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#HerChoice जब मुझे मालूम चला कि नपुंसक से मेरी शादी हुई है

महिलाएं, #HerChoice
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यह मेरी शादी की पहली रात थी. मैं पहली बार किसी आदमी के साथ अंतरंग होने वाली थी. करीबी मित्रों से हुई बातचीत और देखे गए कई पोर्न वीडियो से मेरे दिमाग में सपनों और इच्छाओं की कई तस्वीरें उभर रही थीं.

झुके सिर के साथ हाथ में दूध का एक गिलास पकड़े मैंने कमरे में प्रवेश किया. सबकुछ बेहद पारंपरिक था, ठीक वैसे ही जैसा मैंने सोचा था.

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एक बड़ा झटका कर रहा था मेरा इंतजार

लेकिन मुझे यह बिल्कुल भी आभास नहीं था कि एक मुझे कुछ ही देर में एक जोरदार आघात लगने वाला है. बल्कि इसे निराशाजनक कहा जाना चाहिए.

मेरे सपनों के अनुसार जब मैं कमरे में आती हूं तो मेरा पति मुझे कसकर गले लगाता है, चुंबन की बौछार कर देता है और सारी रात मुझे प्यार करता रहता है. लेकिन वास्तविकता में, जब मैं कमरे में घुसी उससे पहले ही वो सो चुका था.

तब 35 की उम्र में मैं वर्जिन थी. इससे मुझे बेहद ही कष्दायक अस्वीकृति का अहसास हुआ.

कॉलेज के दिनों के दौरान और मेरे कार्यस्थल पर मैंने कई लड़कों और लड़कियों के बीच गहरी दोस्ती देखा करती थी. वो अपने पार्टनर के कंधों पर अपना सिर टिकाये होते, हाथ पकड़े घूमा करते और मैं उन्हें देख कर जला करती थी.

क्या मुझे भी अपनी जिंदगी में ऐसे ही किसी साथी की तमन्ना नहीं करनी चाहिए थी?

मेरा एक बड़ा परिवार था. चार भाई, एक बहन और वृद्ध माता-पिता. इसके बावजूद मुझे हमेशा अकेलापन महसूस होता था.

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बढ़ती उम्र के बाद भी मैं अकेली थी

मेरे सभी भाई बहन शादी शुदा थे और उनका अपना परिवार था. कभी कभी मैं सोचती थी कि क्या वो मेरी परवाह भी करते हैं कि मेरी उम्र बढ़ रही है और मैं अभी तक अकेली हूं.

मेरे दिल में भी प्यार की इच्छाएं थीं, लेकिन यह तन्हाईयों से घिरा हुआ था. कभी कभी मुझे लगता कि यह केवल इसलिए है क्योंकि मैं मोटी हूं.

क्या मर्द मोटी लड़कियों को नापसंद करते हैं? क्या मेरे वज़न की वजह से मेरा परिवार मेरे लिए जीवनसाथी नहीं ढूंढ पा रहा? क्या मैं हमेशा अकेली ही रहूंगी? क्या मैं कुंवारी ही रहूंगी? ये सवाल हमेशा ही मेरे मन में घूमते रहते.

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शादी के बाद मेरी उलझन

आख़िरकार जब मैं 35 साल की हुई तो किसी तरह एक 40 वर्षीय आदमी मुझसे शादी करने आगे आया. उससे मिलने के दौरान मैंने उन्हें अपनी भावनाओं के विषय में बताया.

लेकिन उन्होंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया और ना ही इसका कोई जवाब दिया. वो थोड़े परेशान दिखे. वो नीचे की ओर देखते हुए चुपचाप बैठ गए और केवल अपना सिर हिलाते रहे.

मैंने सोचा कि आजकल महिलाओं से ज्यादा पुरुष शर्मीले होते हैं और मेरे मंगेतर भी कोई अपवाद नहीं हैं, शायद इसलिए उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

लेकिन शादी की रात हुई उस चीज़ ने मुझे उलझन में डाल दिया. मुझे नहीं पता कि उसने ऐसा क्यों किया.

जब अगली सुबह मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने कहा कि वो ठीक नहीं थे. लेकिन आगे भी कुछ नहीं बदला. हमारी दूसरी, तीसरी और कई रातें ऐसे ही बीतीं.

