अप्रैल माह से दिल्ली के स्कूल में होगी हैप्पीनेस क्लास, नहीं पढ़ाई जाएगी किताब
नई दिल्ली। देश की राजधानी मेंजिस तरह से पिछले कुछ दिनों में हत्या, रेप, यौन शोषण के मामले स्कूलों में सामने आए हैं, उसके बाद दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि वह नर्सरी से कक्षा 8 के बच्चो के लिए हैप्पीनेस क्लासेस का आयोजन करेगी। सरकार के इस कदम का लक्ष्य है कि छात्रों को हर बात की खुद जानकारी मुहैया कराना और उन्हें आत्मसंतुष्ट रहने की सीख देना। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को कहा कि डायरेक्टरेट ऑफ एजूकेशन व स्टेस काउंसिल ऑफ एजूकेशन रिसर्च ट्रेनिंग छात्रों के पाठ्यक्रम में एक्टिविटि बेस्ट हैप्पिनेस कार्यक्रम को शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

बच्चों को कराई जाएगी एक्टिविटी
मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को अधिक से अधिक नंबर दिलाना नहीं होता है, शैक्षणिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे लोगों में खुशी हो और उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़े। ऐसे नागरिक जो खुद से जागरूक हैं वह बेहतर समाज का निर्माण करते हैं। सिसोदिया ने बताया कि यह कार्यक्रम अप्रैल माह से शुरू हो जाएगा और बच्चों को इस तरह की एक्टविटि कराई जाएगी जिससे की वह जागरूक हो और खुश रहे।

शैक्षणिक माहौल होगा बेहतर
गुड़गांव के रेयॉन इंटरनेशन स्कूल में जिस तरह से मासूम बच्चे की हत्या की गई और गुड़गांव के एक प्राइवेट स्कूल में चार साल की बच्ची के साथ रेप की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया है। सिसोदिाय ने कहा इन घटनाओं के बीच परीक्षआ में बच्चों के प्रदर्शन को बेहतर करना काफी मुश्किल है, जरूरत है कि और भी मूलभूत काम किए जाए जिससे की शिक्षा का माहौल बेहतर हो। ऐसे में इस तरह की एक्टिविटि से स्कूलों में शैक्षणिक माहौल बेहतर होता है।

प्रोजेक्ट को लागू कराना अहम चुनौती
इस प्रोजेक्ट की इंचार्ज मैथिली बेक्टर का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत किसी तरह की कोई किताब नहीं होगी बल्कि शिक्षकों व छात्रों के लिए एक्टिविटि की जाएगी, यह एक्टिविटी हर रोज कराई जाएगी। शिक्षक इस तरह का माहौल तैयार करेंगे जहां बच्चों के साथ उनकी भावनाओं को समझा जा सके और वह पढ़ाई का दबाव, घर में पढ़ाई के लिए पड़ने वाली डांट वगैरह की बात कर सके। वसंत विहार स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की सीनियर एजूकेशन एडवायजर मधु सेना का कहना है कि यह अच्छा सुझाव है लेकिन इसे लागू कराना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए विशेषज्ञ लोगों की जरूरत होगी, जोकि बच्चों से उनकी जिंदगी के बारे में बात कर सके।












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