Hate Speech मामले में सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को सख्त निर्देश, स्वत: संज्ञान लेकर शिकायत पर FIR हो
Hate Speech केस में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जब भी कोई नफरत फैलाने वाला भाषण दिया जाए तो FIR दर्ज कराया जाए।

Hate Speech केस में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जब भी कोई नफरत फैलाने वाला भाषण दिया जाए, वे बिना किसी शिकायत के प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करें।
Hate Speech मामले पर क्या बोला
शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि घृणा फैलाने वाले भाषण देने वाले व्यक्तियों के धर्म की परवाह किए बिना ऐसी कार्रवाई की जाएगी। शीर्ष अदालत ने इससे पहले भी सख्त अंदाज में कहा था, जिस दिन राजनीति और धर्म अलग हो जाएंगे, उसी दिन हेच स्पीच बंद हो जाएगी।
धर्मनिरपेक्षता के चरित्र पर SC की दो टूक
स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय यह स्पष्ट करता है कि संविधान की प्रस्तावना में जैसी कल्पना की गई है, भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को संरक्षित रखा जा सके, इसलिए तत्काल एक्शन लिया जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस को मिला था नोटिस
इससे पहले हेट स्पीच प्रकरण में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विगत 17 अप्रैल को माकपा नेता बृंदा करात की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।
केंद्रीय मंत्री के खिलाफ एक्शन की अपील
इसमें भारतीय जनता पार्टी के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान उनके कथित नफरत फैलाने वाले भाषणों के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।












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