मेरी सास ने मेरे पति का बचाव किया

मैंने जब अपनी सास को यह बताया तो उन्होंने भी मेरे पति का बचाव किया. उन्होंने कहा, "वह एक शर्मीला व्यक्ति है, उसे बचपन से ही लड़कियों से बात करने में झिझक रही है, उसने लड़कों के स्कूल में पढ़ाई की है. उसकी ना तो कोई बहन है और ना ही को महिला मित्र."

हालांकि इस बात से मुझे अस्थायी राहत तो मिली लेकिन मैं इस विषय में सोचना बंद नहीं कर सकी.

मेरी सारी उम्मीदें, सपने और इच्छाएं दिन ब दिन टूट रही थीं.

मेरी बेचैनी का एकमात्र कारण सेक्स नहीं था. वो शायद ही मुझसे बात करते थे. उन्होंने ना तो कभी मुझे छुआ और ना ही कभी मेरा हाथ ही पकड़ा.

मेरे सब्र का बांध टूटने लगा

अगर एक औरत अपने पहने हुए कपड़े भी ठीक करती है तो मर्द उसे ऐसा करते हुए देखने की कोशिश करता है. लेकिन अगर मैं कभी रात को पूरी तरह से अपने कपड़े उतार भी देती तो भी वो मेरी ओर नहीं देखते.

क्या मेरा वज़न उनके इस व्यवहार का कारण है? क्या उन्होंने मुझसे किसी दबाव में शादी की है?

मुझे नहीं मालूम था कि ये सब किससे शेयर करूं. मैं अपने परिवार से बात नहीं कर सकती थी क्योंकि वो इस भ्रम में थे कि मैं अपने इस नये जीवन से खुश हू्ं.

लेकिन अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा था. मुझे इसका हल ढूंढने की ज़रूरत थी.

उस दिन छुट्टी थी. आम तौर पर छुट्टियों वाले दिन भी वो घर पर नहीं रहते थे, वो या तो अपने किसी मित्र के घर जाते या अपने माता-पिता को बाहर ले जाते थे. संयोग से उस दिन वो घर पर ही रहे.

मैं कमरे में घुसी और अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया. वो बुहत तेज़ी से अपने बिस्तर से उठे मानो कूद गये हों. मैं उनके पास गयी और बहुत विनम्रता से उनसे पूछी, "क्या आप मुझे पसंद नहीं करते? हम अब तक एक बार भी अंतरंग नहीं हुए हैं, ना ही आपने अब तक कभी अपनी भावनाओं के विषय में ही बताया, आख़िर आपकी समस्या क्या है?"

उन्होंने तुरंत जवाब दिया, "मुझे कोई समस्या नहीं है."

जब मुझे पता चला कि...

जब उन्होंने यह कहा तो मैंने सोचा कि यह मौका है उनके करीब जाने और अपनी तरफ उन्हें आकर्षित करने का. मैं उनके गुप्तांग को छुने के करीब जा पहुंची.

मैंने सोचा कि उत्तेजना से उसका आकार बढ़ेगा, लेकिन तब मुझे बेहद निराशा हुई जब मैंने पाया कि इसका आकार बेहद छोटा है.

मैं बेहद उलझन में थी कि क्या यही गुप्तांग का वास्तविक आकार होता है? और जो मैंने पोर्न वीडियो में देखा था वो ग्राफिक्स को बड़ा कर दिखाया जाता था?

मुझे नहीं पता था कि किससे इस बारे में पूछना चाहिए. मैंने शर्मिंदगी महसूस की.

लेकिन यह मुझे परेशान करता था एक स्त्री की सुंदरता की तरह पुरुषों द्वारा न्याय किया जाता है, मैं अपने पति के शारीरिक गुणों का आकलन क्यों नहीं कर सकती? अगर मुझे उससे कुछ उम्मीदें हैं तो यह ग़लत क्यों है?

मुझसे धोखा किया गया

फिर मुझे पता चला कि वो नपुंसक थे और डॉक्टरों ने हमारी शादी से पहले ही इसकी पुष्टि कर दी थी. वो और उसके माता-पिता सब कुछ जानते थे, लेकिन मुझे अंधेरे में रखकर मुझसे धोखा किया गया.

अब मुझे सच्चाई का पता चल गया तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई, फिर भी उन्होंने अपनी ग़लती कभी स्वीकार नहीं की.

समाज हमेशा महिलाओं की छोटी से छोटी ग़लती को बढ़ा चढ़ा कर पेश करता है. लेकिन अगर किसी मर्द की कोई ग़लती हो तो भी उंगलियां महिलाओं की ओर ही उठते हैं.

