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शादी-तलाक पर एक नियम,बेटियों को संपत्ति में हिस्सेदारी,लिव-इन का रजिस्ट्रेशन—गुजरात UCC बिल के 5 बड़े फैसले

Gujarat Uniform Civil Code ( UCC) Bill 2026: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC बिल 24 मार्च को पेश किया। इसे सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि "समानता और एकरूपता" की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह बिल समाज में लंबे समय से चले आ रहे अलग-अलग निजी कानूनों की जगह एक समान व्यवस्था लाएगा, जिससे खासतौर पर महिलाओं को बड़ा फायदा होगा।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने भाषण में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए बड़े फैसलों-अनुच्छेद 370 हटाने, तीन तलाक कानून और राम मंदिर निर्माण-का जिक्र करते हुए कहा कि UCC उसी कड़ी का अगला कदम है। उन्होंने साफ कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका। आइए जानें 5 बड़े फैसले।

Gujarat Uniform Civil Code top 5 decisions UCC bill

🟠 एक कानून, सब पर लागू (One Law for All)

इस बिल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अब शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में अलग-अलग नियम नहीं, बल्कि एक समान कानून लागू होगा। यानी धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक ही नियम सबके लिए होगा। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि कुछ पारंपरिक प्रथाओं, जैसे कजिन मैरिज, को फिलहाल बरकरार रखा गया है और आदिवासी समुदायों को इस बिल से बाहर रखा गया है।

Gujarat UCC: मुस्लिम महिलाओं को हलाला से आजादी, दूसरी शादी पर 7 साल जेल! लिव-इन तक पर सख्त नियम, 5 बड़े फैसले
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🟠 शादी-तलाक और लिव-इन पर सख्ती (Marriage, Divorce & Live-in Rules)

UCC बिल में सबसे बड़ा बदलाव रिश्तों को लेकर आया है। अब शादी, तलाक और यहां तक कि लिव-इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। अगर कोई लिव-इन में रहता है और रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उसे 3 महीने तक की सजा हो सकती है।

साथ ही, कोर्ट के बाहर होने वाला तलाक अमान्य माना जाएगा और नियम तोड़ने पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। जबरन शादी और बहुविवाह पर भी सख्त कार्रवाई करते हुए 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।

🟠 बेटियों को बराबरी का हक (Equal Property Rights for Daughters)

इस बिल का सबसे बड़ा असर महिलाओं पर दिखेगा। अब बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा।

अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है, तो उसकी संपत्ति माता-पिता, पति/पत्नी और बच्चों में समान रूप से बांटी जाएगी। इससे उन मामलों में भी पारदर्शिता आएगी, जहां पहले विवाद और भेदभाव देखने को मिलता था।

🟠 रजिस्ट्रेशन नहीं तो जुर्माना (Mandatory Registration & Penalty)

सरकार ने विवाह पंजीकरण को पूरी तरह अनिवार्य बनाने का फैसला किया है। हालांकि अगर कोई शादी रजिस्टर नहीं कराता, तो उसे अवैध नहीं माना जाएगा, लेकिन 10 हजार से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

इसके साथ ही, UCC लागू होने से पहले हुए विवाहों के लिए भी एक विशेष रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तय की जाएगी, ताकि पुराने मामलों को भी सिस्टम में लाया जा सके।

🟠 महिलाओं के लिए बड़ा बदलाव या राजनीति? (Women Empowerment or Politics?)

राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इसे "स्वर्णिम दिन" बताते हुए कहा कि आजादी के बाद भी अलग-अलग कानूनों के कारण सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं को हुआ। उनके मुताबिक, UCC के लागू होने से अब सभी नागरिक मामलों में समान नियम लागू होंगे और महिलाओं को न्याय मिलेगा।

वहीं, कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि इसे जल्दबाजी में लाया गया और पहले इसे समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया है और कुछ समुदायों को बाहर रखने से समानता के सिद्धांत पर सवाल उठते हैं।

🔵 आगे क्या होगा?

फिलहाल यह बिल विधानसभा में पेश किया गया है और आने वाले दिनों में इस पर विस्तृत चर्चा और बहस होने की संभावना है। अगर यह कानून लागू होता है, तो गुजरात उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू होगा।

यह सिर्फ एक राज्य का फैसला नहीं, बल्कि पूरे देश में UCC को लेकर चल रही बहस को भी नई दिशा दे सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मॉडल दूसरे राज्यों और केंद्र स्तर पर किस तरह असर डालता है।

गुजरात का UCC बिल सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे को बदलने की कोशिश है। शादी, तलाक, संपत्ति और लिव-इन जैसे निजी मामलों में एकरूपता लाने का यह कदम जितना बड़ा है, उतना ही विवादित भी। अब सवाल यही है-क्या यह सच में समानता लाएगा या राजनीतिक बहस को और तेज करेगा? जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा।

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