अलावा, पारसी और जैन समुदायों की आबादी में गिरावट देखी गई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में धार्मिक संरचना धीरे-धीरे बदल रही है और सामाजिक विविधता को बढ़ावा मिल रहा है।
ये भी पढ़ें: हिंदू समुदाय के लिए खास झटका मटन, महाराष्ट्र में शुरू हुआ 'मल्हार सर्टिफिकेशन', जानिए इसके बारे में सबकुछ

हिंदू आबादी में 7.82% की गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 1950 में भारत में हिंदू आबादी 84.68% थी, जो 2015 में घटकर 78.06% रह गई। यानी इसमें 7.82% की गिरावट दर्ज की गई है।

मुस्लिम आबादी 43.15% बढ़ी

1950 में मुस्लिम आबादी 9.84% थी, जो 2015 में बढ़कर 14.09% हो गई। इसका मतलब है कि मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी में 43.15% की वृद्धि हुई है।

अन्य धार्मिक समुदायों की स्थिति

  • ईसाई आबादी 1950 में 2.24% थी, जो 2015 में बढ़कर 2.36% हो गई।
  • सिख समुदाय की हिस्सेदारी 1.24% से बढ़कर 1.85% हो गई, यानी इसमें 6.58% की वृद्धि हुई।
  • जैन समुदाय की जनसंख्या 1950 में 0.45% थी, जो 2015 में घटकर 0.36% रह गई।
  • पारसी समुदाय की आबादी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। 1950 में यह 0.03% थी, जो 2015 में घटकर सिर्फ 0.004% रह गई। यानी पारसी आबादी में 85% की कमी आई है।

सामाजिक विविधता को बढ़ावा

रिपोर्ट में कहा गया कि इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में सामाजिक विविधता को बढ़ावा मिल रहा है। समाज में अल्पसंख्यकों की बढ़ती हिस्सेदारी दिखाती है कि सरकारी नीतियां और सामाजिक बदलाव सभी समुदायों के लिए अनुकूल माहौल बना रहे हैं।

पिछड़े वर्गों के लिए बेहतर माहौल जरूरी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यदि समाज में कमजोर और पिछड़े वर्गों की स्थिति सुधारनी है, तो उनके लिए एक सहयोगी और समावेशी माहौल तैयार करना जरूरी है। इसके लिए नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें: Karnataka CM: सिद्दारमैया ने क्यों लिया यू-टर्न? मुस्लिम 'तुष्टिकरण' की ओर लौटने की मजबूरी की 5 बड़ी वजह

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+