गर्लफ्रेंड के सीने पर चढ़ थामी सांसें, मां-बाप की घर में बना दी जिसने कब्र, पढ़ें सनसनीखेज कहानी
इस हत्याकांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। तो आईए इश्क, अय्याशी और नरसंहार की सनसनीखेज वारदात के बारे में एक-एक चीज पर विस्तार पर प्रकाश डालते हैं।
नई दिल्ली। भोपाल में अपने लिव इन पार्टनर आकांक्षा और रायपुर में अपने मां-बाप की हत्या कर दफन करने वाला उदयन दास साइकोपैथी पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर का शिकार बताया जा रहा है। क्लिनकल साइक्लोजिस्ट की मानें तो उदयन दास का केस बिल्कुल चार्ल्स शोभराज जैसा है। आपको बता दें कि चार्ल्स शोभराज को एशिया का सबसे बड़ा सीरियल किलर कहा जाता है और वो भी साइकोपैथी पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर का शिकार है। खैर उदयन दास के निशानदेही पर पुलिस ने रायपुर में उसके पुराने घर की खुदाई की और नरकंकाल बरामद किया है। मौके पर से हड्डियां और बोरे में पैक कपड़े भी मिले हैं।
इसके अलावा सोने के चार कंगन, एक चेन और ताबीज मिली है जो उदयन की मां इंद्राणी का बताया जा रहा है। वहीं मौके से एक लेदर बेल्ट भी मिला है जिसे पुलिस उदयन के पिता का मान रही है। इस हत्याकांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। तो आईए इश्क, अय्याशी और नरसंहार की सनसनीखेज वारदात के बारे में एक-एक चीज पर विस्तार पर प्रकाश डालते हैं और तस्वीरों के माध्यम से उदयन दास को जानने की कोशिश करते हैं जिसे तीन स्टेट्स की पुलिस रिमांड पर लेना चाह रही है।

ORKUT पर हुई थी आकांक्षा और उदयन की दोस्ती
पश्चिम बंगाल के बांकुरा में रहने वाले देवेंद्र कुमार शर्मा की बेटी आकांक्षा उर्फ श्वेता (28) की 2007 में उदयन नाम के लड़के से ऑरकुट पर दोस्ती हुई थी। जून 2016 में घर से नौकरी करने की बात कहकर आकांक्षा भोपाल आ गई। यहां वह उदयन के साथ साकेत नगर में रहने लगी। उसने परिवारवालों को बताया कि मैं अमेरिका में नौकरी कर रही हूं।

बात होनी बंद हुई तो घरवालों को हुआ शक
जुलाई 2016 के बाद आकांक्षा के परिवारवालों से बात होनी बंद हो गई। भाई ने नंबर ट्रेस कराया तो लोकेशन भोपाल की निकली। परिवार के लोगों को शक था कि आकांक्षा उदयन के साथ रह रही है। दिसंबर 2016 में आकांक्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई। एक महीने की जांच के बाद पुलिस उसके ब्वॉयफ्रेंड उदयन के घर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने आकांक्षा की हत्या की बात कबूली।

घर में ही बना डाली कब्र
पुलिस ने जब उदयन के घर की तलाशी ली तो सभी कमरों में सामान बिखरा हुआ था और कमरों से बदबू आ रही थी। पुलिस ने बताया कि उदयन ने पहले आकांक्षा का मुंह तकिये से दबाया और फिर उसका गला घोंट दिया। आकांक्षा के शव को ठिकाने लगाने के लिए उदयन ने अपने एक दोस्त की मदद से लाश को एक बॉक्स में बंद किया। उसके बाद घर में ही उसने आकांक्षा को दफन कर दिया। आकांक्षा जहां दफन हुई उदयन ने उसपर चबूतरा बना दिया। बाद में पुलिस ने शव को छह घंटे की मशक्कत के बाद चबूतरे को तोड़कर निकाला।

क्यों की आकांक्षा की हत्या
आकांक्षा अपने एक दोस्त से फोन पर अक्सर बात करती थी। यह बात उदयन को नागवार गुजरती थी। 14 जुलाई 2016 की रात आकांक्षा और उदयन के बीच जमकर बहस हुई थी। आकांक्षा सो गई, लेकिन उदयन रातभर जागता रहा। मारने की प्लानिंग करता रहा। 15 जुलाई की सुबह वह आकांक्षा के सीने पर बैठ गया और तकिए से उसका तब तक मुंह दबाता रहा, जब तक कि उसकी सांसें नहीं थम गईं। इसके बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने हाथ से उसका गला घोंट दिया।

कबूली मां-बाप की हत्या की बात
उदयन दास ने कबूल किया है कि उसने अपने मां-बाप की हत्या की थी और अपने रायपुर वाले मकान में उन्हें दफन कर दिया था। पुलिस उदयन को भोपाल से रायपुर ले गई और मकान की खुदाई कर हड्डियां बरामद किया है। पुलिस ने हड्डियों को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा है। पुलिस ने बताया कि उदयन ने मां-बाप की हत्या सिर्फ इसलिए की थी क्योंकि वो उसे नशा और फिजूल खर्च करने से रोकते थे।