मेरे रिश्तेदार ने मुझे सलाह दी, "सेक्स ही जीवन में सबकुछ नहीं है, तुम बच्चा गोद लेने का विचार क्यों नहीं करते?"

मेरे ससुराल वालों ने मुझसे विनती की, "अगर लोगों को सच्चाई पता चल जाएगी तो ये हम सभी की लिए बहुत शर्मिंदगी की बात होगी."

लेकिन... पति के कहे से दिल टूट गया

मेरे परिवार ने मुझसे कहा, "यह तुम्हारा भाग्य है!" लेकिन मेरे पति ने जो कहा उससे मुझे बेहद ठेस पहुंची.

उन्होंने कहा, तुम्हें जो अच्छा लगता है वो करो, किसी और के साथ सो सकती हो, मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगा और ना ही किसी को इसके बारे में बताउंगा. अगर उससे तुम्हे बच्चा हो जाए तो मैं उसे अपना नाम देने के लिए तैयार हूं."

किसी भी औरत को अपने पति के ऐसे ख़राब बेरहम विचारों को नहीं सुनना चाहिए. वो बेईमान था और मुझसे ऐसा खुद के और अपने परिवार के सम्मान को बचाने के लिए कह रहा था.

वो मेरे पैरों पर गिर कर रोने लगा और कहा, "प्लीज, इसे किसी को मत बताना और न ही मुझे तलाक़ देना."

उसने जो सुझाया वो मैं सोच भी नहीं सकती थी. अब मेरे पास केवल एक ही विकल्प था या तो मैं उसे छोड़ दूं या एक प्यार करने वाले जीवनसाथी की अपनी इच्छाओं का त्याग कर दूं.

अंत में मेरी भावनाओं की जीत हुई. मैंने अपने उस तथाकथित पति का घर छोड़ दिया. मेरे माता-पिता ने मुझे स्वीकार नहीं किया.

अपने दोस्तों की मदद से मैं एक लेडिज़ होस्टल में चली गयी और मुझे एक नौकरी मिल गयी.

मेरा जीवन पटरी पर आने लगा और मैंने कोर्ट में तलाक़ की अर्जी डाल दी.

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मैं अब भी वर्जिन हूं

मेरा पति और उसके परिवारवाले बेशर्म थे, उन्होंने सच्चाई को छुपाते हुए शादी टूटने की आड़ में मुझ पर ही विवाहेतर संबंधों का आरोप मढ़ दिया.

मैं लड़ी और मेडिकल जांच करवाई. तीन साल लग गये लेकिन आख़िरकार मुझे तलाक़ मिल ही गया. मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरा पुनर्जन्म हुआ है.

आज मैं 40 की हो गयी हूं और अब भी वर्जिन हूं.

बीते वर्षों में, मुझसे कई मर्दों ने संपर्क किया. वो सोचते थे कि मैंने अपने पति को इसलिए छोड़ा क्योंकि मैं उनसे मुझे यौन संबंध में संतुष्टि नहीं मिलती थी और वे मुझसे वो सब करना चाहते थे.

यह मेरे बारे में ग़लत और बेशक संकीर्ण बातें थीं. मैं ऐसे मर्दों से दूर रहती थी.

इनमें से कोई मुझसे शादी या समर्पित रिश्ता कायम नहीं करना चाहता था.

आख़िर महिलाओं में भी संवेदनाएं होती हैं

मैं अपनी इच्छाओं, सपनों और भावनाओं को केवल उनके साथ शेयर करना चाहती हूं जो मर्द मुझसे प्यार करता, मेरी परवाह करता, मेरी भावनाओं को समझता और जीवन भर मेरे साथ रहना चाहता.

मैं उस मर्द का इंतज़ार कर रही हूं. तब तक मैं अपने दोस्तों से उनके सेक्सुअल लाइफ के बारे में बातें करके ही खुश हूं.

और जब भी मेरे दिमाग में सेक्स की बात आती है तो इसके लिए वेबसाइट मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं.

वैसे लोगों की कमी नहीं है जो उससे मुझे आंकते हैं जो मैंने किया है. मुझे मानती हूं कि ऐसे लोग समझते हैं कि महिलाएं बेजान वस्तु हैं, जबकि महिलाओं में भी बहुत सी संवेदनाएं होती हैं!

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