हिमाचल प्रदेश में एग्जिट पोल के बाद निर्दलीय उम्मीदवारों की डिमांड बढ़ी, क्या कह रहे हैं बागी ? जानिए
हिमाचल प्रदेश में एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद जीत की संभावना वाले कुछ चुनिंदा निर्दलीय उम्मीदवारों के दिन फिर गए हैं। उनका दावा है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उनसे संपर्क में हैं, लेकिन फैसला 8 दिसंबर के बाद करेंगे।


हिमाचल प्रदेश में निर्दलीय उम्मीदवारों की 'पूछ' बढ़ी
हिमाचल प्रदेश के लिए आए कुछ एग्जिट पोल के नतीजों ने त्रिशंकु विधानसभा की ओर इशारा किया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बदली हुई परिस्थितियों में कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों की ओर से ही संपर्क किए जाने का दावा किया है। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 68 सीटें हैं और किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कम से कम 35 एमएलए का समर्थन चाहिए। लेकिन, सोमवार को आए कुछ एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस दोनों में कांटे का मुकाबला नजर आ रहा है। हालांकि, असली नतीजे 8 दिसंबर को मतगणना के बाद ही मिलेंगे।

बागी उम्मीदवारों ने किया दोनों दलों से संपर्क किए जाने का दावा
वोटिंग के बाद जो अलग-अलग एग्जिट पोल हुए हैं, उसमें राज्य में बीजेपी को 24 से लेकर 41 तक सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। वहीं कांग्रेस के खाते में 20 से 40 सीट तक जाने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में अगर वाकई त्रिशंकु विधानसभा की परिस्थिति बनी तो सत्ता की चाबी निर्दलीय एमएलए के हाथों में जा सकती है। उन्हीं में से कुछ संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों ने दावा किया है कि दोनों दलों ने उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया है। मसलन, बीजेपी के बागियों में केएल ठाकुर और मनोहर धीमान ने कहा है कि दोनों ही दलों ने उनसे संपर्क किया है। टिकट नहीं मिलने पर यह निर्दलीय चुनाव लड़े हैं। हालांकि, यह लोग असली नतीजे आने तक अपना पत्ता नहीं खोलना चाहते हैं।

8 दिसंबर के बाद अपने पत्ते खोलेंगे जीतने वाले निर्दलीय
एक और निर्दलीय प्रत्याशी राम सिंह ने कहा है कि वह बागी नहीं, बल्कि जनता के उम्मीदवार हैं और किसको समर्थन देंगे यह फैसला 8 दिसंबर के बाद करेंगे। हिमाचल में इस बार कुल 91 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन, करीब दो दर्जन पर बागी होने का ठप्पा लगा है, जिनको लेकर आशंका है कि वे अपने-अपने दलों के आधिकारिक उम्मीदवारों के वोट में सेंधमारी कर सकते हैं, जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। हिमाचल में इस बार भाजपा बागियों से बहुत ज्यादा परेशान रही है, यह बात सार्वजनिक भी हो चुकी है और पीएम मोदी का एक बागी को समझाने का कथित ऑडियो भी सामने आ चुका है।

इन निर्दलीय उम्मीदवारों की लग सकती है लॉटरी
वैसे कांग्रेस हो या बीजेपी, दोनों ही उन निर्दलीय उम्मीदवारों पर ही फोकस कर रही है, जिनके चुनाव जीतने की संभावना नजर आ रही है। इनकी रणनीति यही है कि अगर बहुमत से थोड़े पीछे रहे तो निर्दलीयों को साथ लेकर सरकार बनाने का दावा ठोक सकते हैं। वैसे जिन निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत की ज्यादा संभावना बताई जा रही है, उनमें नालागढ़ से केएल ठाकुर, इंदौरा से मनोहर धीमान, कुल्लु से राम सिंह,अर्की से राजू, देहरा से होशियार सिंह, ठियोग से इंदू वर्मा और जसवां-परागपुर से संजय पराशर शामिल हैं।

कांग्रेस-बीजेपी दोनों ही कर रही हैं अपनी जीत के दावे
वैसे बीजेपी हो या कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में अपनी-अपनी जीत के दावे दोनों ही पार्टियों की ओर से किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है, 'हमें स्पष्ट जनादेश मिलेगा और सरकार बनाएंगे। सरकार के साथ आने की चाहत रखने वाले निर्दलीयों का स्वागत है और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ संपर्क में रहना एक सामान्य प्रक्रिया है।' इसी तरह विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी दावा किया है कि कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है और पार्टी के नेता निर्दलीयों के साथ संपर्क में हैं। हिमाचल में दोनों दलों के बीच आमतौर पर सरकारें बदलने की परंपरा सी बनी हुई है और पहले कई बार प्रदेश में निर्दलीय सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा भी चुके हैं।












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