Haldwani Land Dispute: 50000 लोगों को SC ने दी राहत, रेलवे-राज्य सरकार को जारी किया नोटिस
Haldwani Land Dispute: उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। रेलवे का दावा है कि यह जमीन उसकी है।

Haldwani Land Dispute: हल्द्वानी जमीन विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मानवीय एंगल हैं, लिहाजा यूं ही लोगों को जमीन खाली करने के लिए नहीं कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाते हुए राज्य सरकार और रेलवे को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम दस्तावेजों को देखेंगे, लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने रेलवे की ओर से नीलामी में जमीन को खरीदा है।
इस मामले की अगली सुनवाई एक हमीने बाद फिर से 7 फरवरी को सुनवाई होगी। ऐसे में साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हल्द्वानी इस जगह पर रह रहे लोगों को जगह खाली करने के लिए नहीं कहा जाएगा। गौर करने वाली बात है कि राज्य सरकार की ओर से अखबार में नोटिस जारी करके कहा गया था कि 9 जनवरी तक जमीन को खाली कर दें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोगों में खुशी की लहर है।
गौर करने वाली बात है कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर रह रहे 4365 परिवारों को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने जमीन खाली करने का आदेश दिया था। उत्तराखंड हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद से पिछले कुछ दिनों ने से लगातार यहां विरोध प्रदर्शन हो रहा है। उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। रेलवे की 78 एकड़ जमीन पर रह रहे इन 50 हजार से अधिक लोगों में तकरीबन 90 फीसदी मुस्लिम हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह 78 एकड़ जमीन पांच वार्ड में बंटी हुई है, जिसमे 25000 वोटर्स रहते हैं। यहां रहने वाले लोगों में कई महिलाएं गर्भवती हैं, काफी बुजुर्ग लोग भी यहां रहते हैं, इसमे 15000 बच्चे भी शामिल हैं। 20 दिसंबर को हाई कोर्ट के फैसले के बाद अखबार के माध्यम से लोगों को नोटिस जारी की गई है कि वह 9 जनवरी तक इस जगह को खाली कर दें। प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि इस कॉलोनी को खाली कराया जाए। जिसके लिए 10 एडीएम, 30 एसडीम रैंक के अधिकारियों को जिम्मा सौंपा गया है।
यहां कई ऐसे परिवार हैं जोकि गफूर बस्ती, धोलक बस्ती और इंदिरा नगर में वर्ष 1910 से रह रहे हैं। जब से इन लोगों को यह जगह खाली करने के लिए कहा गया है उसके बाद से बड़े पैमाने पर यहां विरोध प्रदर्शन हो रहा है। लोग कैंडल मार्च निकाल रहे हैं, धरने पर बैठे हैं। दावा कर रहे हैं कि उन्हें उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया गया है। इस इलाके में चार सरकारी स्कूल, 10 प्राइवेट स्कूल, एक बैंक, 4 मंदिर, 2 मजार, एक कब्रस्तान, 10 मस्जिद हैं जिन्हें पिछले एक दशक में तैयार किया गया है। बंभूलपुरा इलाके में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और सरकारी प्राइमरी स्कूल भी हैं, जोतिक तकरीबन सौ साल पुराने हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या ये अस्पताल और स्कूल भी बिना इजाजत यहां बन गए हैं। आखिर कैसे रेलवे अचानक से हम लोगों को जबरन यहां से निकाल सकता है। आखिर कोई ब्रिटिश काल में हुए निर्माण को खारिज कर सकता है। रेलवे के पास अपना दावा साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है। हमे जानबूझकर शोषित किया जा रहा है। हमने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और हमे भरोसा है कि हमे न्याय जरूर मिलेगा।












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