हरीश रावत बोले-कांग्रेस उत्तराखंड में भी दलित CM चाहती है, अमरिंदर के लिए असाइनमेंट की कमी नहीं
नई दिल्ली, अक्टूबर 11: कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कांग्रेस के अंदर कलह देखने को मिला था। अमरिंदर को सीएम पद से हटाए जाने के बाद कुछ दिनों बाद, कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कहा कि अमरिंदर सिंह एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें पार्टी के भीतर समायोजित किया जा सकता है, बशर्ते वह "पहल" करें। उनका मानना है कि चन्नी को नियुक्त करना एक "अच्छा कदम" था और इसने पूरे उत्तर भारत में दलित मतदाताओं पर एक बड़ा प्रभाव छोड़ा है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक, उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि वह पहाड़ी राज्य में भी एक दलित मुख्यमंत्री को देखना चाहेंगे। उत्तर प्रदेश की ओर इशारा करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा कि न केवल दलित ही नहीं बल्कि ब्राह्मण भी पार्टी के करीब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कांग्रेस ने कई ब्राह्मण सीएम नियुक्त किए थे। कांग्रेस को 'अखंड भारत' बनाने की दिशा में कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। जहां सभी समुदायों और जातियों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
हरीश रावत से जब ये पूछा गया कि, क्या पंजाब में सत्ता संघर्ष थम गया है? तो उन्होंने कहा कि, पंजाब में अब सत्ता संघर्ष नहीं है। चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से स्थिति सामान्य है। कुछ "स्व-हित समूह" हैं, जो सिद्धू और चन्नी के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि दोनों एक साथ हैं। ये मतभेद पंजाब में बड़े हितधारक पैदा कर रहे हैं। कुछ बाहरी हैं, कुछ निहित स्वार्थ वाले पूर्व कांग्रेसी हैं।
जब हरीश रावत से पूछा गया कि, अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह कांग्रेस में नहीं रहेंगे लेकिन तकनीकी रूप से वह अभी भी पार्टी के सदस्य हैं। क्या कांग्रेस ने उनके भाग्य का फैसला कर लिया है? इस पर उन्होंने कहा कि, हम कैप्टन अमरिंदर सिंह का सम्मान करते हैं। सिंह द्वारा अपमान का आरोप लगाने के बाद हमने स्पष्ट किया है। (पंजाब में) जो भी पॉलिटिकल डेवलेपमेंट हुआ है, वह केवल चीजों को बेहतर बनाने के लिए था। हमने सिंह को हर फैसले के बारे में बताया था।
हरीश रावत ने आगे कहा कि, कई विधायक अपनी चुनावी संभावनाओं को लेकर चिंतित थे और उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की बैठक की मांग की। पार्टी के पास बैठक बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। सिंह बैठक में शामिल नहीं हुए और राज्यपाल को इस्तीफा सौंपना पसंद किया। अबयह सिंह पर निर्भर है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष से मिलें और चर्चा करें (भविष्य की कार्रवाई के बारे में)। सिंह के लिए 'असाइनमेंट' की कोई कमी नहीं है, लेकिन यह तय करना और पहल करना उनका काम है। राजनीति में संभावनाओं का कोई अंत नहीं है।
जब हरीश रावत से ये पूछा गया कि, पंजाब के बाद आप उत्तराखंड में एक दलित मुख्यमंत्री देखना चाहेंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, परंपरागत रूप से दलित कांग्रेस के साथ रहे हैं। हालांकि, उत्तर भारत का उत्तर प्रदेश और आसपास के हिस्से अपवाद बने रहे जहां पिछले कुछ वर्षों में दलित हिंदुत्व के आख्यान से प्रभावित हुए। लेकिन अब उनका भाजपा से मोहभंग हो गया है क्योंकि समुदाय के मूलभूत मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया है। जहां तक दलितों को प्रमुखता देने का सवाल है, हमारे पास पंजाब जैसे राज्य में एक दलित मुख्यमंत्री है, जो सामान्य राजनीतिक विकास नहीं है। मेरा इरादा उच्च जाति के वर्चस्व वाले उत्तराखंड में एक दलित मुख्यमंत्री को देखने का था। इससे सामाजिक समरसता का मजबूत संदेश जाएगा।












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