Parliament winter session: संसद के शीतकालीन सत्र में आप बार-बार सुनेंगे ये शब्द, क्या जानते हैं इनका मतलब?
Winter session, संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इसके बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। संसद में विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, मणिपुर हिंसा और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों को उठाने वाली है।
नई संसद भवन में ये दूसरा सत्र है। संसद के इस शीत कालीन सत्र के दौरान कई शब्द और शब्दाबलियां आपको बार-बार सुनने को मिलेगी। जिनमें कई का बार-बार सदन के अंदर प्रयोग किया जाता है। जिसकी एक लंबी लिस्ट हैं। वहीं कई ऐसे भी शब्द हैं जिन्हें सदन के अंदर बैन किया गया है।

आज हम आपके लिए संसद के अंदर सर्वाधिक इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों की जानकारी लेकर आया हूं। जिन्हें सदस्य और अन्य पदाधिकारी बार-बार इस्तेमाल करते हैं। हम इन शब्दों का अर्थ भी बताएंगे।
सत्र- सदन की प्रारंभिक बैठक और उसके सत्रावसान (या लोकसभा के मामले में विघटन) के बीच का समय है।
विधेयक - किसी वैधानिक प्रस्ताव का प्रारूप होता है जो संसद की दोनों सभाओं द्वारा पारित किए जाने और राष्ट्रपति द्वारा अनुमति प्रदान किए जाने पर अधिनियम बन जाता है।
अधिनियम- संसद की दोनों सभाओं द्वारा पारित विधेयक जिसे राष्ट्रपति ने अपनी अनुमति दे दी है।
बैलट- लॉटरी के जरिए एक से अधिक सूचनाओं की परस्पर अग्रता को निर्धारित करने की प्रक्रिया।
मत-विभाजन - जब ध्वनि-मत द्वारा निर्णीत प्रश्न पर अध्यक्ष की राय को मत-विभाजन की मांग करने वाले सदस्यों द्वारा चुनौती दी जाती है तो अध्यक्ष मत-विभाजन का आदेश देता है।
सभा-पटल - भारतीय संसद के दोनों सदनों में महासचिव की मेज के ठीक सामने सभा-पटल होता है। सांविधानिक प्रावधानों, नियमों एवं निदेशों के अनुसरण में सभा-पटल पर रखे जाने के लिए अपैक्षित पत्रों को औपचारिक रूप से इस पटल पर रखा जाता है।
संशोधन - विधायिका में प्रस्तुत प्रस्ताव या विचाराधीन विषय में परिवर्तन करने की युक्ति; इसमें किसी विधेयक के खण्ड, किसी संकल्प अथवा प्रस्ताव अथवा इनके संशोधन में कतिपय शब्दों, अंकों अथवा चिहनों का लोप, प्रतिस्थापन, जोड़ना और अन्तःस्थापन सम्मिलित है।
ध्यानाकर्षण- एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे सदस्य अविलम्बनीय लोक महत्व के मामले पर मंत्री का ध्यान आकर्षित करता है, मंत्री उस पर संक्षिप्त वक्तव्य देते हैं और इसके उपरांत सदस्य स्पष्टीकरण मांगते हैं।
राजपत्र (Gazette) - इससे भारत का राजपत्र अभिप्रेत है।
प्रस्ताव- मंत्री या सदस्य द्वारा सभा को दिया गया इस आशय का औपचारिक प्रस्ताव कि सभा कोई कार्यवाही करे, कोई कार्यवाही किए जाने का आदेश दे अथवा किसी मामले पर राय व्यक्त करे और प्रस्ताव की भाषा इस प्रकार की होती है कि, स्वीकृत हो जाने पर वह सभा के निर्णय अथवा इच्छा करने का द्योतक हो जाता है।
प्रश्नकाल- सभा की बैठक का पहला घंटा प्रश्न पूछे जाने और उनके उत्तर दिए जाने के लिए आवंटित है।
यहां देखें पूरी लिस्ट:
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