'क्या राहुल ने मोदी की चुनौती स्वीकार कर ली है'

अगर इसे आने वाले लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जाए तो इस बयान के बाद मोदी नहीं बल्कि राहुल मीडिया में छा गये हैं, वहीं कांग्रेस ने पहले खाद्य सुरक्षा बिल, भूमि अधिग्रहण बिल पास करवाकर चुनावी तैयारियों को अंजाम देना शुरू कर दिया है तो क्या अब यह कहा जाना चाहिए कि राहुल ने मोदी की चुनौती स्वीकार कर ली है और वह खुद अब फ्रंटफुट पर आना चाहते हैं, इसके अलावा पिछले दिनों मनमोहन सिंह ने भी राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने की इच्छा जताई थी।
सन 2004 में अप्रत्याशित रूप से सत्ता में आयी यूपीए के दस वर्षों के कार्यकाल के बाद शहरी जनता ने कई मौकों पर सरकार का विरोध किया और अब कांग्रेस भूमि अधिग्रहण और खाद्य सुरक्षा बिल के द्वारा ग्रामीण वोटरों के सहारे सत्ता में वापसी का सपना देख रही है, ऐसे में सरकार के खिलाफ राहुल के बगावती सुर उनके द्वारा किये जाने वाले भावी नेतृत्व की ओर इशारा कर रहे हैं। यहां तक की पार्टी कार्यकर्ता और कई नेता भी उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये जाने की बात कह रहे हैं। राहुल का अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलना नये राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।












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