हरियाणा में जीते कोई भी, जीत का अंतर रहेगा कम
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। हरियाणा में मतदान पूरा हो चुका है और लगभग सभी एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी की जीत का ऐलान कर चुके हैं, लेकिन जमीनी समीकरण देखें तो जीते कोई भी पार्टी, लेकिन जीत का अंतर बेहद कम रहने वाला है। विधान सभा चुनाव के नतीजे आगामी 19 अक्तूबर को आएंगे, और राजनीतिक पंडित मानते हैं कि इस बार जीत-हार का अंतर बहुत कम मतों से रहेगा। हर जगह मुकाबले बेहद कड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल, भाजपा और हरियाणा जनहित कांग्रेस व उसके सहयोगियों ने सभी नब्बे विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार कांग्रेस के विरुद्ध उतारे हैं। चुनाव के अंतिम दौर में प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंकी।
एक जगह सभी चैनलों के Exit Polls
वरिष्ठ लेखक राज चेंगप्पा कहते हैं कि मुख्यमंत्री हुड्डा तकरीबन दस साल इस पद पर रहे तो जाहिरा तौर पर पार्टी को सत्तारूढ़ दल के विरुद्ध उपजे मोहभंग का सामना करना ही पड़ेगा। लेकिन हकीकत ये भी है कि लोकसभा चुनाव में जनता ने पार्टी को सिरे से खारिज कर दिया था और दस में से एक ही सीट उसे हासिल हुई थी।
भाजपा का उम्दा प्रदर्शन
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और इसके आठ में से सात प्रत्याशी जीते। इसके उम्मीदवार नब्बे में से बावन विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त लिए हुए थे। भाजपा ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है कि वह पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में नया इतिहास बना सके। इस चुनाव से पहले भाजपा राज्य में बड़ी दखल नहीं दे पाई।
इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा में पार्टी को स्थापित करने के लिए सक्रिय रहे हैं। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्व सहयोगी हजकां से नाता तोड़कर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लेकर एक दांव खेला है। मोदी ने राज्य में एक दर्जन रैलियां की हैं और शाह लगातार राज्य का दौरा करते रहे हैं।
भाजपा में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की कमी नहीं है। खट्टर समेत पार्टी के हरियाणा अध्यक्ष रामबिलास शर्मा, पार्टी प्रवक्ता कैप्टन अभिमन्यु सिंह और पार्टी के किसान मोर्चा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनकड़ इनमें शामिल हैं। इसके अलावा दो पूर्व कांग्रेसी, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और राज्यसभा के पूर्व सदस्य चौधरी बीरेंद्र सिंह को भी इस दौड़ से अलग नहीं समझा जा रहा है।
एक बार फिर ताकत जुटाकर खड़े हुए इनेलो सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने मिली जमानत का उपयोग राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए रैलियों के आयोजन में किया। उनके 27 वर्षीय पौत्र दुष्यंत चौटाला जो राज्य के सबसे कम उम्र के पहले सांसद हैं, बताते हैं, ‘मेरे अस्सी वर्षीय दादा ने लगातार अस्सी घंटे का चुनाव अभियान चलाया।' उनका दावा है कि इससे चुनावी समर में इनेलो ताकतवर घटक के रूप में उभरा है।
अब चाहे जाति व बिरादरी घटक जो भूमिका निभाए, जैसा कि पिछले लोकसभा चुनाव में दिखा, वोटर अब अच्छा व साफ सुथरा प्रशासन, जवाबदेह नेतृत्व, नौकरी, सामाजिक सुरक्षा और संपूर्ण विकास चाहता है।












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