पड़ोसियों को बताया बीमारी से हुई मौत
पूछताछ में पुलिस को पड़ोसियों ने बताया कि उदयन ने उन्हें बताया था कि उसके पिता की मौत बीमारी से हुई थी। उदयन ने यह भी बताया था कि उसकी मां अमेरिका में रहती है। रायपुर में उदयन के बेचे गए मकान के आसपास रहने वालों ने बताया कि उदयन रायपुर में मां इंद्राणी और पिता वीके दास के साथ रहता था। उदयन और उसकी फैमिली पड़ोसियों से ज्यादा घुलती-मिलती नहीं थी। इसलिए लोग ज्यादा कुछ नहीं बता पाए।

फेसबुक पर उदयन ने आकांक्षा को रखा था जिंदा
उदयन ने अपनी प्रेमिका को इस दुनिया से विदा कर दिया लेकिन वर्चुअल दुनिया के लिए वह उसे जिंदा किए हुए था। अपनी प्रेमिका का फोन ऐक्टिव रखकर वह उसके घर वालों से नियमित तौर पर बात किया करता था। मनोचिकित्सक का कहना है कि ऐसे लोग दोहरी जिंदगी जीते हैं। ये पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकते हैं जिनमें समानुभूति, दया और पछतावा जैसी भावनाओं की कमी होती है। ऐसे लोग जब ताव में आकर कोई अपराध कर बैठते हैं तो वह वर्चुअल दुनिया में मुखौटा लगाए रखना चाहते हैं जिससे कि वह पकड़े न जाएं।

आकांक्षा के नाम से ही करता था पोस्ट और कमेंट
उदयन दास की फेसबुक पर कई आईडी है जिसमें वह दादा, पिता और प्रेमिका के नाम से पोस्ट और कमेंट करता था। मां-बाप और प्रेमिका को मारने के बाद भी वह उनकी आेर से कमेंंट करता रहा। अपनी पोस्ट में कभी वह पेरिस तो कभी मॉस्को में बताता था। कभी यूएन में नौकरी तो कभी यूएस में पीएचडी की जानकारी यहां से मिलती है।

फेसबुक पर स्टेट्स पर प्यार के वादे
आकांक्षा उदयन मेहरा की आईडी से एक फोटो पोस्ट किया है। जिसमें उदयन और आकांक्षा की फोटो है। साथ में लिखा है- हम दो, टॉम एंड जैरी। हममें अपनी पसंद के अनुसार जीने की हिम्मत है। इस पोस्ट में उदयन ने कमेंट किया है- आकांक्षा मेरी जिंदगी है। किसी ने उसे पिन भी चुभाया तो मैं उसके दिल को तलवार से चीर दूंगा। मैं खुले तौर पर स्वीकारता हूं कि आकांक्षा से मुलाकात के पहले मेरी जिंदगी किसी चरवाहे की तरह थी। 2007 में मेरी उससे मुलाकात हुई। मेरी गलतियों पर उसने मुझे चिल्लाया। उसने बताया- क्या सही है और क्या गलत।

IIT पास आउट नहीं है उदयन
पुलिस ने बताया कि उदयन रायपुर के एक स्कूल से मात्र 12वीं कक्षा तक पढ़ा लिखा है। उदयन ने पुलिस को पहले दावा किया था कि वह आईआईटी दिल्ली से पढ़ा हुआ है। लेकिन पुलिस का कहना है कि छानबीन में पता चला है कि उदयन IIT पास आउट नहीं है। उसके माता-पिता की संपत्ति और पैसे के कारण उसका रहन-सहन काफी विलासितापूर्ण था। उन्होंने कहा कि उसके माता-पिता का एक फ्लैट दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी से 10,000 रुपये, रायपुर के फ्लैट से 7,000 रुपये तथा साकेत नगर स्थित मकान के भूतल का किराया 5,000 रुपये प्रतिमाह उसे मिलता था। इसके अलावा पिता के संयुक्त खाते में 8.5 लाख रुपये की एफडी का ब्याज भी उसे मिलता था।

फोरमैन थे उदयन के पापा
पुलिस को संदेह है कि वह अपने माता-पिता के संयुक्त खाते से उनकी पेंशन की रकम भी निकाल लेता था। गौरतलब है कि उदयन के पिता वीके दास भेल में फोरमैन थे। उदयन की मां विध्यांचल भवन में एनालिस्ट की पोस्ट से रिटायर हुई थीं। मां की पेंशन लगभग 30 हजार रुपए आती है।

उदयन को हो सकती है सजा ए मौत
उदयन दास को भी बड़ी सजा हो सकती है। अफसरों की मानें तो अगर इन्वेस्टिगेशन अच्छा हुआ तो फांसी की सजा तय है। बुजुर्ग दंपती को जिस हैवानियत से मारा गया, सोचने से भी रोगटे खड़े हो जाते हैं। इंद्राणी देवी का गला घोंटकर पहले उसे मारा, फिर अपने पिता पीके दास की हत्या की। एक ही दिन बेटे ने बुजुर्गों को मौत के घाट उतार दिया। दरिंदगी की मिसाल कुछ ऐसे भी पार की, कब्र में डाली गई लाशों के चेहरे को पॉलीथिन और प्लास्टिक के बोरे से लपेट दिया। ऐसी हैवानियत पर उम्मीद है कि कोर्ट बड़ा सजा सुनाएगी।
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