हंदवाड़ा शहीद मेजर सूद 22 मार्च को आने वाले थे घर, लॉकडाउन की वजह से कैंसिल हुईं छुट्टियां
चंडीगढ़। उम्र सिर्फ 31 साल और इस उम्र में ही मेजर अनुज सूद को शहादत हासिल हो गई। मेजर सूद उन बहादुरों में शामिल हो गए हैं जिनकी वीरता की मिसाल दी जाएगी। उनके पिता ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) चंद्रकात सूद की मानें तो उनके बेटे को मौत की ट्रेनिंग दी मिली थी। उन्हें अपने बेटे की शहादत का गम नहीं है बल्कि जब वह इसके बारे में बताते हैं तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। मेजर सूद शनिवार को जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर में शहीद हो गए हैं। उनके साथ उनके कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल आशुतोष शर्मा, नायक राजेश, लांस नायक दिनेश और जम्मू कश्मीर पुलिस के सब-इंसपेक्टर शकील काजी भी शहीद हो गए हैं।

मेजर ने ठुकराया कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का ऑफर
शहादत से पहले मेजर सूद की इंस्टाग्राम पोस्ट देश सेवा के उनके जज्बे को बयां करती है। उन्होंने लिखा था, 'जो चीज सबसे ज्यादा अहमियत रखती है वह है हिम्मत और सम्मान, उन चीजों को आप अगर खो देते हैं तो आपकी अहमियत आपके बूट्स पर जमी धूल से भी कम हो जाती है। बंदूक और बूट्स आपको सैनिक नहीं बनाते हैं बल्कि उनका विश्वास आपको एक सैनिक बनाता है।' हंदवाड़ा में बंधकों को छुड़ाने के लिए मेजर सूद आतंकियों से भिड़ गए और शहीद हो गए। मेजर सूद ने सेना में शामिल होने के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का ऑफर भी ठुकरा दिया था। उनकी बहन भी आर्मी ऑफिसर हैं और पूरा परिवार देश सेवा को समर्पित है। मेजर सूद का अंतिम संस्कार उनके गृहनगर चंडीगढ़ में होगा।
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पिता बोले मौत के लिए ही तो मिली थी ट्रेनिंग
उनके पिता, ब्रिगेडियर सूद कहते हैं, 'उसने सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह उसकी ड्यूटी का हिस्सा था और इसके लिए ही तो उसे ट्रेनिंग मिली थी। मुझे उसकी पत्नी के लिए दुख हो रहा है क्योंकि उनकी शादी को ज्यादा समय नहीं हुआ था। लोगों की जिंदगियां बचाना ही उसकी ड्यूटी थी।' मेजर सूद और कर्नल शर्मा एक दूसरे को इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) के दिनों से एक-दूसरे को जानते थे। नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के 120 कोर्स से पासआउट मेजर सूद यहां के सबसे ब्रिलीयंट कैडेट थे। मेजर सूद आईआईटी के लिए भी सेलेक्ट हुए थे मगर उन्होंने एनडीए को चुना। वह एनडीए के सभी छह टर्म्स में टॉर्च होल्डर थे और एकेडमी में इसे एक सम्मान माना जाता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज (आईआईएससी) से उन्होंने हाल ही में एमटेक किया था और यहां भी डिस्टीक्शन के साथ पास हुए थे।

पति की खबर से बेसुध पत्नी
मेजर सूद की पत्नी आकृति सिंह इस समय धर्मशाला में अपने माता-पिता के घर पर हैं और यहीं पर उन्हें पति की शहादत के बारे में बताया गया। शनिवार रात दो बजे उनकी व्हाट्सएप पर अपने पति से चैट हुई थी और मेजर सूद ने उन्हें बताया था कि वह पूरी तरह से ठीक हैं। उस समय एनकाउंटर चल रहा था और पति के निधन की खबर सुनने के बाद से ही वह बेसुध हैं। किसी से भी बात नहीं कर रही हैं। मेजर सूद के ससुर सूबेदार मेजर (रिटायर्ड) होशियार सिंह ने बताया कि उन्हें अपने दामाद पर गर्व है क्योंकि वह देश सेवा करते हुए शहीद हुए हैं।

पति के पास कश्मीर जाने के लिए छोड़ी नौकरी
मेजर अनुज सूद का पुश्तैनी घर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा इलाके में हैं मगर उनका परिवार पंचकुला में रहता है। दिसंबर 1989 में जन्में मेजर सूद सात साल पहले सेना में कमीशंड हुए थे और सितंबर 2017 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर आकृति सिंह से उनकी शादी हुई। नंवबर 2019 के बाद से दोनों की मुलाकात नहीं हुई थी और उस समय अनुज अपनी पोस्टिंग के लिए कश्मीर चले गए थे। आकृति ने अपनी जॉब से इस्तीफा दे दिया था और वह अपने पति के पास जाने की योजना बना रही थीं। अनुज को 22 मार्च को छुट्टी पर घर आना था लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन हो गया। इस वजह से वह घर नहीं आ सके।












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