Heavy Rainfall: पिछली 5 घटनाएं जब बारिश ने मचाई तबाही, हजारों लोगों की गई थी जान
Heavy Rain in India: समूचे उत्तर भारत में भारी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। कई शहरों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। इस जानलेवा बारिश के चलते 50 से अधिक लोगों की जान चली गई है। सैलाब में फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना भी मैदान में उतर चुकी है। हिमाचल, दिल्ली, उत्तराखंड और पंजाब इस बारिश से सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं। चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं बारिश ने देश में कब कब तबाही मचाई।
जम्मू कश्मीर, लेह में बादल फटने की घटना (साल 2010) (Jammu Kashmir Flood 2010)
अगस्त 2010 में जम्मू कश्मीर के लेह में दिल दहलाने वाली घटना घटी थी। जम्मू-कश्मीर के लेह में बादल फटने से 1000 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 400 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस जानलेवा आपदा के कारण लद्दाख क्षेत्र के कई गांव उजड़ गए और करीब 9000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।

उत्तराखंड में बादल फटने की घटना (2013) (Uttarakhand Flood 2013)
साल 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में बादल फटने की घटना से भीषण तबाही मच गई थी। इस घटना में 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे। ज्यादातर लापता हुए लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों में से ज्यादातर तीर्थयात्री थे। बता दें कि भारी बारिश के चलते चारोबाड़ी ग्लेशियर में हिमस्खलन हुआ और मंदाकनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया।
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में 2015 में आई भयानक बाढ़ (Tamil Nadu Flood 2015)
साल 2015 में नवंबर के आखिर और दिसंबर के शुरुआत में हुई लगातार बारिश की वजह से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में जानलेवा बाढ़ आई थी। इस बाढ़ से 18 लाख लोग प्रभावित हुए और कम से कम 470 लोगों की मौत हो गई, बाढ़ की वजह से करीब में 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
2017 में बिहार में बाढ़ (Bihar Flood 2017)
2017 बिहार बाढ़ ने उत्तर बिहार के 19 जिलों को प्रभावित किया था जिससे 514 लोगों की मौत हो गई थी। इस बाढ़ से 1 करोड़ 71 लाख लोग प्रभावित हुए। इस बाढ़ ने मरने वालों की संख्या में पिछले नौ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था।
2018 में केरल में बाढ़ (2018 Kerala Flood)
साल 2018 में केरल में भारी बारिश के चलते बाढ़ आई थी। इस वजह से दक्षिण के इस राज्य में 1924 के बाद सबसे भयानक बाढ़ आई. इस बाढ़ में 400 से ज्यादा लोग मारे गए और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित होने को मजबूर हुए।












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