रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर PMO की शीर्ष बैठक में IB ने दी ये चेतावनी
म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी की समस्या से निपटने के लिए शीर्ष स्तर की बैठक, आला अधिकारियों ने की शिरकत, भारत के रुख की हो रही है आलोचना, कई चुनौतियां हैं सामने
नई दिल्ली। म्यांमार के रोहिंग्या मुसमलानों के मुद्दे पर खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में इस मुद्दे को लेकर शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी मुद्दे की आड़ में पाकिस्तान के आतंकी संगठन रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर देश के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। बैठक में कहा गया कि ये संगठन भारत को अपना निशाना बना सकते हैं। प्रधानमंत्री कार्याल में हुई इस बैठक को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने बुलाया था, बैठक में खुफिया रिपोर्ट का जिक्र किया गया है, जिसमें भारत के लिए रोहिंग्या शर्णार्थियों के मुद्दे को बड़ी चुनौती बताया गया है।
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आला अधिकारियों ने की बैठक
रोहिंग्या शरणार्थियों पर भारत सरकार के रुख की जिस तरह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है, उसके बाद सरकार को मजबूरन अपने फैसले की समीक्षा करनी पड़ रही है। शीर्ष अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में भारत के रुख की समीक्षा की। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा भी मौजूद थे। बैठक में तमाम शीर्ष अधिकारी मौजूद थे, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे। साथ ही आईबी और रॉ के चीफ ने भी इस बैठक में शिरकत की।

बैठक में खुफिया रिपोर्ट पर चर्चा की गई
इस बैठक में मुख्य रूप से म्यांमार के रोहिंग्या आतंकी कमांडर और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों जैस लश्कर-ए-तैयबा के बीच के संबंधों पर चर्चा की गई। साथ ही खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्या मुसलमानों के बच पाकिस्तान के आतंकी संगठनों का प्रभाव एक बड़ी चुनौती है, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सकता है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष ने भी इस मुद्दे पर भारत की आलोचना की थी, उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर भारता का रुख शर्मनाक है।

40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में आ चुके हैं
आपको बता दें कि भारत ने का इस पूरे मसले पर कहना है कि पिछले कुछ सालो में म्यांमार की हिंसा की वजह से 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में प्रवेश कर चुके हैं। ये लोग ज्यादातर हैदराबाद, दिल्ली, जम्मू के आस-पास के इलाके में बस चुके हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में इनकी आमद में काफी इजाफा हुआ है। बैठक में यह भी कहा गया है कि म्यांमार के रोहिंग्या विद्रोहियों ने हाफिज सईद के साथ भी संपर्क साधा है। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार इन आतंकियों को लश्कर पैसा और हथियार मुहैया करा रहा है। इस बाबत आईबी की रिपोर्ट में कुछ तस्वीरें भी संलग्न क गई हैं। तस्वीरों में हाफिज सईद रोहिंग्या मुसलमानों को 2012 में संबोधित भी करता नजर आ रहा है।

पाक के आतंकियों के बीच है कनेक्शन
यही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि हूजी का चीफ रोहिंग्या मूल का पाकिस्तानी नागरिक है और मुख्य रूप से बांग्लादेश और पाकिस्तान में बड़ा आतंकी नेटवर्क संभालता है। 2012 में बांग्लादेश में आयोजित रोहिंग्या के आतंकियों के एक सम्मेलन में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के भी शीर्ष कमांडर हिस्सा लेने पहुंचे थे। यही नहीं पाकिस्तानी अल कायदा के ऑपरेटिव मौलाना उस्ताद वजीर रोहिंग्या आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए पिछले महीने थाइलैंड गया था। ऐसे में इस बात की भी जांच चल रही है कि पुलवामा में पुलिस परिस में हुए हमले में इसी संगठन का हाथ तो नहीं था। इस हमले में 8 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे, यह श्रीनगर से 25 किलोमीटर दूर का पुलिस परिसर था।












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