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HAL का 300वां एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर-ध्रुव उड़ान भरने को तैयार, जानिए खूबियां

नई दिल्ली- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने मंगलवार को आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। मंगलवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के हैंगर से 300वां स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर-ध्रुव बनकर बाहर निकला। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत ने बड़ी सफलता कायम कर की है। खासकर पीएम नरेंद्र मोदी जिस तरह से आत्मनिर्भर भारत पर जोर दे रहे हैं, उससे इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है। गौरतलब है कि इस समय लद्दाख की ऊंचाइयों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भी ये हेलिकॉप्टर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

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    300वां एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर-ध्रुव उड़ान भरने को तैयार

    300वां एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर-ध्रुव उड़ान भरने को तैयार

    हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 300वां स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव का निर्माण का कार्य पूरा कर लिया है। मंगलवार को हैंगर से बाहर निकलने के बाद यह उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस मौके पर एचएएल के सीएमडी आर माधवन ने कहा, 'एएलएच मार्क-1 से मार्क-4 का विकास अभूतपूर्व रहा है और इससे हेलिकॉप्टरों के स्वदेशी डिजाइनों के विकास को प्रोत्साहन मिलता है।' बता दें कि एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर तीनों सेनाओं आर्मी, एयरफोर्स और नेवी के हेलिकॉप्टर विंग के लिए आधारस्तंभ की तरह है और इससे 28 वर्षों में भारतीय सेना ने 2.8 लाख उड़ान घंटे पूरे किए हैं। इस समय एचएएल 73 एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर के उत्पादन में जुटा है। इनमें 41 आर्मी के लिए और 16-16 नेवी और भारतीय कोस्ट गार्ड के लिए है। 38 चौपर पहले ही तैयार भी हो चुके हैं और बाकी का काम 2022 तक पूरा होना है।

    1992 में भरी थी पहली उड़ान

    1992 में भरी थी पहली उड़ान

    स्वदेशी ध्रुव ने 1992 में पहली उड़ान भरी थी। इसकी विशेषताएं ही इसे भारतीय सेनाओं के इस्तेमाल के लायक बनाती हैं। इसका उपयोग हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर हिंद महासागर तक के अभियानों में किया जा रहा है। इसकी खासियत ये है कि यह हथियारों और दूसरे साजो-सामान के पेलोड के साथ लद्दाख के सर्द मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम हैं, जहां इस समय ऐसे 20 से ज्यादा हेलिकॉप्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आने वाले दिनों में जब लद्दाख में शून्य से काफी नीचे तापमान होगा, तब भी यह अपने जवानों की मदद के लिए तैनात रहेगा।

    आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी सफलता

    आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी सफलता

    2012 में एएलएच ध्रुव का हथियारों वाला संस्करण एएलएच रुद्र भारतीय सेना में शामिल किया गया था। माधवन के मुताबिक, 'ज्यादा एएलएच की सेवाएं शुरू होने के चलते हमारा फोक्स अब कस्टमर सपोर्ट की ओर बढ़ रहा है। 2 लाख 80 हजार उड़ान के घंटे के साथ एएलएच ने किसी भी मिशन, किसी स्थान और समय के लिए एक मल्टीरोल हेलिकॉप्टर के रूप में साबित किया है।' इसके प्रोटोटाइप ने 30 अगस्त, 1992 को अपनी पहली उड़ान भरी थी। रक्षा खरीद के क्षेत्र में स्वदेशी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को ही रक्षा मंत्री ने नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020 की शुरुआत की है, जिसके तहत मेक इन इंडिया के तहत पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुसार आखिरकार भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब की दिशा में विकसित करना है।

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