क्या पेगासस स्पाइवेयर से आपकी भी हुई जासूसी? सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने 7 जनवरी तक मांगी जानकारी
नई दिल्ली, 02 जनवरी। जासूसी मैलवेयर पेगासस को लेकर एक बार फिर सुर्खियां तेज हो गई हैं। पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति ने अब उन लोगों की जानकारी मांगी है, जिन्हें संदेह है कि इस सॉफ्टवेयर द्वारा उनके फोन को निशाना बनाया गया था। बता दें कि पिछले वर्ष सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में भारत समेत दुनियाभर के राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की जासूसी पेगसस द्वारा कराए जाने की बात सामने आई थी। भारत में पेगसस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है, इसकी जांच के लिए न्यायालय ने एक कमेटी का भी गठन किया था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई तकनीकी समिति ने अब अपनी जांच को और तेज कर दिया है। समिति ने एक सार्वजनिक नोटिस में ऐसे लोगों से 7 जनवरी तक संपर्क करने को कहा है, जिन्हें संदेह है कि उनकी जासूसी पेगसस मैलवेयर द्वारा की गई थी। समिति ने यह भी कहा है कि वह फोन की जांच के लिए भी तैयार है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह समिति तब नियुक्त की जब इजरायली फर्म एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर का इस्तेमाल दुनिया भर में कई लोगों को निशाना बनाने संबंधी वैश्विक रिपोर्ट सामने आई थी। इस खबर से भारत की राजनीति में भी भूचाल आ गया था।
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'द वायर' की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 142 से अधिक प्रभावशाली लोगों को पेगासस से निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की सुरक्षा लैब द्वारा कुछ सेलफोन के फोरेंसिक विश्लेषण ने फोन की सुरक्षा पर हमले की पुष्टि की है। पेगासस हमले की कथित लिस्ट में कांग्रेस के राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, दो सेवारत केंद्रीय मंत्री, एक पूर्व चुनाव आयुक्त, सुप्रीम कोर्ट के दो रजिस्ट्रार, एक पूर्व जज का पुराना नंबर, एक पूर्व अटॉर्नी जनरल का करीबी सहयोगी और 40 पत्रकार शामिल हैं। बता दें कि जासूसी की बात सामने आने के बाद एनएसओ ग्रुप ने कहा था कि वह सिर्फ देश की सरकारों और सरकारी एजेंसियों के साथ बिजनेस करता है। वहीं भारत सरकार ने संसद में बयान दिया कि किसी के खिलाफ भी पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया गया है।












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